राजनीति का गजब संयोग: एक विधानसभा, एक पार्टी, तीन भाई तीनों बने विधायक
मध्य प्रदेश के सागर में एक परिवार और एक विधानसभा ऐसी भी है, जहां से कांग्रेस पार्टी ने एक के बाद एक तत्कालीन एमएलए का टिकट काटा, लेकिन अगला टिकट उन्हीं एमएलए के छोटे भाई को दिया गया। सबसे अच्छी बात यह रही कि तीनों भाई चुनाव जीते और 1972 से 190 तक विधायक रहे। इतना ही नहीं बाद में लोकमन खटीक 1998 के निकाय चुनाव में सागर महापौर भी रहे। इसके अलावा इनके एक और भाई शंकर लाल खटीक भाजपा से सांसद भी बने थे।


राजनीति में परिवारवाद का मसला तो अब पिछले करीब एक दशक से चर्चाओं में ज्यादा आया है, लेकिन जिले में एक विधानसभा ऐसी है जहां यह मामला हमेशा चर्चाओं में रहा। दरअसल परिसीमन के बाद गठित हुई उक्त अजा वर्ग के लिए आरक्षित विस में पहले तीन चुनाव में लगातार एक ही परिवार से तीन भाई विधायक चुनकर आए वह भी एक ही पार्टी से?
मप्र के सागर जिले में 1977 में संवैधानिक व्यवस्था के तहत हुए परिसीमन के चलते जिले में एक नए विधानसभा क्षेत्र नरयावली का गठन हुआ था। महत्वपूर्ण यह कि वर्तमान दौर में चल रहे परिवारवाद के आरोपों में जहां दोनों ही दल भाजपा-कांग्रेस घिरे हुए हैं। ऐसे में यहां यह बताना महत्वपूर्ण है कि उक्त नवगठित नरयावली विधानसभा क्षेत्र से पहले तीन चुनावों में लगातार तीन भाइयों ने ही जीत दर्ज की थी और अलग-अलग हुए इन चुनावों में तीनों भाई कांग्रेस पार्टी से ही प्रत्याशी बने थे। उल्लेखनीय है कि 1977 में परिसीमन के बाद गठित नरयावली विस से तब कांग्रेस ने स्व. लीलाधर खटीक को प्रत्याशी बनाया था।
यहां बता दें कि स्व. लीलाधर इसके पूर्व भी 1972 में खुरई सुरक्षित क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक रह चुके थे। 1980 में कांग्रेस ने स्व. लीलाधर का टिकट काटा तो जरूर, लेकिन दिया उनके छोटे भाई स्व. उत्तमचंद खटीक को 1980 से 1985 के बीच स्व. उत्तमचंद विधायक तो रहे ही इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के नजदीक होने के कारण वह प्रदेश युवक कांग्रेस अध्यक्ष भी बनें। 1985 के चुनाव में एक बार फिर पार्टी ने स्व. उत्तमचंद का टिकट काटा, लेकिन पार्टी प्रत्याशी उनके ही छोटे भाई स्व. लोकमन को बनाया गया जो कि चुनाव जीते भी। बहरहाल प्रदेश में यह एक मात्र ऐसी विधानसभा होगी जहां एक ही पार्टी द्वारा लगातार तीन चुनाव में प्रत्याशी तो बदले गए, लेकिन दिया उसी परिवार को टिकट और वह जीता भी।
दो भाई विधायक के साथ बनें महापौर भी
संभाग की एकमात्र नगर निगम में यह भी इतिहास है कि नरयावली क्षेत्र से चुने गए दोनों विधायक भाई स्व. उत्तमचंद और स्व. लोकमन महापौर भी निर्वाचित हुए। हालांकि यह और बात यह है कि महापौर रहते हुए प्रदीप लारिया उसी विधानसभा क्षेत्र नरयावली से विधायक भी निर्वाचित हुए।












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