BCCI पर अब लगे करप्शन के आरोप, एंटी करप्शन यूनिट के पूर्व अधिकारी ने किए चौंकाने वाले खुलासे
बीसीसीआई की एंटी करप्शन यूनिट के प्रमुख रह चुके पूर्व आईपीएस अधिकारी नीरज कुमार ने बताया है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान भारतीय क्रिकेट में फिक्सिंग को अनुभव किया था।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) में मुख्य चयनकर्ता के पद पर रहते हुए पूर्व खिलाड़ी चेतन शर्मा के स्टिंग ऑपरेशन ने भारतीय क्रिकेट पर जो बदनामी का धब्बा लगाया वो अभी तक पूरी तरह से धुला भी नहीं था कि एक और पूर्व अधिकारी ने BCCI पर गंभीर आरोप लगा दिए हैं। दरअसल, बीसीसीआई की एंटी करप्शन यूनिट के प्रमुख रह चुके पूर्व आईपीएस अधिकारी नीरज कुमार ने बताया है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान भारतीय क्रिकेट में फिक्सिंग को अनुभव किया था।
नीरज कुमार ने अपनी किताब 'ए कॉप इन क्रिकेट' में बताया है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान यह मसहूस किया था कि इस खेल के प्रशासकों द्वारा की जाने वाली हेरा फेरी के सामने मैच फिक्सिंग काफी छोटा मामला है। नीरज कुमार ने बताया है कि एक तरह से बोर्ड के कामों में हेरा-फेरी का दौर उन्होंने देखा है। 'जुगरनूट बुक्स' के द्वारा प्रकाशित इस किताब में कहा गया है कि मैंने अपने पद पर कार्य करते हुए बोर्ड के साथ तीन साल बिताए हैं और अपने कार्यकाल में मैंने महसूस किया था कि क्रिकेट में फिक्सिंग का मामला भ्रष्टाचार के सामने बहुत ही छोटा है और करप्शन की जानकारी बड़े-बड़े प्रशासकों के नाक के नीचे होती रही।
आपको बता दें कि नीरज कुमार एक जून 2015 से 31 मई 2018 तक बीसीसीआई की एंटी करप्शन यूनिट के प्रमुख रहे थे। अपनी किताब में नीरज कुमार ने कहा कि वो पाठकों को 'हमारे देश में क्रिकेट के नाम पर होने वाली 'हेरा फेरी की जानकारी' देने की कोशिश कर रहे हैं।
नीरज कुमार ने कहा है कि मुद्गल समिति और लोढ़ा समिति की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के मद्देनजर बीसीसीआई में जो चल रहा था, उसे देखते हुए मुझे नियुक्त किया गया था, लेकिन मैंने अपनी नियुक्ति के दौरान देखा कि यहां हेराफेरी का बहुत बड़ा जाल बुना हुआ है, जिसमें राज्य क्रिकेट संघ भी शामिल हैं।
नीरज कुमार ने बताया कि IPL से बोर्ड के पास काफी राजस्व आता है और इसे राज्य क्रिकेट संघ के साथ साझा किया जाता है। क्रिकेट प्रशासकों के हेरा फेरी का मामला जम्मू कश्मीर क्रिकेट संघ के साथ हुआ था। जहां इस राज्य इकाई के प्रशासकों के खिलाफ 2015 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने करोड़ों रुपए के गबन का मामला दर्ज किया था।'
नीरज कुमार ने दावा किया है कि उनकी यूनिट को कुछ ऐसी शिकायतें भी मिली थीं, जिसमें कुछ में युवा क्रिकेटरों से यौन संबंध बनाने की मांग की गई थी। उन्होंने कहा, 'खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों ने हमसे अक्सर शिकायत की कि उनसे कोच या अधिकारियों ने लाखों रुपये की धोखाधड़ी की, जिन्होंने उन्हें आईपीएल या रणजी टीम में जगह दिलाने का वादा किया और फिर गायब हो गए।'












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