BPCL बीना: रिफाइनरी का नो-डेव्हलपमेंट जोन कम होगा, 19 गांव में बन सकेंगे पक्के मकान

बीना रिफाइनरी के कारण इसके नो-डेव्हलपमेंट जोन के दायरे में आने वाले 19 गांव विकास से कोसों दूर हैं। दो दशक पिछड़ चुके हैं। तैयार होने वाले नए मास्टर प्लान से इनको उम्मीद जगी है।

BPCL बीना: मास्टर प्लान में कम होगा नो-डेव्हलपमेंट जोन

मध्य प्रदेश के सागर जिले में बीना के नए मास्टर प्लान पर काम शुरू हो गया है। इस बार मास्टर प्लान में सबसे बड़ा बदलाव रिफाइनरी के नो-डेव्लपमेंट जोन को लेकर हो सकता हे। आगामी 12 साल यानी 2035 तक के लिए होने जा रहे नए मास्टर प्लान में रिफाइनरी के नो डेव्लपमेंट क्षेत्र में फेरबदल करने की तैयारी चल रही है। इसको लेकर अभी तक प्रदेश सरकार से अनुमति बाकी है, लेकिन अधिकारियों ने इस पर पूरा काम कर लिया है। जल्द ही जो सर्कुलर जारी होने जा रहा है, उसमें रिफाइनरी का नो डेव्हलपमेंट एरिया कम करने का प्रावधान किया गया है।

बता दें कि रिफाइनरी के अस्तित्व में आने के बाद से आसपास के चारों तरफ 5 किलोमीटर के क्षेत्र में पक्के निर्माण करना प्रतिबंधित है। नो-डेव्लपमेंट को लेकर तत्कालीन कलेक्टर हीरालाल त्रिवेदी द्वारा जारी किए गए इस आदेश से रिफाइनरी के चारों ओर बसे 19 गाव के लोग प्रभावित हुए हैं। इन गांवों में लोग खुद की जमीन होने के बाद भी चाहकर मनमर्जी का मकान, दुकान आदि नहीं बना पा रहे हैं।

BPCL बीना: मास्टर प्लान में कम होगा नो-डेव्हलपमेंट जोन

नए मास्टर प्लान का सर्वे अप्रैल से शुरू हो जाएगा
इस मामले में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग सागर के ज्वाइंट डायरेक्टर आरके पाण्डेय ने बताया कि बीना के नए मास्टर प्लान का सर्वे संभवतः अप्रैल से शुरू कर दिया जाएगा। इसमें रिफाइनरी के नो-डेव्हलपमेंट क्षेत्र को कम करने की तैयारी है। सरकार से अनुमति मिलने का इंतजार है।

सब कुछ ठीक रहा तो बीना शहर का विस्तार हो सकेगा
मास्टर प्लान को जिस तरह से तैयार किया जा रहा है और रिफाइनरी इलाके को नो डेव्लपमेंट जोन से बाहर निकाला जा रहा है। यदि सबकुछ ठीक ठाक रहा तो इस बार बीना शहर की सीमाओं का विस्तार और विकास होना सुनिश्चित हो जाएगा। नगर पालिका भी नए सिरे से शहर विकास की प्लानिंग कर सकेगी। रेलवे लाइन पर ओवरब्रिज निर्माण चल रहे हैं, जिसके बाद विस्तार को गति मिलेगी।

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      पीएम आवास और स्वच्छता मिशन के शौचालय तक नहीं बनने दिए थे
      रिफाइनरी प्रारंभ होने के बाद नो डेव्हलपमेंट जोन के कारण इन 19 गांवों के रहवासियों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं तक का लाभ नहीं मिल पाता था। यहां तक की पीएम आवास, सीएम आवास के मकान तो ठीक ये स्वच्छता मिशन के तहत बनने वाले पक्के शौचालयों का निर्माण तक नहीं करा पा रहे थे। कुछ समय से इसमें अनापत्ति प्रमाण-पत्र के प्रावधान के बाद कुछ राहत मिल सकी थी।

      रिफाइनरी से पांच किलोमीटर के दायरे में यह गांव बसे हैं
      स्थानीय प्रशासन से मिली जानकारी अनुसार पहले बीओआरएल और अब बीपीसीएल रिफाइनरी के नो डेव्हलपमेंट एरिया में आने वाले गांवों में आकासौद, पार, हड़कल खाती, किर्रोदख् किर्रोवदा, बिल्धई, बेरखेड़ी, टांडा, चक्क आगासौद, कठाई, देहरी, ढिमरोली, हांसलखेड़ी, भाखरई, नेहरोन, बम्होरी, केला, धनौरा पूरा, पिपरिया, पूरन, पुरैना आदि गांव शामिल हैं।

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