'नारायण त्रिपाठी बिकाऊ हैं, गणेश विसर्जन का समय', सतना की जनता ने और क्या कहा, देखिए ग्राउंड रिपोर्ट
Satna News: मध्य प्रदेश के सतना लोकसभा सीट में इस बार ओबीसी चेहरों के बीच कड़ा मुकाबला है। भाजपा की ओर से सांसद गणेश सिंह पांचवीं बार मैदान में हैं। कांग्रेस ने इनके मुकाबले विधानसभा का चुनाव दो बार से जीत रहे सिद्धार्थ कुशवाहा पर दांव लगाया है। [वीडियो नीचे हैं]
इसके अलावा बसपा से नारायण त्रिपाठी के उतरने से सतना का मुकाबला त्रिकोणी हो गया है। सतना के मतदाताओं का मूड जानने के लिए देखें वन इंडिया हिंदी के रिपोर्टर राकेश पटेल के साथ ग्राउंड रिपोर्ट।

क्या बोले सतना के मतदाता?
अमरपाटन के सतना चौराहे पर स्थित भुरी चाय दुकान पास खड़े अब्दुल रशीद से जब पूछा गया कि इस बार का चुनावी समीकरण क्या होगा तो उन्होंने जवाब दिया कि बीजेपी से लोग ऊब चुके हैं। इस बार कांग्रेस जीतेगी, सतना लोकसभा से गणेश विसर्जन होना चाहिए। इसलिए की विसर्जन का समय होता है। ज्यादा दिन नहीं रहना चाहिए और इसलिए कांग्रेस को लाना चाहिए और कांग्रेस आएगी।
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राम मुद्दे पर बोले हर धर्म में आस्था होती है। इतना भी नहीं होनी चाहिए की उसी की गाथा गाते रहिए, क्योंकि राम सबके मन में है दिल में है। अब देश की जनता क्या करती है। हमसे भी बड़े और बुद्धिजीवी हैं। यह तो वक्त बताएगा।
बीएससी से चुनाव लड़ रहे नारायण त्रिपाठी के सवाल पर बोले कि साहब यह तो बिकाऊ रोल है। इनका क्या कहना, कभी बीजेपी में चले जाते हैं। कभी कांग्रेस में चले जाते हैं। इनका कोई ठिकाना नहीं है। विधानसभा में क्या बिगाड़ लिए हैं। जनता समझदार है। कोई भी सशक्त पार्टी खरीद ले बिक जाते हैं। बिगड़ने का कुछ बिगाड़ सकते हैं लेकिन सभी ब्राह्मण समुदाय के लोग समर्थन करें यह नामुमकिन है। सतना में जातिवादी हावी नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करने वाले डॉ अनुज चतुर्वेदी ने कहा कि सतना लोकसभा सीट कई मामलों में आगे थी और आज पीछे भी हो चुकी है। लेकिन आज वर्तमान का जो परिपेक्ष है यह लोग देख रहे हैं। सतना लोकसभा सीट बीजेपी का गढ़ रही है। यहां के लोग केंद्र को देखकर वोटिंग करते हैं ना की प्रत्याशी को वर्तमान के जो सांसद हैं विकास के नाम पर कुछ नहीं किया मैं उनका समर्थन नहीं कर सकता लेकिन देश में एक स्थिर सरकार की जरूरत है।
2014 के पहले देश में इतने प्रयोग हुए हैं कि प्रयोगशाला बन गया था। जब से मोदी आए हैं तो देश में एक स्थिर सरकार है। आज देश में सत्ता दिखती है। देश में विपक्ष अपनी करतूत के बलबूते बिल्कुल पंगु बन चुका है। यहां विरोधी दलों के पास कोई मुद्दा ही नहीं है। केंद्र में भाजपा सरकार की जरूरत है। सतना जिले में एक जातिगत राजनीतिक चल रही है। जितनी समय देश का मुद्दा आता है तो जात का मुद्दा नहीं देखा जाता अमरपाटन में पूर्व राज्य मंत्री के द्वारा विकास हुआ ना की संसद के द्वारा।
इसी दुकान पर खड़े रामानंद पटेल ने कहा कि बीजेपी सतना में बुलंद है और रहेगी। सतना जिले में त्रिकोणी मुकाबला बिल्कुल नजर नहीं आ रहा है। यह चुनाव जात का नहीं है। अमरपाटन में पिछला विधानसभा चुनाव पूर्व मंत्री रामखेलावन पटेल अपने पर्सनल मतभेद के कारण हर हैं। विधानसभा और सरपंची का चुनाव नहीं है यह तो देश का चुनाव है भारत का गौरव बढ़ाने के लिए सतना लोकसभा सीट में एक जुटता।
अमरपाटन सरकारी अस्पताल के सामने मेडिकल दुकान में बैठे पंकज एडवोकेट ने बताया कि सतना लोकसभा सीट की अमरपाटन तहसील सबसे विकासशील तहसील थी। इसका क्षेत्र बहुत व्यापक था। जब से यह के 74 गांव काटे हैं। अमरपाटन एक छोटा सा कस्बा रह गया है। यहां के व्यापारियों की हालत प्रतिदिन खराब होती जा रही है। यहां पब्लिक नहीं आ रही है और अमरपाटन का विकास भी नहीं हो रहा जो भी नेता जीत कर आ रहा है। वह अमरपाटन के विकास के बारे में सोच ही नहीं रहा। 74 गांव काटने से अमरपाटन का विकास जीरो हो गया है। अमरपाटन उप तहसील बनकर रह चुकी है। सतना लोकसभा सीट में अमरपाटन राजनीति की दिशा तय करती थी। बीएसपी से नारायण त्रिपाठी के चुनाव लड़ने से समीकरण सतना का बिगड़ रहा है।
मध्य प्रदेश की सतना लोकसभा सीट पिछले दो दशकों में देश की सबसे चर्चित सीटों में से एक है। सतना ने कई बड़े-बड़े नेताओं को चुनाव जिताकर संसद भी भेजा, तो कई को हराकर पटखनी भी दी। सतना से इतिहास बनता-बिगड़ता रहा है। इस सीट से जीते हुए कई नेता सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे, लेकिन सतना विकास के शीर्ष तक नहीं पहुंच सका।












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