अब से बदल जायेगा क्रिकेट का खेल, इन 9 नियमों में हुआ बदलाव
नई दिल्ली। 1844 में पहली बार खेले गये अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच से लेकर अब तक करीब 178 साल बीत चुके हैं, लेकिन लोगों के बीच इस खेल की लोकप्रियता में सिर्फ बढ़ावा ही देखने को मिला है। हालांकि इतने सालों में क्रिकेट का रूप काफी बदल चुका है और इसके नियमों में भी खेल के हर विभाग में संतुलन बनाये रखने के लिये समय-समय पर बदलाव होते रहते हैं। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट का संचालन करने वाली संस्था आये कुछ सालों में इसमें कुछ बदलाव करती नजर आती है लेकिन इन बदलावों का आग्रह जो संस्था करती है वो है मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी)। एमसीसी ने बुधवार को भी क्रिकेट के खेल में बदलाव करने के लिये कुछ नये सुझाव दिये हैं, हालांकि यह सुझाव इन खेलों में कई क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं।

एमसीसी ने क्रिकेट के नियमों में 9 बदलाव करने की सिफारिश की है, जिसके बाद इस खेल का प्रारूप बदलना जाना लगभग तय माना जा रहा है। आमतौर पर एमसीसी सिर्फ सुधारों की सिफारिश करती है और उन्हें अपनाना है या नहीं इसका फैसला आईसीसी करती है लेकिन ज्यादातर मौकों पर देखा गया है कि एमसीसी की ओर से सुझाये गये सुधारों को आईसीसी बिना किसी बदलाव के अपना लेती है। आइये एक नजर उन नियमों पर डालें जिन्हें एमसीसी ने बदलने का सुझाव दिया है।
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फील्डिंग टीम की तरह से बेवजह मूवमेंट पर लगेगी 5 रन की पेनाल्टी
एमसीसी ने फील्डिंग टीम की ओर से बेवजह मूवमेंट करने के 27.4 और 28.6 के नियम में सुधार किया है। पहले इस नियम के तहत गेंद को डेड बॉल करार दिया जाता था और बल्लेबाज की तरफ से लगाया गया अच्छा शॉट भी खराब हो जाता था। एमसीसी ने इसे जानबूझकर पैदा की गई रुकावट माना है और इसे पूरी तरह से गलत बताया है। इसके तहत दोषी पायी जाने वाली टीम पर जुर्माने के रूप में 5 रन का जुर्माना लगाने की मांग की गई है, जो कि बैटिंग टीम के खाते में जोड़े जायेगें।

अब मांकड़िंग को नहीं माना जायेगा खेल भावना के विपरीत
क्रिकेट के 41.16 नियम के अनुसार अगर कोई खिलाड़ी गेंद फेंकने से पहले नॉन स्ट्राइकर एंड को छोड़कर भाग जाता था तो गेंदबाज के पास उसे आउट करने का मौका होता था। ऐसा करने पर बल्लेबाज आउट तो होता था लेकिन उसे खेल भावना के विपरीत माना जाता था और अक्सर इसको लेकर चर्चा की जाती थी। हालांकि एमसीसी ने इस नियम को आर्टिकल 41 से आर्टिकल 38 में डाल दिया है, जिसका मतलब है कि यह रन आउट माना जायेगा। इतना ही नहीं इस तरह के विकेट को मांकड़िंग के बजाय रन आउट ही कहा जायेगा।

थूक लगाने को माना जायेगा गेंद से छेड़छाड़ का मामला
एमसीसी ने आर्टिकल 41.3 के तहत मैच के दौरान किसी भी तरह से गेंद पर सलाइवा के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। कोरोना वायरस के चलते आईसीसी ने पहली बार इस नियम का इस्तेमाल किया था लेकिन अब इसे जारी रखने का फैसला किया गया है। एमसीसी की रिसर्च के अनुसार गेंदबाजों के स्विंग कराने की क्षमता पर थूक का बहुत कम या न के बराबर प्रभाव पाया गया है। ऐसे में अब कोई भी खिलाड़ी थूक का इस्तेमाल करता है तो इसे गेंद के साथ छेड़छाड़ का मामला माना जायेगा और उस पर इसी के तहत कार्रवाई की जायेगी।

