क्या कोहली और बाबर एक ही टीम से खेलेंगे? करीबन 20 साल बाद होगा अहम टूर्नामेंट का आयोजन
करीबन बीस सालों के बाद एक अहम टूर्नामेंट की वापसी हो रही है। इस टूर्नामेंट में एशिया और अफ्रीका की टीमें खेलती हैं। भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ी एक टीम से खेलते हैं। इससे पहले ऐसा हो चुका है। जहीर, शोएब अख्तर, युवराज जैसे बड़े नाम एक टीम में शामिल होकर खेल चुके हैं।
एफ्रो-एशिया कप को फिर से लाने का निर्णय एसीए की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) के दौरान लिया गया, जहाँ छह सदस्यीय अंतरिम समिति नियुक्त की गई। एजीएम में चर्चा एशिया और अफ्रीका में क्रिकेट के अवसरों के विस्तार को लेकर थी, जिसमें खेल से परे इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

2005 में उद्घाटन टूर्नामेंट दक्षिण अफ्रीका में हुआ, जिसके बाद 2007 में भारत ने अगले आयोजन की मेजबानी की। हालाँकि केन्या को 2009 के संस्करण की मेजबानी करनी थी, लेकिन अंततः इसे रद्द कर दिया गया।
एफ्रो-एशिया कप के फिर से शुरू होने से न केवल शानदार क्रिकेट मैच देखने को मिलेंगे, बल्कि भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों को एक ही बैनर के तहत एकजुट होने का अनूठा अवसर भी मिलेगा। 2008 में एशिया कप के दौरान पाकिस्तान में अपनी आखिरी भिड़ंत के बाद से दोनों टीमें द्विपक्षीय सीरीज से अलग ही रही हैं। भारत और पाक के खिलाड़ी सिर्फ आईसीसी इवेंट्स में ही खेलते हुए दिखाई दिए हैं।
टूर्नामेंट के इतिहास पर नज़र डालें तो 2005 की सीरीज़ ड्रॉ पर समाप्त हुई थी, जबकि अंतिम मैच रद्द हो गया था। इस संस्करण में इंजमाम-उल-हक की कप्तानी में वीरेंद्र सहवाग, शाहिद अफरीदी और सनथ जयसूर्या जैसे दिग्गज क्रिकेटर शामिल थे और राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले और आशीष नेहरा जैसे अन्य उल्लेखनीय खिलाड़ी भी शामिल थे।
2007 की सीरीज़ में एशिया XI ने दबदबा बनाते हुए 3-0 से सीरीज़ जीत हासिल की। टीम में शोएब अख्तर, मोहम्मद आसिफ, मोहम्मद यूसुफ, जहीर खान, युवराज सिंह, एमएस धोनी, सौरव गांगुली और हरभजन सिंह जैसे महान क्रिकेटर शामिल थे। इस बार टूर्नामेंट का आयोजन कब होगा। इसके बारे में फ़िलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है।












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