Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

इस शिवलिंग पर औरंगजेब ने चलाई थी तलवार, चमत्कार देख हुआ था नतमस्तक, आज भी मौजूद हैं 3 निशान

Gabinath Shiv Temple: मध्य प्रदेश के सतना जिले में एक ऐसा शिवलिंग है जिससे लाखों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। बिरसिंहपुर स्थित गैवीनाथ धाम का इतिहास काफी प्राचीन और पौराणिकता से परिपूर्ण है।

यहां महाशिवरात्रि पर्व और सावन माह पर जलाभिषेक के लिए भक्तों का जनसैलाब उमड़ता है। मान्यता है कि इस मंदिर में पूजा करने वाले श्रद्धालुओं की हर मुरादें पूरी होती है। इस शिवलिंग को उज्जैन महाकाल का दूसरा उपलिंग भी कहा जाता है।

Gavinath Dham fragmented Shivling puja

गैवीनाथ धाम तालाब किनारे शिवलिंग रूप में भगवान भोलेनाथ विराजते हैं। किवदंती के अनुसार कभी यह देवपुर नगरी हुआ करती थी। यहां के राजा वीर सिंह उज्जैन महाकाल के अनन्य भक्त थे। राजा रोजाना यहां से उज्जैन जाकर महाकाल के दर्शन करते थे।

Recommended Video

    इस शिवलिंग पर औरंगजेब ने चलाई थी तलवार, चमत्कार देख हुआ था नतमस्तक, आज भी मौजूद हैं 3 निशान

    बाद में राजा वृद्ध हो गए तो वो उज्जैन जाने में असमर्थ रहने लगे। इस पर उन्होंने महाकाल से बिरसिंहपुर आने के लिए कहा, महाकाल उनकी भक्ति से इतने अभिभूत हुए कि वो बिरसिंहपुर में गैवीनाथ के घर शिवलिंग के रूप में प्रकट हो गए।

    बुतपरस्ती के खिलाफ रहे औरंगजेब की सेना ने शिवलिंग के ऊपर तलवार से कई बार हमला किया था। इस वार से शिवलिंग 5 हिस्सों में बंट गया। कहते हैं जब शिवलिंग पर पहला वार हुआ तो उससे गंगा की धारा बही, दूसरे घाव से खून और मवाद बहने लगा। तीसरे वार से दूध की धारा, चौथे वार पर बिच्छु, बरैया और पांचवें वार में शिवलिंग से बड़ी मख्खियां निकलने लगी।

    Gabinath Shiv Temple

    मख्खियों ने औरंगजेब की सभी सेना को काटना शुरू किया और खदेड़ दिया। बादशाह समेत सेना बेहोश हो गई। वहीं पर औरंगजेब ने माफी मांगी कि मैं हिन्दुओं की मूर्तियों की परीक्षा नहीं लूंगा। कालांतर में शिवलिंग के 2 घाव तो भर गए मगर आज भी शिवलिंग 3 हिस्सों में विभाजित दिखता है।

    गैवीनाथ धाम आज अटूट श्रद्धा का केंद्र है। लोग बड़ी संख्या में यहां मनौती (मन्नत) लेकर आते हैं। मन्नत पूरी होने पर लोग शिव और पार्वती का गठबंधन करते हैं। एक छोर से दूसरे छोर तक विशाल तालाब के ऊपर से शंकर-पार्वती का गठबंधन करते हैं। महाशिवरात्रि में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। जल और बिल्वपत्र चढ़ाने के लिए होड़ मच जाती है।

    मंदिर के पट सुबह 5:00 बजे से लेकर शाम 5:00 बजे तक खुला रहते है। इस मंदिर की दूसरी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरा मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन आता है। पुरातत्व विभाग जर्जर हो चुकी इस प्राचीन मंदिर की मरम्मत करा रहा है। इसके अलावा इस मंदिर में एक भी पुजारी नहीं है। श्रद्धालु ही इस मंदिर को खोलते हैं और इसकी पूजा अर्चना करते हैं। आसपास के श्रद्धालु की मानें, तो इस मंदिर में कभी कोई पुजारी नहीं रहा है।

    More From
    Prev
    Next
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+