रिप्लेसमेंट खिलाड़ी के नाम हो जायेगी उपलब्धियां
एमसीसी ने रिप्लेसमेंट नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए एक नया क्लॉज जारी किया है जिसके अनुसार रिप्लेस किये गये खिलाड़ियों को मैच के दौरान इस तरह से ट्रीट किया जायेगा जैसे कि वो पुराने खिलाड़ियों की जगह नहीं आये हैं बल्कि वही वो खिलाड़ी हैं। इसके तहत जिस खिलाड़ी की जगह वो रिप्लेसमेंट के रूप में शामिल होंगे उन पर उस मैच के दौरान रिप्लेस्ड खिलाड़ी की उपलब्धियां और पाबंदी भी लागू होंगी। उदाहरण के लिये अगर कोई गेंदबाज 1.4 ओवर्स के बाद चोटिल हो जाता है तो उसकी जगह रिप्लेसमेंट के रूप में आया खिलाड़ी उस 1.4 ओवर्स में हासिल किये गये विकेट और दिये गये रनों का हकदार माना जायेगा।

कैच आउट के दौरान नहीं बदलेगी स्ट्राइक
मौजूदा नियमों के अनुसार अगर किसी बल्लेबाज ने शॉट खेला और उसे मैदान पर कैच पकड़े जाने तक नॉन स्ट्राइकर ने हाफ क्रीज पार कर ली होती है तो नया बल्लेबाज नॉन स्ट्राइकर एंड पर आता है। इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने द हंड्रेड में इस नियम में बदलाव करते हुए कैच आउट होने की दिशा में नये बल्लेबाज को स्ट्राइक पर ही आने का नियम बनाया जिसकी सफलता के बाद एमसीसी ने आर्टिकल 18.11 में बदलाव करने का सुझाव दिया है। इसके तहत अगर बल्लेबाज ओवर की आखिरी गेंद पर कैच नहीं हुआ है तो नया बल्लेबाज अगली गेंद का सामना करने के लिये स्ट्राइकर एंड पर ही आयेगा।

बाहरी दखल होने पर अंपायर्स देंगे डेड बॉल
एमसीसी ने डेड बॉल के नियमों में भी बदलाव किया है और आर्टिकल 20.4.2.12 में एक नया क्लॉज जोड़ा है, इसके तहत अगर मैच के दौरान दोनों टीमों में से किसी भी पक्ष को किसी आदमी, पशु या चीज के दखल के चलते खेल में परेशानी का सामना करना पड़ता है तो उसे अंपायर डेड बॉल दे सकते हैं। उदाहरण के रूप में अगर मैदान पर कुत्ता घुस आता है, या फिर कोई दर्शक सुरक्षा घेरा तोड़कर दौड़ा चला आता है या फिर मैदान पर रखी किसी चीज से किसी भी पक्ष को नुकसान होता है तो उसे डेड बॉल करार दिया जायेगा।

नो बॉल के इस नियम में हुआ बदलाव
आर्टिकल 21.4 के तहत अगर कोई गेंदबाज अपनी गेंद फेंकने से पहले स्ट्राइकर एंड पर बल्लेबाज को रन आउट करने के लिये थ्रो करता था तो उसे नो बॉल करार दिया जाता था, हालांकि अब इसे डेड बॉल करार दिया जायेगा। क्रिकेट के खेल में यह बहुत कम ही देखने को मिलता है लेकिन इस मामले में रन आउट दिया जा सकता है, जिसे देखते हुए इसे डेड बॉल करार देने का फैसला किया गया है।

वाइड के नियम में भी हुआ बदलाव
मौजदा समय में बल्लेबाज पहले की तुलना में मैदान पर काफी चलते फिरते नजर आते हैं, जिसकी वजह से जहां बल्लेबाज खड़ा होता है वहां से गेंद के दूर रहने पर वाइड गेंद भी चली जाती है। एमसीसी ने इस नियम को गेंदबाजों के लिये नुकसान जनक पाया इसकी वजह से उसने आर्टिकल 22.1 में बदलाव किया है। नये नियम के तहत गेंद फेंकने के बजाय गेंदबाज के रन अप शुरू करने के दौरान बल्लेबाज कहां खड़ा था उसे वाइड मापने का पहला प्वाइंट माना जायेगा और गेंद फेंके जाने के बाद अगर बल्लेबाज दूर रहता है लेकिन शुरुआत में वो जहां खड़ा था उससे रेंज में होती है तो इसे वाइड नहीं माना जायेगा।












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