केंद्र ने छावनी परिषद के विलय पर बुलाई बैठक, सागर से सीईओ, ब्रिगेडियर, कलेक्टर शामिल
नगर निगम से सटे हुए छावनी क्षेत्र के 7 वार्डों को निगम सीमा में शामिल किए जाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। मालूम हो कि केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश के ही छावनी क्षेत्रों को संबंधित शहरों में शामिल किए जाने का कार्य पिछले एक दशक से करने का प्रयास चल रहा है. इसी के तहत आज देश के सभी केंट क्षेत्र के सीईओ और संबंधित कलेक्टर की ऑनलाइन बैठक हुई।

मध्स प्रदेश के सागर जिले में नगर निगम सागर की सीमा से सटे हुए सदर क्षेत्र जो कि छावनी के अंडर में आता है तो लंबे समय से नगर निगम सीमा में शामिल करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तो प्रयास चल रहे हैं, लेकिन स्थानीय सदर निवासी और राजनेता इस प्रस्ताव के विरोध में है। मालूम हो कि केंद्र सरकार द्वारा पिछले एक दशक से प्रदेश के पचमढ़ी सहित देश के करीब 61 केंट क्षेत्रों को संबंधित शहरों में मिलाने के लिए प्रयासरत है। बीते रोज इसको लेकर दिल्ली में वृहद स्तर पर बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें पूरे देश के केंट के सीईओ सहित संबंधित क्षेत्र के कलेक्टर भी ऑनलाइन शामिल हुए थे। इसमें सागर केंट सीईओ श्रीमती श्रेया जैन सहित कलेक्टर दीपक आर्य, बिग्रेडियर साईंप्रसाद शामिल हुए।
स्थानीय रहवासी व कुछ जनप्रतिनिधि कर रहे विरोध
हालांकि पिछले एक दशक से चल रही इस प्रक्रिया को लेकर स्थानीय नागरिकों सहित नेताओं को भी आपत्ति है। बताया जाता है कि छावनी क्षेत्र के पार्षद शेखर चौधरी के पुत्र सहित स्थानीय भाजपा नेता मन्नूभाई त्रिपाठी ने छावनी के वार्डों को नगर निगम में शामिल करने की प्रक्रिया को लेकर कलेक्टर सहित राष्ट्रपति स्तर तक अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। श्री त्रिपाठी का कहना है कि छावनी अधिनियम 1924 के रहते हुए इसे निगम में शामिल नहीं कराया जा सकता। दरअसल यह पूरा खेल सटी हुई बेशकीमती जमीन को लेकर है। उन्होंने बताया कि इसी आधार पर आपत्ति दर्ज कराई गई है, अगर इसके बावजूद भी शासन ऐसा कोई निर्णय लेता है तो वह सुप्रीम कोर्ट तक जायेगें।
अंग्रेजों के समय से व्यवस्था, आज तक बाढ़ जैसे हालात नहीं बने
मालूम हो कि आजादी के पूर्व बसी हुई सदर की इस बस्ती की मुख्य पहचान यहां के चौराहे तो हैं ही यहां शहर में होने वाले बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात इसलिए नहीं बनते क्योंकि यहां व्यवस्थित पानी निकासी और नाले-नालियां बने हुए हैं। इतना ही नहीं क्षेत्र में प्रतिदिन न सिर्फ पेयजल सप्लाई होती है बल्कि हर क्षेत्र में यह एनाउंस किया जाता है कि पेयजल सप्लाई शुरू हो रही है।












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