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IND vs AUS: बुमराह आएंगे तो क्या अकेले सिर पर आसमान उठा लेंगे?

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स्पोर्ट्स डेस्क, 22 सितंबर: बुमराह आएंगे, बुमराह आएंगे ! वे आएंगे तो क्या अकेले सिर पर आसमान उठा लेंगे ? जिस हिसाब से भारतीय गेंदबाजों की धुलाई हो रही है उसमें बुमराह क्या कर पाएंगे ? भारतीय टीम में उन्हें चुन तो लिया गया है लेकिन वे पूरी तरह फिट नहीं हैं। तभी तो वे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टी-20 में नहीं खेले। अब लुटी-पिटी टीम इंडिया बुमराह को अगर जबर्दस्ती दूसरे मैच में उतारती है तो क्या वे सौ फीसदी दे पाएंगे ? अब कागज पर गुणा-भाग करने से कुछ नहीं होगा। हर टीम विध्वंसक बल्लेबाजों से लैस है। ऑस्ट्रेलिया के ऑलराउंडर कैमरून ग्रीन ने सलामी बल्लेबाज के रूप में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को गाजर-मूली की तरह काट दिया। आंकड़े-वांकड़े अब किसी काम के नहीं। हर दिन मैदान पर खुद को साबित करना होगा। क्या भारतीय टीम केवल एक गेंदबाज, जसप्रीत बुमराह पर आश्रित है ? अगर बुमराह अपने कंधों पर इतना बोझ लेकर खेलेंगे तो उनके भी बिखरने का खतरा है।

निर्णायक मैच से पहले मुश्किल में पड़ी Team India, नागपुर में कभी नहीं चला रोहित और विराट का बल्लानिर्णायक मैच से पहले मुश्किल में पड़ी Team India, नागपुर में कभी नहीं चला रोहित और विराट का बल्ला

बहुत हो गयी दार्शनिकता, अब मैच जीतिए

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भारत के कप्तान रोहित शर्मा का कहना, आप हमेशा नतीजों के आधार पर टीम का आंकलन नहीं कर सकते। आप बेहतर खेल सकते हैं। लेकिन अगर विपक्षी टीम आपसे भी बेहतर खेले तो आपके खाते में हार ही आएगी। हां, हमारी फील्डिंग और बॉलिंग ठीक नहीं रही। लेकिन कप्तान साहिब, अगर कोई टीम 208 रनों के स्कोर का भी बचाव नहीं कर सकती तो वह कैसे जीत सकती है ? हार्दिक पांड्या का कहना है कि मोहाली में हार के बाद भी हमें अपने गेंदबाजों पर भरोसा बनाये रखना चाहिए। भरोसा ना करने का सवाल कहां है ? है तभी तो भुवनेश्वर कुमार खराब गेंदबाजी के बावजूद खेल रहे हैं।

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    भुवनेश्वर पर और कितना भरोसा?

    भुवनेश्वर पर और कितना भरोसा?

    कागज पर लिखा है, भुवी डेथ ओवरों में अच्छी गेंदबाजी करते हैं। यॉर्कर, स्लोअर और नकल गेंद उनके प्रमुख हथियार हैं। लेकन मैदान पर भुवी क्या परफॉर्म कर रहे है ? उन्होंने तीन मैचों में 19वां ओवर डाला। तीनों बार उनकी जबर्दस्त पिटाई हुई और भारत की हार वहीं तय हो गयी। पाकिस्तान के खिलाफ 19 रन, श्रीलंका के खिलाफ 14 रन और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 16 रन दिये। मोहाली में उनके चार ओवर में 52 रन बने। तो क्या भुवी को और मौका मिलना चाहिए ? क्या भरोसे की कोई हद नहीं?

