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चेन्नई का वो टेस्ट, रोंगटे खड़े करने वाला अनुभव, सचिन की सबसे 'दर्दनाक' पारी और भारत-पाक मैच का चरम

India vs Pakistan की सीरीज को आप 'मास्टरपीस' कहिए जहां चेन्नई में पहले टेस्ट में ही सचिन तेंदुलकर और सकलैन मुश्ताक ने शो चुरा लिया था लेकिन एक के हिस्से दर्द आया दूसरे के हिस्से अपने टेस्ट इतिहास की सर्वश्रेष्ठ जीत।

IND vs PAK Chennai Test 1999

भारत और पाकिस्तान (IND vs AUS) के क्रिकेट मैचों में 1990 के दशक को कोई नहीं भूल सकता। दोनों टीमों के बीच असली मैन टू मैन कंपटीशन तब टॉप पर हुआ करता था। पाकिस्तानी खिलाड़ियों में भारतीयों से बेहतर होने का घमंड हुआ करता था और दोनों देशों के बीच बहुत ही कट्टर प्रतिद्वंदता देखने को मिलती थी। तब ना मोबाइल प्लेटफॉर्म थे और ना ही आम आदमी की पहुंच में इंटरनेट। अधिकतर मैच ब्लैक एंड व्हाइट टीवी पर देखे जाते थे और बिजली भाग जाए तो सेल वाले रेडियो पर बैकग्राउंड के डिस्टर्बेंस के साथ हिंदी में कमेंट्री सुनी जाती थी। आज की तुलना में मैच देखने के बेहद सीमित विकल्पों के बावजूद भारत-पाक मैचों वह अनुभव अब भी सिहरन पैदा कर देता है। (Images- Twitter/PTI)

कारगिल युद्ध के बाद पाक टीम का भारत दौरा

कारगिल युद्ध के बाद पाक टीम का भारत दौरा

ये बात 1999 के पाकिस्तान के भारतीय दौरे की है जब कारगिल युद्ध के बाद पाक टीम भारत में टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने भारत आई और चेन्नई टेस्ट मैच से इसकी शुरुआत हुई। ये टेस्ट पाकिस्तान क्रिकेट के इतिहास के बेस्ट टेस्ट में गिना जाता है और भारतीय क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर की सबसे दर्दनाक पारी भी इसी टेस्ट में दर्ज हुई। हार-जीत का अंतर इतना कम था और मैच का ऐसा नाटकीय अंत हुआ था कि खेल पर कोई रोचक फिल्म बननी चाहिए तो चेन्नई टेस्ट पूरी स्क्रिप्ट के लिए काफी साबित होगा। यह सीरीज ही मास्टरक्लास थी और उस समय मास्टर परफॉरमेंस देने वाले सकलैन मुश्ताक ने एक बार फिर इस मैच के दौरान का सांस रोकने वाला खुलासा किया है।

सचिन तेंदुलकर और सकलैन मुश्ताक की जंग

सचिन तेंदुलकर और सकलैन मुश्ताक की जंग

ये मैच कम ही स्कोर वाला था जहां भारत को चौथी पारी में जीत के लिए 271 रनों का टारगेट मिला था। भारतीय बल्लेबाजी की जान सचिन तेंदुलकर पहली पारी में 0 पर आउट हो गए थे। सकलैन ने द नादिर अली पॉडकास्ट पर बताया है कि मैंने सचिन को अपनी पहली या दूसरी गेंद पर आउट कर दिया था। लेकिन दूसरी पारी में सचिन ने शुरू के 10 ओवर तक मुझे एक भी चौका नहीं मारा। सचिन को फंसाने के लिए सकलैन ने दूसरा, टॉप स्पिन, ऑफ स्पिन, फ्लाइट, आर्म बॉल, फास्ट ऑफ स्पिन सब हथियार आजमा लिए लेकिन हाथ से गेंद छूटते ही सचिन इसको पढ़ लेते। सकलैन परेशान थे क्योंकि भारतीय टॉप ऑर्डर को ध्वस्त करने के बावजूद अगर पाकिस्तान अभी भी घबराया हुआ था तो वो सचिन की मौजूदगी ही थी।

