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सेना में यौन शोषण पर ध्यान देने की जरूरत

पंजाब के बठिंडा सेना स्टेशन में चार जवानों की हत्या के मामले में वहीं पर तैनात एक जवान को गिरफ्तार किया गया है.

भारतीय सेना

शुरू में इस जवान को चारों हत्याओं का चश्मदीद माना जा रहा था. उसी ने पुलिस को बताया था कि वारदात के बाद इंसास राइफल और एक कुल्हाड़ी लिए दो संदिग्धों को स्टेशन से बाहर जाते हुए देखा था. लेकिन सीसीटीवी फुटेज में ऐसा कोई नजर नहीं आने के बाद जब उसने इस जवान से विस्तार से पूछताछ की गई तो उसने मान लिया कि उसी ने अपने चारों साथियों को मारा.

इस जवान को अब गिरफ्तार कर लिया गया है. पंजाब पुलिस और सेना ने सिर्फ इतना बताया कि इसने निजी दुश्मनी की वजह से चारों पर गोलियां चलाईं. लेकिन सेना के अज्ञात सूत्रों के हवाले से कई मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि चारों मृतक इस जवान का लंबी समय से यौन शोषण कर रहे थे और उसने तंग आ कर उनकी जान ले ली.

यौन शोषण के सामने कमजोर सेना कानून

इस मामले में सेना "कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी" के तहत अलग जांच कर रही है. सेना में यौन शोषण के मामले पहले भी कई बार सामने आ चुके हैं लेकिन इस तरह के मामले कम ही सामने आते हैं. देखना होगा कि सेना इस मामले में क्या कार्रवाई करती है.

सेना कानून में यौन शोषण के मामलों में सुनवाई करने के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं है

सेना के लिए यौन शोषण के मामले एक पेचीदा विषय हैं. जानकारों का कहना है कि सेना कानून में यौन शोषण के मामलों में सुनवाई करने के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं है, जिसकी वजह से या तो पीड़ित सामने नहीं आते या कई बार शिकायत करने पर भी मुल्जिमों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती. हालांकि सेना में ही यौन शोषण के दोषी पाए गए अधिकारियों को सजा दिए जाने के मामले भी देखने को मिले हैं.

पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल एच इस पनाग ने एक लेख में लिखा है की सेना के कानून में यौन शोषण के मामलों को देखने के लिए कोई विशेष प्रावधान है ही नहीं और अगर ऐसे मामलों पर कार्रवाई की भी जाती है तो अधिकांश जांच-पड़ताल सेना के अंदर ही की जाती है और उसकी विश्वसनीयता नहीं रहती.

"द प्रिंट" वेबसाइट के लिए लिखे इस लेख में लेफ्टिनेंट जनरल पनाग ने यह भी लिखा कि सेना में इस विषय को लेकर लोगों को चुप करा दिया जाता है. वो कहते हैं कि एक बार खुद उन्होंने जब एक महिला सैन्य अधिकारी पर यौन हमले के लिए एक मेजर जनरल के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया था तब तत्कालीन सेना प्रमुख ने पनाग को फोन किया और दोबारा विचार कर लेने की सलाह दी क्योंकि उनके फैसले से सेना की प्रतिष्ठा को ठेस लगेगी.

सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल

इस मामले में भी अभी तक चुप्पी बनाए रखने की ही कोशिशें नजर आ रही हैं. मामला यौन शोषण का है ये दावे सेना और पुलिस के सूत्रों के हवाले से कई मीडिया रिपोर्टों में किए जा चुके हैं लेकिन सेना और बठिंडा पुलिस ने अभी तक इन दावों की पुष्टि नहीं की है.

बठिंडा के एसएसपी गुलनीत सिंह खुराना ने पत्रकारों को कहा, "मैं बस इतना कह सकता हूं कि इस मामले में निजी कारण हैं जिनके बारे में हम मीडिया को नहीं बता सकते और मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि आप आगे ना पूछें." देखना होगा कि सेना मामले पर और जानकारी कब जारी करती है.

इस मामले ने एक बार फिर सेना के अंदर कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल की व्यवस्था की कमियों को भी उजागर किया है. सेना की तीनो शाखाओं में आत्महत्या और भ्रातृहत्या के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं. रक्षा मंत्रालय द्वारा संसद को दी गई जानकारी के मुताबिक 2017 से 2022 तक सेना की तीनों शाखाओं में कुल मिला कर 800 से ज्यादा आत्महत्या के मामले सामने आए.

एक और रिपोर्ट के मुताबिक 2016 से 2020 के बीच भ्रातृहत्या के नौ मामले सामने आए थे. ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मंत्रालय ने मानसिक स्वास्थ्य का एक कार्यक्रम 2009 में ही शुरू किया था, जिसके तहत तनाव प्रबंधन सिखाया जाता है. जिन्हें तनाव का ज्यादा खतरा हो उन्हें चिन्हित किया जाता है और उनकी काउंसलिंग की जाती है.

सेना को देखना होगा कि इस तरह के कार्यक्रमों का कितना असर हो पा रहा है. साथ ही यह भी देखना होगा कि सहकर्मियों द्वारा यौन शोषण के मामले क्यों हो रहे हैं और समय रहते सामने क्यों नहीं आते ताकि इन पर कार्रवाई की जाए.

Source: DW

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