Asia Cup: एक चिट्ठी द्रविड़ सर के नाम ! ई अटर-पटर नहीं चलेगा, विकेट टेकर बॉलर चाहिए

स्पोर्ट्स डेस्क, 6 सितंबर: आदरणीय, द्रविड़ सर ! सादर अभिवादन। मैं क्रिकेट का एक साधारण प्रशंसक हूं। इस खेल को दिलोजान से चाहता हूं। क्रिकेट की बारीकियों का मुझे ज्ञान नहीं। लेकिन इस खेल को पिछले तीन दशक से देख-सुन रहा हूं। एशिया कप में पाकिस्तान की भारत पर जीत के बाद में कुछ अर्ज करना चाहता हूं। इसे एक दर्शक की प्रतिक्रिया समिझाएगा। मैं सभी खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का सम्मान करता हूं। बस, कुछ सवाल हैं जो मन में उमड़-घुमड़ रहे हैं।

181 का स्कोर इतना भी कम नहीं था कि...

181 का स्कोर इतना भी कम नहीं था कि...

ये सही है कि हार और जीत खेल का हिस्सा हैं। हार को भी खेल भावना के साथ स्वीकार करना चाहिए। लेकिन ये भी सच है कि हर टीम सिर्फ जीत के इरादे से मैदान में उतरती है। अगर वह नहीं जीत पायी तो उसे अपनी हार पर आत्ममंथन करना चाहिए। एशिया कप सुपर फोर के मैच में भारत, पाकिस्तान से क्यों हार गया? 181 का स्कोर इतना भी कम नहीं था कि उसकी रक्षा न की जा सके। लेकिन भारत की गेंदबाजी अपने मोर्चे पर असफल रही। क्या इस मैच में भारत का बॉलिंग कम्बिनेशन सही था? क्या भारतीय क्रिकेट प्रबंधक एशिया कप को बड़ी प्रतियोगिता नहीं मानते? फिर क्यों पूरे टूर्नामेंट के लिए सिर्फ तीन तेज गेंदबाज चुने गये ? नये खिलाड़ियों को मौका देने के नाम पर क्या आप टीम और देश हित को खतरे में डालेंगे?

सिर्फ तीन तेज गेंदबाज ही क्यों चुने?

सिर्फ तीन तेज गेंदबाज ही क्यों चुने?

एशिया कप प्रतियोगिता के लिए सिर्फ तीन तेज गेंदबाज चुन गये। भुवनेश्वर कुमार, आवेश खान और अर्शदीप सिंह। क्या टूर्नामेंट के दौरान कोई घायल नहीं हो सकता? तब क्या आप सिर्फ दो फास्ट बॉलर के साथ खेलेंगे? पाकिस्तान के साथ मैच में आवेश खान घायल हो गये। उनकी जगह मौका मिला गुगली गेंदबाज रवि विश्वनोई को। ये तो किस्मत अच्छी थी कि वे चल निकले। लेकिन मैच में तीसरे तेज गेंदबाज की कमी शिद्दत से महसूस हुई। ये कमी तब और खलने लगी जब हार्दिक की गेंदों पर ताबड़तोड़ रन बनने लगे। हार्दिक पाकिस्तान के खिलाफ पिछले मैच के हीरो थे। लेकिन इस मैच में वे कमजोर कड़ी साबित हुए। उन्होंने चार ओवर में 44 रन लुटा दिये। अगर तीसरे तेज गेंदबाज का विकल्प रहता तो हार्दिक के दो ओवर के बाद गेंदबाजी में बदलाव किया जा सकता था।

विकेट लेने वाले गेंदबाज चाहिए सर !

विकेट लेने वाले गेंदबाज चाहिए सर !

कोई भी टीम मैच तभी जीतती है जब उसके पास विकेट लेने वाले गेंदबाज हों। क्या भारतीय चयनकर्ताओं ने सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाजों का चयन किया? भारत में दाएं और बाएं हाथ के तेज गेंदबाजों की एक बड़ी जमात तैयार हो गयी है। ऐसा नहीं है कि विकल्प की कमी है। जब पाकिस्तान के नवोदित नसीम शाह खेल सकते हैं तो भारत के लिए उमरान मलिक क्यों नहीं? सिर्फ तीन तेज गेंदबाजों का चयन आश्चर्यजनक है। असंतुलन की वजह से ही भुनेश्वर कुमार जैसे काबिल बॉलर का खेल बिगड़ गया। सारा दबाव उनके कंधों पर आ गया है। उन्हें पहले पावर प्ले में विकेट भी लेना है और उन्हें ही डेथ ओवरों में किफायती गेंदबाजी भी करनी है।

अकेले पड़ गए भुवी

अकेले पड़ गए भुवी

भुवी को आवेश खान और अर्शदीप सिंह से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया है। पाकिस्तान के खिलाफ 19वें ओवर में भुवनेश्वर बहुत दबाव में थे। उन पर दबाव था कि वे इस ओवर में इतना कम रन दें कि 20वें ओवर का टारगेट बड़ा हो जाए। दो ओवर में 26 रन बनाने थे। लेकिन भुनेश्वर इस दबाव में बिखर गये। उनके इस ओवर में 19 रन बने और भारत के लिए मैच यहीं खत्म हो गया।

जब हार्दिक,चहल बेअसर तो हुड्डा को क्यों नहीं आजमाया?

जब हार्दिक,चहल बेअसर तो हुड्डा को क्यों नहीं आजमाया?

रविवार शायद हार्दिक का दिन नहीं था। जब उनकी गेंदों पर चौके छक्के लग रहे थे तब दीपक हुड्डा को क्यों नहीं आजमाया गया ? दीपक हुड्डा को टीम में इस लिए शामिल किया गया है कि ताकि वो बैटिंग के अलाव बॉलिंग में योगदान करेंगे। हुड्डा को पाकिस्तानी बल्लेबाजों ने कभी खेला नहीं था। वे उनके लिए अबूझ पहली हो सकते थे। अगर उनकी गेंदों पर रन बन भी जाते तो क्या फर्क पड़ता? हार्दिक के ओवर में तो औसन 11 रन बन रहे थे। उनके पहले ओवर में ही 14 रन बन गये थे। फिर भी हुड्डा को बॉलिंग के लिए नहीं लाया गया।

क्या चल रहा है टीम में?

क्या चल रहा है टीम में?

कप्तान रोहित शर्मा बार बार कहते हैं कि वे हमेशा कुछ नया ट्राई करेंगे । फिर किया क्यों नहीं ? रविवार का दिन चतुर यजुवेन्द्र चहल के लिए भी अच्छा नहीं था। रिजवान और नवाज उनकी गेंदों पर दनादन चौके छक्के मार रहे थे। चहल के 15वें ओवर में रिजवान और नवाज ने कुल 16 रन बनाये थे। चहल को रिप्लेस कर हुड्डा को गेंद सैंपी जा सकती थी। ये जरूरी नहीं कि हुड्डा सफल ही हो जाते। लेकिन एक दो ओवर परखने में क्या हर्ज था?

अंत में

अंत में

आशा है द्रविड़ सर, आप क्रिकेट प्रेमियों की चिंता समझेंगे। हलांकि एक साधारण दर्शक के सवाल आपके लिए कोई मायने नहीं रखते। लेकिन यह भी याद रखिएगा कि हम जैसे करोडों 'जुनूनियों' की वजह से ही क्रिकेट अब भारत में धर्म बन चुका है। इसकी रक्षा कीजिए। आदर सहित, एक क्रिकेटप्रेमी दर्शक।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+