Rampur Chunav Parinam: कौन हैं Aakash Saxena, रामपुर में जिन्होंने लिया 2022 का बदला
रामपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी उम्मीदवार आकाश सक्सेना विजयी घोषित हुए हैं। उन्होंने सपा प्रत्याशी आसिम रजा को हराया है।
Rampur Bypolls Results 2022 : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में रामपुर सीट से हार का सामना करने वाले बीजेपी नेता आकाश सक्सेना उपचुनाव आखिरकार अपना बदला ले लिया। आजम खान के सजायाफ्ता होने के बाद खाली हुई रामपुर सदर विधानसभा सीट पर 5 दिसंबर को उपचुनाव हुए थे। 8 दिसंबर यानी आज परिणाम सामने आ गया। इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार आकाश सक्सेना विजयी घोषित हुए हैं। उन्होंने सपा प्रत्याशी आसिम रजा को हराया है। आइए जानते हैं कौन हैं आजम खान के गढ़ में कमल खिलाने वाले आकाश सक्सेना?

कौन हैं Akash saxena ?
आकाश सक्सेना ही वो शख्स हैं जिनकी वजह से सपा के कद्दावर नेता आजम खान सलाखों के पीछे पहुंच गए। ये कहना भी गलत नहीं होगा कि आकाश की वजह आजम खान की विधायकी चल गई।

चार बार विधायक रहे शिव बहादुर सक्सेना के बेटे हैं आकाश
आकाश सक्सेना के पिता शिव बहादुर सक्सेना लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहे हैं। शिव बहादुर स्वार विधानसभा क्षेत्र से लगातार चार बार बीजेपी के विधायक चुने गए। कल्याण सिंह की सरकार में मंत्री भी रहे।

2017, 2022 विधानसभा चुनाव में मिली थी हार
आकाश सक्सेना ने साल 2017 के विधानसभा चुनाव में रामपुर शहर विधानसभा क्षेत्र से आजम खान के सामने चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद बीजेपी ने 2022 में फिर आकाश सक्सेना को उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में भी आकाश को हार मिली। वह आजम खान से करीब 55 हजार वोटों से हारे थे।

आजम के करीबी आसिम रजा को हराकर आकाश ने लिया बदला
आकाश ने राजनीति में सक्रिय होने से पहले ही आजम खान के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया था। साल 2019 में आकाश ने आजम, के उनकी पत्नी पूर्व सांसद तजीन फात्मा और बेटे विधायक अब्दुल्ला आजम के खिलाफ फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाने का मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मामले में अब्दुल्ला की विधायकी भी हाईकोर्ट से रद्द हो गई थी। उधर, भड़काऊ भाषण के मामले में आजम को तीन साल की सजा हो गई और उनकी विधायकी भी चली गई।
अब उपचुनाव में आकाश सक्सेना ने रामपुर में फतेह हासिल कर ली है। इस सीट पर आजम खान के करीबी आसिम राजा मैदान में थे। आजम खान ने खुद उनके लिए जनसभाएं की और वोट अपील की, लेकिन ये सियासी जंग हार गए।












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