कोहली ने कहा-'कुंबले से डरते थे यंग खिलाड़ी', विनोद राय की किताब में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली, 05 अप्रैल। आज से करीब पांच साल पहले विराट कोहली (जब वो कप्तान थे) और कोच अनिल कुंबले के बीच हुए विवाद ने पूरे क्रिकेट जगत को हैरान और सोच में डाल दिया था। कोहली और कुंबले दोनों ही देश के चहेते खिलाड़ियों में से एक हैं , दोनों ने ही अपने खेल से हमेशा भारत को विश्वपटल पर चमकने और इतराने का मौका दिया है और सबको उम्मीद थी कि जब ये दोनों साथ आकर काम करेंगे तो टीम इंडिया सफलता की नई ऊंचइयों पर पहुंचेगी लेकिन हुआ इसके ठीक उलट और दोनों ही खिलाड़ी एक-दूसरे के साथ नहीं बल्कि एक-दूसरे के खिलाफ हो गए।

5 साल बाद सामने आया कुंबले-कोहली विवाद का सच

5 साल बाद सामने आया कुंबले-कोहली विवाद का सच

दोनों के बीच इस कदर बात बिगड़ गई कि कुंबले को भारतीय कोच का पद छोड़ना पड़ा था। हालांकि पब्लिक प्लेटफार्म पर कोहली और कुंबले ने खुलकर कुछ नहीं कहा लेकिन जिस तरह से दोनों के मनमुटाव का असर टीम पर दिख रहा था, उससे दोनों के बीच का झगड़ा जगजाहिर हो चुका था। आज करीब पांच साल बाद दोनों के झगड़े की फिर से बातें हो रही हैं क्योंकि पूर्व CAG विनोद राय की किताब में दोनों को लेकर बड़ा खुलासा किया गया है।

‘नॉट जस्ट ए नाइटवॉचमैन: माय इनिंग्स इन द बीसीसीआई'

‘नॉट जस्ट ए नाइटवॉचमैन: माय इनिंग्स इन द बीसीसीआई'

पूर्व CAG विनोद राय ने अपनी किताब 'नॉट जस्ट ए नाइटवॉचमैन: माय इनिंग्स इन द बीसीसीआई' में साफ तौर पर कोहली-कुंबले विवाद का जिक्र किया है और लिखा है कि 'कप्तान और टीम मैनेजमेंट की मीटिंग में कोहली ने कहा था कि कुंबले से टीम के युवा खिलाड़ी काफी डरते थे क्योंकि कुंबले अनुशासन को लेकर काफी सख्त थे'।

टीम के हित के लिए सिर्फ काम किया: कुंबले

टीम के हित के लिए सिर्फ काम किया: कुंबले

तो वहीं कुंबले ने क्रिकेट प्रशासकों की समिति से कहा था कि ' उन्होंने टीम के हित को सबसे ऊपर रखते हुए काम किया और हेड कोच के रूप में उनके सफल रिकॉर्ड को खिलाड़ियों की कथित शिकायतों से अधिक महत्व दिया जाना चाहिए, उनकी किसी से कोई पर्सनल बैर नहीं हैं, वो बस एक अनुशासन मेंटेन करना चाहते हैं जिससे खिलाड़ी ऊर्जावान रहें और अच्छा प्रदर्शन करें।' ये बात साल 2017 की है, जब चैम्पियंस ट्रॉफी हुई थी।

'उन्हें गलत ढंग से सामने लाया जा रहा है'

'उन्हें गलत ढंग से सामने लाया जा रहा है'

इस दौरे के बाद कुंबले की क्रिकेट प्रशासकों की समिति की से लंबी बातचीत हुई थी। वो काफी मेंटली परेशान थे क्योंकि उन्हें लगा कि उनके साथ बुरा बर्ताव किया जा रहा है,उन्हें गलत ढंग से सामने लाया जा रहा है और एक कप्तान की बात को कोच से ज्यादा अहमियत दी जा रही है। यहां बता दें कि बीसीसीआई की क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) में सौरव गांगुली, सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण शामिल थे।

'कुंबले को दोबारा हेड कोच नियुक्त करने की सिफारिश'

'कुंबले को दोबारा हेड कोच नियुक्त करने की सिफारिश'

किताब में साफ तौर पर लिखा है कि सीएसी ने कुंबले से लंबी बातचीत की थी और इसके बाद उन्होंने कुंबले को दोबारा हेड कोच नियुक्त करने की सिफारिश करने का फैसला किया था।

'कैप्टन को कोच के काम करने का तरीका पसंद नहीं'

लेकिन कुंबले ने बड़ा फैसला लेते हुए अपने पद से ही इस्तीफा दे दिया था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि 'मुझे पता चला है कि टीम के कैप्टन को बतौर हेडकोच मेरी वर्किंग स्टाइल से काफी नाराजगी है, ये मेरे लिए हैरान कर देने वाली बात है और इसलिए मैं ये अपने पद से त्यागपत्र दे रहा हूं।' बता दें कि कुंबले के इस्तीफे के बाद रवि शास्त्री को टीम इंडिया का हेड कोच बनाया गया, जो कि चार साल तक इस पद पर रहे।

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