एक जबरदस्त दिमागी सेट-अप

एक जबरदस्त दिमागी सेट-अप

ऐसे में सकलैन ने कप्तान वसीम अकरम से कहा कि सचिन मुझे अच्छे से पढ़ रहे हैं। आप किसी और बॉलर को लगाओ। तब वसीम ने कहा कि मुझे किसी और पर यकीन नहीं है। अगर ये टेस्ट मैच पलटेगा तो सकलैन वजह सिर्फ तुम ही होंगे। इसलिए पूरी शिद्दत से बॉलिंग करते जाओ। सकलैन आज भी वसीम के विश्वास के लिए उनका शुक्रिया अदा करते हैं। फिर क्या था सकलैन भी तबीयत के साथ सचिन के ऊपर बॉलिंग करते गए, करते गए। उन्होंने अगले 10 ओवर तेंदुलकर को एक भी वैरिएशन नहीं फेंकी। सारी गेंद ऑफ स्पिन थी और फील्डिंग भी उसी के हिसाब से सेट थे। धीरे-धीरे सचिन उन्हीं गेंदों में खो गए और भूल गए कि शुरुआत के 10 ओवर में उन्होंने कितनी वैरिएशन खेली थी।

सचिन तेंदुलकर की सबसे दर्दनाक पारी

सचिन तेंदुलकर की सबसे दर्दनाक पारी

सचिन का दिमाग केवल ऑफ स्पिन के हिसाब से सेट कराने के बाद सकलैन फिर वसीम के पास गए और कहा कि मुझे लगता है अब वक्त आ गया वैरिएशन ट्राई करने का क्योंकि वह ऑफ स्पिन के हिसाब से ढल गया है। तब तक सचिन मैच को पलटने वाली पारी खेल रहे थे। उनका शतक आ चुका था और भारत को जीत के करीब तक ले जाने के लिए उन्होंने नयन मोंगिया के साथ एक बेहतरीन साझेदारी भी जोड़ ली थी। मोंगिया के आउट होने के बाद भी सचिन टिके हुए थे और भारत का स्कोर 6 विकेट के नुकसान पर 250 पार हो गया था। अब लग रहा था कि जीत के लिए 20-22 रन कुछ ही देर की बात हैं। भारतीय लोग एक महान जीत और महान पारी का जश्न मनाने की तैयारियों में लगे हुए थे लेकिन तभी सकलैन सचिन को अपनी सबसे खतरनाक गेंद 'दूसरा' फेंकते हैं। 136 रन बनाकर खेल रहे सचिन का टॉप एज लगकर वसीम अकरम के पास पहुंचा। महान गेंदबाज अकरम ने वो कैच नहीं बल्कि मैच पकड़ लिया था। तब मास्टर ब्लास्टर नहीं भारत की जीत पवेलियन लौट रही थी। सचिन ने पीठ की तकलीफ से लड़कर वह पारी खेली थी।

'मास्टरपीस' थी वो सीरीज

'मास्टरपीस' थी वो सीरीज

इसके बाद श्रीनाथ, कुंबले, प्रसाद, जोशी जैसे खिलाड़ियों को चलता करना सकलैन और वसीम के लिए बाए हाथ का खेल साबित हुआ। भारत ने वह मैच 12 रन से हारा और पूरे देश में सनसनी मच गई ये क्या हो गया। ये दो मैचों की सीरीज थी जिसे भारत अब जीत नहीं सकता था। अगला टेस्ट दिल्ली में था और फिरोजशाह कोटला में कुंबले ने जो किया वह भारतीय टेस्ट इतिहास का सबसे अजूबा कारनामा था। उन्होंने दूसरी पारी में पाकिस्तान के सभी 10 विकेट अपने नाम किए और चेन्नई की हार को वहीं पर दफन करते हुए दिल्ली में नया चैप्टर लिख दिया। इसके साथ ही सीरीज ड्रा हुई लेकिन सकलैन हमेशा के लिए याद रह गए- चेन्नई में पाकिस्तान को अद्भुत जीत दिलाने के कारण और पूरी टेस्ट सीरीज की प्रत्येक पारी में 5 विकेट लेने के कारण। उनको इस वजह से मैन ऑफ द सीरीज अवॉर्ड दिया गया। तो कुछ ऐसी थे 90 के दशक के किस्से जिनकी बैकग्राउंड स्टोरी हमें ना केवल पुराने दौर की थ्रिल को महसूस कराती हैं बल्कि तब की चुनौतियों से भी दो-चार कराती हैं।

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