'टमाटर' हो गया 'लाल', बुंदेलखंड में 110 रुपए किलो रेट, बेंगलुरू से आवक लेट, बढ़े दाम
मानसून में महंगाई की मार: बारिश के मौसम में अब घरों के किचिन का बजट गडबड़ा रहा है। विशेषकर सब्जियों की कीमतों में लगातार आ रहे उफान ने यह बजट बिगाड़त है। लौकी, हरी सब्जियां तो महंगी हो ही गई हैं, विशेषकर 'टमाटर' कुछ ज्यादा ही लाल नजर आने लगा है। पिछले दो दिनों से टमाटर 100 से 110 रुपए किलो तक कीमत पर गलियों में बिक रहा है। थोक मॉर्केट में टमाटर के रेट 80 से 100 रुपए हैं।

आम आदमी वैसे भी महंगाई की मार से तो लगातार जूझ ही रहा था कि अब किचिन के बढ़े हुए बजट ने उसे और परेशान कर दिया है। बारिश के इस के दौर में अचानक सब्जी की कीमतों में तीन गुनी से अधिक वृद्धि होने के चलते लोगों के घरों का बजट बिगडऩे लगा है। विशेषकर टमाटर तो ज्यादा ही लाल हो चुके हैं। पिछले सप्ताह तक जहां टमाटर बाजार में 15-20 रुपए किलो तक मिल रहे थे तो बीते दो दिनों से इनके भाव 100 से 110 रुपए किलो चल रहे हैं। मुख्य मार्गों पर जहां 100 रुपए तो शहर की अंदरूनी गलियों में 110 रुपए किलो तक टमाटर बेचा जा रहा है। हालांकि थोक मंडी में अभी भी टमाटर 60-80 रुपए किलो चल रहे हैं, लेकिन यह भी बहुत अधिक दाम हैं।

लौकी ने 20 से 60 तक लगाई छलांग
लौकी जो 20 रुपए किलो थी अब 50-60 रुपए किलो की बाजार में हो गई है। गृहणी कविता ने बताया कि सब्जियों के बढ़ रहे दामों के चलते घर का बजट गड़बड़ा गया है। अब टमाटर लेने के पहले 10 बार सोचना पड़ता है। कटरा साबूलाल मार्केट स्थित सब्जी बाजार में आईं, गृहणी ज्योति का कहना है कि हरी सब्जी के दामों में अचानक आए इस उछाल के चलते घर का बजट बिगड़ गया है। परिवार में बुर्जुगों को हरी सब्जी की ज्यादा जरूरत महसूस होती है, लेकिन अब वह कम मात्रा में लेनी पड़ रही है।
बैंगलौर चिंतामणि मंडी से टमाटर की खेप लेट हो गई
रामबाबू सिंह का कहना है कि तीन दिन से हो रही लगातार झमाझम बारिश के चलते किसान खेतों में सब्जी नहीं तोड़ पा रहे हैं तो साथ ही टमाटर, आलू और हरी सब्जी की फसलों को भी तेज बारिश के चलते नुकसान हुआ है। उल्लेखनीय है कि जिले का चनौआ और चितोरा क्षेत्र टमाटर की खेती के लिए पूरे प्रदेश में मशहूर है। यहां का टमाटर प्रदेश सहित दूसरे राज्यों में भी सप्लाई होता है।












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