Private Bus Strike In Shimla: शिमला में थमे प्राइवेट बसों के पहिए, हड़ताल के चलते लोग परेशान
Private Bus Strike In Shimla: शिमला में थमे प्राइवेट बसों के पहिए, हड़ताल के चलते लोग परेशान
शिमला, 16 अगस्त: लोकल रूटों पर चलने वाली निजी बसों के पहिए आज यानी 16 अगस्त को हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में थम गए हैं। प्राइवेट बसों के पहियों के थमने से सामान्य जन-जीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। तो वही, शिमला की सड़कें बिना बसों के नजर आ रही हैं। प्राइवेट बसों की हड़ताल से सबसे ज्यादा दिक्कत सरकारी कर्मचारियों और विद्यार्थियों को हुई है। सरकारी कर्मचारी ऑफिस देर से पहुंचे तो वहीं, छात्रों को पैदल ही स्कूल-कॉलेजों तक जाना पड़ा। दरअसल, शिमला में एचआरटीसी बसों की संख्या सीमित है, इसके चलते इन बसों में भारी भीड़ है।

वहीं, प्रदेश सरकार और परिवहन विभाग की ओर से मांगें न मानने पर प्राइवेट बस चालक-परिचालक यूनियन एक दिवसीय हड़ताल पर चले गए है। ऐसा बताया जा रहा है कि शिमला शहर की सड़कों पर चलने वाली करीब 120 बसें आज हड़ताल पर हैं। प्राइवेट बस चालक व परिचालक यूनियन के अध्यक्ष रामलाल ठाकुर ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि सरकार उनकी मांगों की लगातार अनदेखी कर रही हे। जिसके चलते ही आज बसों के पहिये रोकने का निर्णय लिया गया है। बताया कि प्रदेश सरकार और परिवहन विभाग की ओर से मांगें न मानने की वजह से चालक व परिचालक परेशान हैं।
उन्होंने अपनी मांगों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार सरकारी परिवहन सेवा एचआरटीसी में चालक व परिचालक भर्ती में प्राइवेट बसों के अनुभवी स्टाफ को 50 फीसदी कोटा देने की मांग उनकी यूनियन ने की है। वहीं, परिवहन विभाग की ओर से आई कार्ड देने और मेडिकल सुविधा उपलब्ध करवाने, शिमला बस स्टैंड में रेस्ट रूम की सुविधा देने के साथ प्राइवेट बसों को बस स्टैंड में काउंटर टाइम देने की मांग उनकी यूनियन सरकार से कर रही है। लेकिन सरकार इस मामले पर कोई कदम नहीं उठा पाई है।
इस बीच, आम आदमी पार्टी ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार संवेदनशील मामलों पर भी गंभीर नहीं है। जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड रहा है। आप प्रवक्ता गौरव शर्मा ने कहा कि अगर समय रहते सरकार ने कदम उठाया होता, तो आज यह हालात नहीं होते। वहीं, प्राइवेट बस चालक-परिचालक यूनियन के महासचिव अखिल गुप्ता ने बताया कि एक साल से यूनियन प्रदेश सरकार के समक्ष अपनी मांगें उठा रही हैं लेकिन सरकार गंभीर नहीं है।
11 जुलाई को यूनियन ने सांकेतिक हड़ताल का ऐलान किया था, लेकिन आरटीओ शिमला के आश्वासन के बाद हड़ताल टाल दी गई। आरटीओ शिमला के आश्वासन के बावजूद कोई राहत नहीं मिली। पांच अगस्त को यूनियन ने डीसी शिमला को मांगों को लेकर ज्ञापन और हड़ताल का नोटिस दिया था। बावजूद इसके गंभीरता से नहीं लिया। सरकार और प्रशासन की बेरुखी से आहत यूनियन ने आज एक दिवसीय हड़ताल का निर्णय लिया है। एक दिवसीय हड़ताल के बाद भी अगर सरकार मांगें नहीं मानती तो सितंबर में प्रदेश स्तरीय अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।
अगस्त के आखिर में होने वाली यूनियन की प्रदेश स्तरीय आम सभा में हड़ताल की रूपरेखा तय होगी। प्राइवेट बस ऑपरेटर के महासचिव सुनील चौहान और उपाध्यक्ष प्रदीप शर्मा ने कहा कि चालक-परिचालक यूनियन की सभी मांगें जायज हैं। यूनियन ने जिला प्रशासन और बस ऑपरेटर यूनियन को अग्रिम नोटिस देकर सूचना दी है। बसें न चलने से शहर के लोगों को होने वाली असुविधा के लिए खेद जताते हैं।












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