IND VS SL: पहले वनडे में अगर 300 रन का लक्ष्य दिया होता तो हार से कैसे बचती टीम इंडिया?

गुवाहाटी में खेले गए पहले वनडे मैच में भारत ने श्रीलंका को 374 रन का लक्ष्य दिया था, लेकिन श्रीलंका की टीम 303 रन ही बना सकी थी।

India vs Sri lanka

श्रीलंका के खिलाफ गुवाहाटी वनडे में भारत जीत गया। भारत ने बैटिंग में कई रिकॉर्ड बनाये। लेकिन इस जीत से भारत को खुश नहीं बल्कि चिंतित होना चाहिए। अगर भारत ने 373 की बजाय सिर्फ 300 रन बनाये होते तब तो वह हार गया होता ? अगर यही बॉलिंग अटैक रहा तो भारत 300 के स्कोर की रक्षा नहीं कर सकता। जिस श्रीलंका के 64 पर 3 विकेट गिर चुके थे उसने 8 विकेट के नुकसान पर 306 रन बना लिये। नौवें विकेट के लिए दासुन शनाका और कसुन रजिता ने 73 गेंदों पर 100 रनों की अटूट साझेदारी की। क्या इस गेंदबाजी के दम पर भारत विश्व कप-2023 जीत सकता है ? शायद नहीं।

क्या दौर था कुलदीप और चहल का?

भारत की बॉलिंग इस लिए बेअसर हो रही है क्यों कि अब बीच के ओवरों में विकेट लेने वाला कोई गेंदबाज नहीं है। भारत के मौजूदा गेंदबाज न तो बीच के ओवरों में विकेट ले पा रहे हैं और न ही डेथ ओवरों में रन रोक पा रहे हैं। याद कीजिए जब युजवेन्द्र चहल और कुलदीप यादव वनडे में एक साथ खेलते थे तब भारत का प्रदर्शन कैसा था ? दोनों पहली बार सितम्बर 2017 में भारत के लिए एक साथ खेले। जुलाई 2021 के पहले तक दोनों ने 34 एकदिवसीय मैचों में एक साथ गेंदबाजी की। कुलदीप के खाते में 65 और चहल के खाते में 53 विकेट दर्ज हुए। तब भारत की जीत का प्रतिशत 70.59 था। बीच के ओवरों में कुलदीप और चहल विकेट निकालते थे जिससे विपक्षी टीम के मिडिल ऑर्डर को जमने का मौका नहीं मिलता था। एक बार जब रन गति धीमी हो जाती तो विपक्षी टीम फिर उबर नहीं पाती। दोनों को मिले विकेटों की संख्या से उनकी कामयाबी का अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन जब इन दोनों की जोड़ी टूटी तो मिडिल ओवर भारत की सबसे बड़ी समस्या बन गये।

बीच के ओवरों में विकेट लेने वाले गेंदबाज नहीं

गुवाहाटी वनडे में अक्षर पटेल और युजवेन्द्र चहल पर बीच के ओवरों की जिम्मेदारी थी। चहल ने 10 ओवर में 58 रन दे कर एक विकेट लिया। अक्षर ने 10 ओवर में 58 रन दिये और कोई विकेट नहीं मिला। तेज गेंदबाजों ने 64 पर 3 विकेट निकाल कर दे दिये थे। इसके बाद का काम स्पिनरों का था। जाहिर है चहल और अक्षर की बेअसर गेंदबाजी के कारण श्रीलंका के पाथुम निसांका, धनंजय डिसिल्वा और दासुन शनाका को जमने का मौका मिल गया। 8 महीने बाद भारत को विश्वकप खेलना है। उसे सबसे अधिक मेहनत गेंदबाजी में ही करनी होगी।

भारत- 125 बार 300+ का स्कोर, 27 बार हार

वन डे इंटरनेशनल में भारत ने ही सबसे अधिक 300 प्लस का स्कोर बनाया है। यह उसकी मजबूत बैटिंग की निशानी है। लेकिन 300 प्लस स्कोर बना कर सबसे अधिक वनडे हारने का रिकॉर्ड भी भारत के नाम ही दर्ज है। यह उसकी कमजोर गेंदबाजी की निशानी है। भारत ने 125 बार तीन सौ से अधिक का स्कोर बनाया है जिसमें से 27 बार वह हार गया है। 300 सौ अधिक रन बना कर वही टीम हारती है जिसकी गेंदबाजी में दम नहीं होता। सीमित ओवर क्रिकेट में स्पिनरों की अहम भूमिका होती है। इस मोर्चे को दुरुस्त करना जरूरी है। पिछले कुछ समय से क्रिकेट रणनीतिकार बाएं हाथ के स्पिनर को टीम में शामिल करने पर जोर देते रहे हैं ताकि वह विपक्षी टीम के लेफ्टहैंडर बैटर को काउंटर कर सके। पहले रवीन्द्र जडेजा यह भूमिका निभाते थे। अब अक्षर पटेल को यह जिम्मेदारी मिली है। मौजूदा टीम में चहल और अक्षर के अलावा वाशिंगटन सुंदर शामिल हैं। क्या भारत को इस फारमूले की बजाय विकेट लेने वाले स्पिनरों की तलाश नहीं करनी चाहिए ?

विकेट लेने वाले स्पिनर हों तभी बनेगी बात

स्पिनर के रूप में रवि विश्वनोई ने पिछले एशिया कप में प्रभावित किया था। लेकिन इसके बाद उन्हें पर्याप्त मौका नहीं मिला है। उन्हें भी आजमाना चाहिए। अगर रवीन्द्र जडेजा फिट हो कर भारतीय में लौटते हैं तो भारत की स्पिन गेंदबाजी का स्वरूप क्या होगा ? फिलहाल भारतीय टीम प्रबंधन की सोच से लग रहा है कि विश्वकप में दो स्पिनरों को अंतिम एकादश में मौका मिल सकता है। चूंकि 2023 का विश्वकप भारत में हो रहा है इसलिए स्पिनर अहम भूमिका निभाएंगे। अगर जडेजा प्लेइंग इलेनव में रहते हैं तो उनका जोड़ीदार कौन होगा ? या अगर भारत कुछ नया सोचता है तो क्या कुलदीप और चहल को फिर एक साथ मौका मिल सकता है ? 2022 के आपीएल में चहल ने सबसे अधिक 27 विकेट लिये थे जब कि कुलदीप को 21 विकेट मिले थे। यानी दोनों अभी भी असरदार हैं। लेकिन इन दोनों को एक साथ खेलने का मौका तभी मिल सकता है जब टीम में एक बाएं हाथ के स्पिनर को रखने की बाध्यता शिथिल हो।

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