नगर सरकारः MIC में शामिल होने दो दर्जन पार्षद कतार में, सभी कर रहे लाॅबिंग
सागर, 11 अगस्त। नगर निगम चुनाव के बाद महापौर, अध्यक्ष के शपथ ग्रहण और प्रभार संभालने के बाद अब मंत्री बनने अर्थात मेयर इन काउंसिल (MIC) में शामिल होने के लिए अब नए-पुराने पार्षदों में जोर आजमाइश का दौर शुरु हो चुका है। सीनियर पार्षद काफी हद तक आश्वस्त नजर आ रहे हैं, तो दूसरी और पहली बार के पार्षद एमआईसी में जाने के लिए अपने-अपने नेता के यहां चक्कर काट रहे हैं, ताकि किसी भी तरह वे नगर सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल हो सकें।

जातिगत समीकरण एमआईसी में रहेगा प्रमुख आधार
नगर निगम में भले ही ओबीसी के सबसे ज्यादा पार्षद जीतकर निगम पहुंचे हैं, लेकिन इस आधार पर मेयर इन काउंसिल में शामिल नहीं किया जाएगा। जातिगत समीकरण भी यहां साधे जाएंगे। भाजपा सूत्रों के अनुसार एमआईसी के गठन में सबसे पहले सीनियरटी को ध्यान में रखा जाएगा। महापौर खेमे की पसंद से ज्यादा पुराने पार्षद, मं़ित्रयों के खेमे और विधायक खेमे के लोगों को तव्वजों दी जाएगी।
करीब दो दर्जन पार्षद एमआईसी के दावेदार
जानकारी अनुसार भाजपा से करीब दो दर्जन पार्षद एमआईसी में शामिल होने के लिए दावेदारी कर रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे भी हैं जो पिछली परिषद में भी एमआईसी सदस्य रह चुके हैं। इनमें पूर्व निगमाध्यक्ष विनोद तिवारी भी शामिल हैं। उनके अलावा अनूप उर्मिल, याकृति जड़िया, धर्मेंद्र खटीक, सविता साहू, पहले रीतेश तिवारी पहले भी एमआईसी सदस्य रह चुके हैं। इनका एमआईसी में जाना तय माना जा रहा है। इसके अलावा नईम खान, शैलेष केशरवानी, हेमंत यादव, मेघा दुबे, सोमेश जड़िया के नाम भी सामने आ रहे हैं।
निगम के इन विभागों में होते हैं सभापति
नगर निगम में कुल 10 विभागों में मेयर इन काउंसिल सदस्य बनाए जाते हैं। ये सदस्य संसदीय व्यवस्था में सरकार के मंत्री जैसी भूमिका में ही रहते हैं। इन विभागों में जलकार्य एवं सीवरेज विभाग, पीडब्ल्युडी विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग, राजस्व विभाग, वित्त एवं लेखा शाखा, बिजली एवं यांत्रिकी, स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन, यातायात एवं परिवहन प्रबंधन, प्लानिंग एवं सूचना प्रौद्योगिकी, शहरी गरीबी उपसमन विभाग शामिल हैं।












Click it and Unblock the Notifications