Nauradehi: नेटवर्क से गायब हो जाती है यह बाघिन, बेटा टाइगर N-113 भी नहीं दिख रहा!
नौरादेही अभयारण्य में बीते दिनों टाइगर एन-2 किशन की मौत के बाद 15 टाइगर मौजूद बताए जाते हैं, लेकिन ये हैं कहां, इनकी लोकेशन कहां है, नौरादेही के अमले को यह पुख्ता जानकारी नहीं है। सबसे अहम पहली बाघिन एन-1 के गले में लगी कॉलर आईडी में तकनीकि खामी आने के कारण वह 100 मीटर से ज्यादा काम ही नहीं करती। इधर राधा का बेटा बाघ-113 करीब डेढ़ साल से गायब है! अर्थात विभाग को उसकी लोकेशन की जानकारी ही नहीं है।

केवल बाघिन राधा के गले में कॉलर आईडी, वह भी खराब
साल 2018 में जब बाघ-बाघिन को बाघ पुनर्स्थापन के समय नौरादेही में लाया गया था, उस समय दोनों के गले में कॉलर आईडी बांधा गया था। किशन की आईडी तो खराब हो गई थी, इधर राधा के गले में लगी रेडियो कॉलर आईडी भी खराब हो गई है। बाघिन ट्रैकिंग टीम से यदि 100 मीटर से ज्यादा आगे निकल जाती है तो उसकी लोकेशन नहीं मिलती या सीधे शब्दों में कहें तो वह नेटवर्क से बाहर निकल जाती है। कॉलर आईडी का बेल्ट इतना खराब हो गया है कि वह टूटकर भी गिर सकता है। बाकी किसी भी बाघ को यहां रेडियो कॉलर आईडी नहीं पहनाई गई है। बता दें कि शावक बड़े होकर दो साल के हो गए हैं, लेकिन उनकी टाइगर आईडी भी नहीं बनी है। बाघिन राधा तीन दफा तो उसकी बेटियां बाघिन एन-11 एवं एन-12 भी मां बन चुकी हैं। लेकिन इन शावकों की टाइगर आईडी नहीं बनी है। नौरादेही के एसडीओ सेवाराम मलिक ने स्थानीय मीडिया से जानकारी साझा करते हुए बताया है कि बाघिन राधा की कॉलर आईडी की रेंज कम हो गई है। वह केवल 50 से 100 मीटर पर ही काम कर रही है।
कैमरा व पगमार्ग से लेते हैं बाघों की लोकेशन
नौरादेही के बाघों की कॉलर आईडी न होने से पेट्रोलिंग टीम बाघों के कुनबे में कौन कहां है, किस हालत में है इसकी जानकारी ट्रैप कैमरा के रिकॉर्ड या पगमार्ग के माध्यम से लेता है। आखरी बार एन-113 को बीते साल जनवरी 2022 में तारादेही रेंज के आसपास देखा गया था। अधिकारी उसके जंगल में मौजूद होने की बात तो कहते हैं, लेकिन इसके लिए कोई ठोस प्रमाण नहीं हैं।












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