IND vs AUS: टेस्ट का मजाक उड़ाती है इंदौर की पिच, भारतीय दिग्गज ने कहा- फैंस आना कर देंगे बंद
Indore Test Pitch: सवाल ये भी है कि ये मैच पहले धर्मशाला में होना था जिसको जल्दी में इंदौर ट्रांसफर किया गया है और क्या क्यूरेटरों को इतना समय मिल गया था कि केवल दो सप्ताह सतह तैयार कर दें?

Indor Pitch: इंदौर के होल्कर स्टेडियम में भारत शायद अपने ही जाल में फंस चुका है क्योंकि रैंक टर्नर पर फिर से भारतीय बल्लेबाजों की कलई खुल गई है। एक समय था जब ऐसी पिचें विपक्षी टीमों को ही तंग करती थी क्योंकि भारतीय बल्लेबाज स्पिन खेलने के लिए दुनिया के बेस्ट खिलाड़ी माने जाते थे। लेकिन अब इंदौर जैसी 22-गज की पट्टी पर इनका हाल मेहमान टीमों से बेहाल हो सकता है। भारत के पहली पारी मात्र 109 रनों पर ढेर हो गई जिसके बाद इंदौर के विकेट की प्रकृति पर बहस शुरू हो गई है। आईसीसी मैच रेफरी क्रिस ब्रॉड इस पर फैसला ले सकते हैं। यह आश्चर्य की बात नहीं होगी कि पिच को औसत से नीचे की रेट किया जाए। नागपुर और दिल्ली को औसत की रेटिंग दी गई थी।

उलझे हुए सवाल हैं जिनका जवाब मिलना चाहिए
पिच पर पहले दिन 14 विकेट गिरे लेकिन ऑस्ट्रलिया के केवल 4 ही विकेट गिरे जिसके चलते ये टीम अगर किसी मैच को जीतने की सोच सकती है तो वो यही है। यहां अब कंगारू अपनी ढिलाई और गलती से ही हारेंगे। दूसरी ओर भारतीय क्रिकेट अपने घर पर जिस तरह घरेलू कंडिशन का नाम लेकर पिच के साथ खेल कर रहा है उसके बाद एक और टेस्ट तीन दिनों के भीतर पूरा करने की तैयारी है। लेकिन क्या यह खेल के लिए अच्छा है? ये मैच पहले धर्मशाला में होना था जिसको जल्दी में इंदौर ट्रांसफर किया गया है और क्या क्यूरेटरों को इतना समय मिल गया था कि केवल दो सप्ताह सतह तैयार कर दें? सबसे बड़ी बात ये है कि इस सीरीज में अभी तक भरपूर संख्या में फैंस आए हैं लेकिन क्या वे ऐसी पिचों पर तीन दिन के मैच के लिए बार-बार आते रहेंगे? ये कुछ ऐसे उलझे हुए सवाल हैं जिनका जवाब मिलना चाहिए।

यह टेस्ट क्रिकेट का मजाक है
भारतीय पारी में कई मौकों पर गेंद को 5 डिग्री से भी ज्यादा टर्न मिला। ये एक खतरनाक रैंक टर्नर है। यहां टेस्ट मैच शायद ही पांच दिन तक चले। इस पर भारत के पूर्व कप्तान दिलीप वेंगसरकर का मानना है कि भारत में तीन दिन में मैच खत्म करने का चलन टेस्ट क्रिकेट का मजाक बनाता है।
वेंगसरकर ने पीटीआई से कहा, "यदि आप अच्छा क्रिकेट देखना चाहते हैं तो पिच से सारा फर्क पड़ता है। आपके पास समान उछाल वाले विकेट होने चाहिए ताकि बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों को समान अवसर मिलें। यदि गेंद पहले दिन और पहले सत्र से ही टर्न लेती है और वह भी असमान उछाल के साथ, यह टेस्ट क्रिकेट का मजाक बनाता है।'

BCCI की भी बड़ी गलती!
"ये जरूरी है कि टेस्ट मैचों में आप भीड़ को फिर से वापस लाए। ऐसा इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में हो रहा है लेकिन दुर्भाग्य से भारत में ये नहीं हो रहा है। लोग टेस्ट देखने तभी आएंगे जब ये दिलचस्प हो। कोई नहीं देखना चाहेगा कि गेंदबाज बार-बार बल्लेबाजों पर पूरी तरह से हावी हो जाएं, वो भी पहले ही सेशन में।"
पिच ने शायद ऐसा व्यवहार इसलिए किया क्योंकि इसका अधिक उपयोग किया गया था और क्यूरेटरों को तैयार करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला। यह मैदान सितंबर से घरेलू क्रिकेट की मेजबानी कर रहा था और पिछले महीने ही एक वनडे खेला गया था। नाम न बताने की शर्त पर एक पिच विशेषज्ञ ने कहा कि टेस्ट मैच के लिए एक अच्छा विकेट तैयार करने में कम से कम एक महीने का समय लगता है। वेंगसरकर ने कहा, "यह भी कारण हो सकता है कि उछाल असमान है। उन्हें पानी डालने और विकेट को थामने का ज्यादा समय नहीं मिला।"
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