शहीद राजेश ऋषि का पार्थिव शरीर देखकर पत्नी हुई बेसुध, हर आंखे थी नम

Shimla News, शिमला। हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में चीन सीमा के पास नामज्ञा डोगरी में गश्त के दौरान हिमखंड गिरने से राजेश ऋषि शहीद हो गए थे। 11 दिन बाद उनका पार्थिव शरीर रविवार को उनके पैतृक गांव जगतपुर जोघों पहुंचा। बता दें कि शहीद राजेश ऋषि को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों लोग पहुंचे।

सुबह तक नहीं दी गई शहीद होने की सूचना

सुबह तक नहीं दी गई शहीद होने की सूचना

बता दें कि राजेश ऋषि के शहीद होने की सूचना उनके परिजनों को रविवार की सुबह तक नहीं दी गई थी। परिजनों को इसकी सूचना तब मिली जब तिरंगे में लिपटे उनके बेटे के पार्थिव शरीर को घर पहुंचाया गया। इसके बाद घर में चीख-पुकार का माहौल हो गया। परिजन फूट-फूट कर रोने लगे। शहीद की माता और पत्नी बेसुध हो गई। बता दें कि राजेश की शादी को माह पहले ही हुई थी।

राजेश के भाई दी मुखाग्नि

राजेश के भाई दी मुखाग्नि

राजेश ऋषि की सैन्य सम्मान के साथ अतिम विदाई दी गई। इस दौरान स्थानीय विधायक व प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। बता दें कि शहीद राजेश के भाई ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। शहीद राजेश ऋषि को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी तादाद में लोग पहुंचे। राजेश की शहादत पर हर किसी आंख नम थी।

सीएम जयराम ठाकुर ने किया ट्वीट

सीएम जयराम ठाकुर ने शहीद राजेश को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित दी है। उन्होंने अपने ट्विटर संदेश में कहा है कि भगवान दिवंगत आत्मा को शांति दें तथा शोकग्रस्त परिवार को इस असहनीय दु:ख को सहने की शक्ति प्रदान करें। सीएम ने कहा कि भारी बर्फबारी के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आ रही है एवं बाकी जवानों की तलाश जारी है। सरकार दु:ख की इस घड़ी में शहीद के परिवार के साथ है।

हिमखंड गिरने से हुआ था हादसा

हिमखंड गिरने से हुआ था हादसा

बता दें कि बता दें कि शिपकिला बॉर्डर से लगते नामज्ञा डोगरी के पास 20 फरवरी को ग्लेशियर खिसकने से नियमित गश्त पर निकले जम्मू-कश्मीर राइफल्स के 16 सैनिकों में से छह बर्फ में दब गए थे। हादसे में दबे हवलदार राकेश कुमार (41) को बाहर निकाल लिया गया पर वह शहीद हो गए। उसके बाद से लगातार सर्च ऑपरेशन चल रहा है। 11वें दिन शनिवार को शहीद जवान राजेश ऋषि का शव बरामद हुआ था। अभी भी चार जवानों का पता नहीं लग पाया है और उनकी तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है। लापता जवानों को ढूंढऩे में 300 से अधिक लोग जुटे हुए हैं। इनमें सेना, पुलिस, आटीबीपी, ग्रेफ, डीआडीओ और स्थानीय लोग शामिल हैं।

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