Ladli Behna Yojana: सतना में महिलाओं का सबर रहा परिवार, रमा बच्चों की फीस भर रही तो ज्योति बनी दुकान मालकिन
Ladli Behna Yojana: मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिलाओं और उनके बच्चों के जीवन में खुशियों की सौगात लेकर आई है। मैहर नगर के वार्ड क्रमांक-22 तिघरा कला में रहने वाली रमा कुशवाहा मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की हितग्राही बनकर बहुत खुश है। प्रत्येक माह मिलने वाली राशि से रमा अपने बच्चों की टयूशन फीस जमा कर रही है।
ट्यूशन की फीस भर रही है रमा
रमा कुशवहा ने बताया कि पहले बच्चों की पढाई में स्कूल फीस के साथ-साथ टयूशन की फीस जमा करने में परेशानी होती थी। लेकिन जब से लाडली बहना योजना का पैसा मिलना शुरू हुआ है। उन्हें बच्चों की पढाई और टयूशन की चिंता से मुक्ति मिल गई है।

सारिका आई बेटियों को स्कूल कॉलेज में पढ़ा रही
सारिका अग्रवाल बताती है कि मैं मूलतः जनपद पंचायत मझगवां अंतर्गत बरौधा गांव की निवासी हूं। मेरा परिवार डूब क्षेत्र के विस्थापित परिवारों में शामिल है। मैं दूसरों के घरों में खाना बनाने तथा मेरे पति दुकान में काम करते हैं। हम दोनों के मिलकर परिश्रम करने के बाद भी परिवार का खर्चा बडी मुश्किल से चल रहा था। ऐसे में बडी हो रही दोनों बेटियों भूमि और आकांक्षा को अच्छी शिक्षा दिलाने की चिंता हमेशा बनी रहती थी। मुख्यमंत्री द्वारा प्रारंभ की गई लाडली बहना योजना ने मुझे सहारा दिया।
राशि से आशा देवी ने खरीदा दुकान के लिए फ्रीज
आशा देवी यादव बताती है कि मेरे पति संतोष यादव हाथ ठेला से परिक्रमा मार्ग में व्यवसाय करते हैं और मैं भी वही छोटी सी दुकान खोलकर पूजा-पाठ का सामान बेचती हूं। पहले दोनों की कमाई से परिवार का खर्च पूरा नहीं हो पा रहा था। ऐसे में प्रदेश सरकार की लाडली बहना योजना मेरे जीवन में खुशियों की सौगात लेकर आई है। मैंने योजना से मिली राशि को बचाकर एक फ्रीज, नमकीन-बिस्किट तथा चाय बनाने का सामान खरीद लिया है। जिससे अब मैं दुकान में ठण्डा पानी, अन्य पेय पदार्थ तथा चाय-नाश्ता बेचकर अच्छी कमाई कर रही हूं।
ज्योति बनी सब्जी दुकान की मालकिन
ज्योति कोल का कहना है कि मैं और मेरे पति मजदूर करके अपने तीन बच्चों का भरण-पोषण करते थे। लेकिन आमदनी कम होने की वजह से जीवन अंधकार में डूबा हुआ था। ऐसे में मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना हमारे जीवन में खुशियों की उजली किरण बनकर आई है। लाडली बहना योजना से मिलने वाली राशि को कुछ माह तक जोडकर मैंने छोटी सी सब्जी की दुकान खोली।












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