वीरभद्र ने भाजपा के सामने चली गुगली

Congress
शिमला। हिमाचल की कांग्रेस नीत सरकार के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह आगामी लोकसभा चुनाव में राज्य की मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का सफाया करने की कोशिश में जी जान से जुटे हुए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा सांसद एवं हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ (एचपीसीए) के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और उनके पिता तथा राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के खिलाफ चल रही जांच में तेजी लाने का वीरभद्र सिंह सरकार का फैसला चुनाव से ठीक पहले भाजपा को बैकफुट पर धकेलने के मकसद से लिया गया है।

एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा कि सरकार के इस निर्णय से वीरभद्र सिंह के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के आरोप वाले मामलों से हो रही शर्मिदगी से भी कांग्रेस सरकार को राहत मिलेगी।

पिछले सप्ताह ही राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो ने नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल और उनके हमीरपुर से सांसद पुत्र अनुराग ठाकुर तथा कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ धर्मशाला स्टेडियम के नजदीक खिलाड़ियों के लिए एक रिहायशी परिसर बनाने में कथित गड़बड़ी के आरोप में मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी।

पहचान उजागर न करने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि ब्यूरो को बुधवार को प्रेम कुमार धूमल के खिलाफ मुकदमा शुरू करने की इजाजत तो मिल गई, लेकिन आनुराग ठाकुर पर मुकदमा चलाने की इजाजत मिलना अभी बाकी है।

राज्य सतर्कता ब्यूरो के आरोप-पत्र में 18 लोगों के नाम शामिल हैं, जबकि पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोपियों में धूमल, ठाकुर, अतिरिक्त प्रधान सचिव दीपक सनन, उपायुक्त अजय शर्मा और अतिरिक्त उपायुक्त गोपाल चंद शामिल हैं।

एचपीसीए को भूमि आवंटन किए जाने के समय सनन और चंद राजस्व विभाग में नियुक्त थे, जबकि शर्मा राज्य युवा सेवाएं एवं खेल के निदेशक थे। इसका सबसे रोचक पहलू यह है कि मामले की जांच में जब सरकार ने अधिकारियों पर नकेल कसनी शुरू की तो पूरा प्रशासनिक अमला अपने सहकर्मियों के समर्थन में आ गया।

इसी सप्ताह राज्य सचिवालय में हुई एक बैठक में आईएएस अधिकारियों ने कुछ आईपीएस अधिकारियों द्वारा अपने सहकर्मियों को निशाना बनाए जाने के रवैये पर नाराजगी जाहिर की थी।

भाजपा के प्रवक्ता गणेश दत्त ने राज्य सरकार पर एचपीसीए की छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री लोकसभा चुनाव के समय अपने विपक्षी दल से बदला चुकाने के लिए राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो का इस्तेमाल कर रहे हैं।

दत्त ने आईएएनएस से कहा, "मुख्यमंत्री सतर्कता ब्यूरो का धूमल और उनके बेटे के खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह अधिकारियों पर धूमल के खिलाफ फर्जी मामले दर्ज करने का दबाव डाल रहे हैं। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती ने कहा, "मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जब भी अपने खिलाफ विभिन्न अदालतों में लंबित चल रहे मामलों के कारण शर्मनाक स्थितियों में आते हैं, तो वह सतर्कता ब्यूरो का अपने पक्ष में हथियार की तरह इस्तेमाल करते हैं।"

हिमाचल उच्च न्यायालय ने हाल ही में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ आठ वर्ष से लंबित आपराधिक मानहानि के एक मामले की फिर से सुनवाई शुरू किए जाने के आदेश दिए हैं। भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले में भी दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को वीरभद्र सिंह के खिलाफ जांच तेज किए जाने के निर्देश दिए।

निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश बी.डी. अहमद और न्यायाधीश सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ ने वीरभद्र सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार, काला धन और आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई की स्थिति रिपोर्ट पर नाराजगी जाहिर की। न्यायालय ने सीबीआई को वीरभद्र सिंह पर लगे नए आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिया कहा तथा मामले की सुनवाई 30 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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