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हिमाचल: वीरभद्र के तेवरों से हिमाचल कांग्रेस में टेंशन, भाजपा को खुशी

Shimla news, शिमला। एक ओर हिमाचल कांग्रेस लोकसभा चुनावों में चारों सीटें जीत कर राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद तक पहुंचाने का दम भर रही है। वहीं, चुनावी मौसम में हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अपनी ही पार्टी के नेताओं के खिलाफ चुनावी रैलियों में खुलकर बोल की अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। जिससे कांग्रेस के चुनाव प्रचार पर सवाल उठ रहे हैं। कि वह पार्टी को लाभ पहुंचा रहे हैं, या नुक्सान। हिमाचल कांग्रेस में गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है। यही वजह है कि चुनावों से पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू को हटाकर पार्टी की कमान कुलदीप राठौर को सौंपी गई थी। लेकिन राठौर गुटबाजी पर लगाम कसने में कामयाब नहीं हो पाये हैं। यही वजह है कि इन दिनों चुनावी सभाओं में वीरभद्र सिंह के बोल पार्टी पर भारी पड़ने लगे हैं।

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दरअसल, जिस तरीके से पिछले दिनों पूर्व केन्द्रिय मंत्री पंडित सुखराम ने भाजपा छोड़ कांग्रेस का दामन थामा और अपने पोते के लिये मंडी से टिकट झटका, वह वीरभद्र सिंह को कतई रास नहीं आया है। हालांकि सुखराम की ओर से वीरभद्र सिंह को मनाने की कोशिशें भी हुर्इं। लेकिन वीरभद्र सिंह जब मंडी में कांग्रेस प्रत्याशी आश्रय शर्मा के चुनाव प्रचार में गये तो उन्होंने चुनावी सभाओं में पंडित सुखराम जो कि आश्रय के दादा हैं,को ही निशाने पर ले लिया। वीरभद्र सिंह ने चुनावी सभा में कहा कि वह सुखराम को कभी माफ नहीं करेंगे। उन्होंने हमेशा पार्टी को धोखा दिया है।

वीरभद्र सिंह का यह बयान सुखराम की ओर से माफी मांगने पर आया। जिसे सुनकर सभी दंग रह गये। मंडी चुनाव क्षेत्र में वीरभद्र सिंह का भी खासा प्रभाव रहा है। जानकारों का मानना है कि वीरभद्र सिंह एक तरह से मंडी से कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ ही मोर्चा खोल रहे हैं। चूंकि वह उनकी पंसद का प्रत्याशी नहीं है। हमीरपुर में भी पार्टी प्रत्याशी वीरभद्र सिंह की पसंद का नहीं है। यही नहीं,शिमला में कांग्रेस प्रत्याशी धनी राम शांडिल को भरी सभा में वीरभद्र सिंह ने पुराना पापी कह डाला, तो शांडिल को शर्मसार होना पड़ा। इसी तरह हमीरपुर में कांग्रेस प्रत्याशी के नामांकन के बाद कांग्रेस की रैली में वीरभद्र सिंह ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू को निशाने पर लेते हुये कहा कि पार्टी में आये बदलाव से पुराना गंद निकल गया है। इस पर वीरभद्र सिंह के भाषण के दौरान ही सुक्खू व आनंद शर्मा ने मंच छोड़ कर वहां से जाना पड़ा। इससे पहले वीरभद्र सिंह सुक्खू की ओर नियुक्त कांग्रेस पदाधिकारियों को कबाड़ कहा था।

आलम यह है कि वीरभद्र सिंह को कांग्रेसी भी परेशान हैं, उन्हें हर समय यही डर सता रहा है कि पता नहीं कब वीरभद्र सिंह किसके खिलाफ बोल दे। वहीं दूसरी ओर वीरभद्र सिंह के रवैये से भाजपा खूब मजे ले रही है। चुनावों में भाजपा ने अब वीरभद्र सिंह के भाषणों को भी चुनावी मुद्दा बना लिया है। हिमाचल में हालांकि चार ही सीटें हैं, पिछले चुनावों में भाजपा ने ही चारों सीटों पर कब्जा जमाया था। इस बार भाजपा ने दो सीटों पर अपने प्रत्याशी बदले हैं। कांग्रेस हालांकि संसाधनों की कमी की वजह से अभी प्रचार में पीछे ही है, लेकिन वीरभद्र सिंह के बगावती तेवर भी पार्टी के लिये मुसीबत बनते जा रहे हैं।

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