    भुवी, हर्षल, चहल ने दिये 143 रन

    भुवी, हर्षल, चहल ने दिये 143 रन

    रोहित का कहना है कि मैदान के बाहर बैठे लोगों की नसीहत से प्लेईंग इलेवन तय नहीं होता। यह टीम मीटिंग में सारे पहलुओं पर चर्चा के बाद तय होता है। भावनाओं को नहीं, तथ्यों को तरजीह दी जाती है। हम प्रशंसकों या तथाकथित विशेषज्ञों की राय पर कोई ध्यान नहीं देते। लेकिन जनाब, आपको अपने फैसलों का औचित्य भी तो साबित करना होगा। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मोहाली में हार की एक वजह हर्षल पटेल रहे। उन्होंने 18वें ओवर में 22 रन लुटा दिये। मैथ्यू वेड ने हर्षल को इस ओवर में तीन छक्के मारे। हर्षल और भुवनेश्वर के 8 ओवरों में 101 रन बने। हार की तीसरी वजह युजवेन्द्र चहल रहे। उनके 3.2 ओवर में 42 रन बने। यानी इन तीन गेंदबाजों ने ऑस्ट्रेलिया को 143 रनों का तोहफा दिया। चहल भी भरोसे पर खरे नहीं उतर रहे।

    क्या इस दबाव के चलते बुमराह को लाने की जल्दबाजी है?

    क्या इस दबाव के चलते बुमराह को लाने की जल्दबाजी है?

    क्या बुमराह हर मर्ज की दवा हैं ? उन पर हद से अधिक निर्भरता भारतीय तैयारियों की खामियों खोल रही है। कोई खिलाड़ी कितना भी बड़ा क्यों न हो, कोई दिन उसका भी खराब हो सकता है। वैसे भी वे इंजुरी के बाद खेलने आएंगे। बुमराह हमेशा सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी नहीं कर सकते। वे ही क्यों, कोई गेंदबाज नहीं कर सकता। जैसे 2020 में बुमराह ने सुपर ओवर में 17 रन दे दिये थे।

    बुमराह के सुपर ओवर में 17 रन बने थे

    बुमराह के सुपर ओवर में 17 रन बने थे

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच हैमिल्टन में तीसरा टी-20 मैच खेला गया था। भारत के 180 रन के जवाब में न्यूजीलैंड भी इतने ही रन बना सका था। मैच टाई होने पर सुपर ओवर में गया। भारत की तरफ से बुमराह ने सुपर ओवर फेंका। केन विलिम्सन और गुप्टिल ने इस ओवर में 17 रन बनाये। विलिम्सन ने एक चौका और एक छक्का लगाया। गुप्टिल में एक चौका लगाया। दो रन सिंगल से एक रन बाई से बना। बुमराह के इस खर्चीले ओवर से भारत के सामने हार खतरा छा गया था। लेकिन रोहित शर्मा ने साउदी के ओवर की अंतिम दो गेंदों पर छक्का मार कर भारत को मैच जिता दिया था। यानी दिन खराब हो तो बुमराह भी बेअसर हो सकते हैं। तब क्या होगा ? जिसे कमतर समझ रहे हो उसे मौका दीजिए। अक्षर पटेल को मौका मिला तो उन्होंने दिखाया कि बड़ी टीम के खिलाफ वे अच्छी गेंदबाजी कर सकते हैं।

    4 महीने में दो बार 200 प्लस बना कर हारे

    4 महीने में दो बार 200 प्लस बना कर हारे

    जहां तक टी-20 की बात है तो भारत 2022 में दो बार 200 प्लस स्कोर की रक्षा नहीं कर सका। मोहाली में वह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 208 के स्कोर का बचाव नहीं कर सका। इस साल जून में भारत दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2011 रन बना कर भी हार गया था। इस मैच के कप्तान ऋषभ पंत थे। दक्षिण अफ्रीका ने पांच गेंद रहते 7 विकेट से यह मैच जीत लिया था। ये दोनों मैच भारत अपने घरेलू मैदान पर हारा। इसलिए पिच को भी जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते। आप चार महीने में दो बार 200 से अधिक रन बना कर हार जाएं, तो टीम कम्बिनेशन के बारे में सौ बार सोचने की जरूरत है। सब लोगों ने यह देख लिया कि भारत के मौजूदा गेंदबाज दबाव में बिखर जाते हैं। इस समस्या का समाधान खोजना बेहद जरूरी है।

    Comments
    English summary
    If Bumrah comes, will he alone raise the sky on his head?
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