शानदार इंटरनेशनल करियर रहा, फिर गुमनाम हो गया, अब लाहौर में दुकान चलाता है ये अंपायर
नई दिल्ली, 24 जून: खेल की दुनिया से उतार-चढ़ाव का एक ऐसा उदाहरण सामने आ रहा है जिस पर यकीन करना मुश्किल है। कभी ICC एलीट अंपायर पैनल के सदस्य रहा ये अंपायर आज पाकिस्तान के लाहौर के लांडा बाजार में एक दुकान चला रहा है। ये अंपायर हैं पाकिस्तान के असद रऊफ जो कुछ उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं। रऊफ ने 2000 और 2013 के बीच 170 अंतरराष्ट्रीय मैचों में अंपायरिंग की, जिसमें 49 टेस्ट, 98 वनडे और 23 टी20 मैच शामिल थे।
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पेशेवर तौर पर बड़ी सफलता
ये आंकड़े किसी भी व्यक्ति के लिए बड़े हैं और पेशेवर तौर पर बड़ी सफलता की बात कहते हैं लेकिन रऊफ को अब खेल में कोई दिलचस्पी नहीं है और वह एक स्टोर का मालिक बनकर खुश है। 66 वर्षीय की राय है कि एक बार छोड़ी गई नौकरी को फिर से नहीं लिया जाना चाहिए, और इस तरह वह 2013 में अपनी भूमिका छोड़ने के बाद अंपायरिंग में नहीं लौटे।
Paktv.tv ने जब पूछा कि क्या वह अब भी क्रिकेट को फॉलो करते हैं, तो उन्होंने कहा, "नहीं, मैंने अपने पूरे जीवन में इतने सारे खेलों में अंपायरिंग की है, अब देखने के लिए कोई नहीं बचा है। मैंने 2013 के बाद क्रिकेट से बिलकुल ही..... क्योंकि मैं जो काम छोड़ता हूं उसे छोड़ ही देता हूं।"

बीसीसीआई द्वारा पांच साल का प्रतिबंध दिया गया था
रऊफ को 2016 में बीसीसीआई द्वारा पांच साल का प्रतिबंध दिया गया था, जब उनकी अनुशासन समिति ने उन्हें भ्रष्ट आचरण में शामिल होने का दोषी पाया क्योंकि उन्होंने सट्टेबाजों से मूल्यवान उपहार स्वीकार किए थे और 2013 के आईपीएल के दौरान मैच फिक्सिंग कांड में शामिल थे।
इस पर उन्होंने कहा, "मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ समय आईपीएल में बिताया है, बाकी जो मुद्दे आए वो बाद में आए। उनसे मेरा तो कोई लेना था ही नहीं, वो बीसीसीआई की तरफ से आए और उन्होन ही फैसले ले लिए।"

मॉडल द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप
रऊफ 2012 में मुंबई की एक मॉडल द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर भी सुर्खियों में रहे थे। उसने दावा किया कि पाकिस्तानी अंपायर ने उसके साथ उसके संबंध बनाए गए और उसने शादी करने का वादा किया था, लेकिन फिर वह पीछे हट गए। दावों के बारे में पूछे जाने पर, रऊफ ने कहा, "लड़की वाला मामला जब आया था, तो मैं तो उसके अगले साल भी आईपीएल करवाने गया था।"
इस तरह से रऊफ क्रिकेट से खट्टी-मीठी यादें लेकर गुमनामी गली में खो चुके हैं जहां वे केवल एक दुकान मालिक हैं और उनको इस बात का ना मलाल है, ना ही उनके मुताबिक वे किसी मजबूरी में ये काम कर रहे हैं।












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