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मां शबनम से मिले रामपुर जेल पहुंचा बेटा ताज, राष्ट्रपति को पत्र लिखकर लगाई थी माफी की गुहार

Shabnam And Saleem Shocking Story, रामपुर। फांसी की सजा मुकर्रर होने के बाद शबनम और सलीम ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका लगाई थी, जिसे खारिज कर दिया गया है। हांलकि, शबनम को किस दिन फांसी दी जाएगी इसका फैसला अभी नहीं हुआ है। वहीं, रविवार को शबनम का बेटा उससे मिलने जेल पहुंच गया। इस दौरान उसकी देखभाल करने वाला बुलंदशहर निवासी पत्रकार उस्मान भी साथ रहे। बता दें, 14-15 अप्रैल 2008 की काली रात को शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने पूरे परिवार की हत्या कर दी। इस मामले में शबनम को फांसी की सजा सुनाई गई है।

Amroha News: Shabnam Son Taj reached Rampur jail to meet her

शबनम ने जेल में दिया था ताज को जन्म
शबनम ने जेल में बेटे ताज को जन्म दिया था, जिसकी देखभाल बुलंदशहर के सुशीला विहार कॉलोनी में रहने वाले पत्रकार उस्मान सैफी कर रहे हैं। रविवार को उस्मान और उसका बेटा दोपहर करीब 12:00 बजे के आस पास रामपुर जिला कारागार के अंदर शबनम से मिलने गए। बता दें कि उस्मान सैफी के संरक्षण में शबनम का बेटा ताज पला-बढ़ा है। ताज को भी अब अपने मां (शबनम) के गुनाहों का अहसास है। हालांकि, 13 साल के ताज ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर अपनी मां को माफ करने की गुहार लगाई है।

'अंकल मेरी मां को कर दो माफ'
पत्रकार उस्मान ने ताज द्वारा राष्ट्रपति के नाम पत्र लिखे जाने की जानकारी दी। शबनम के 13 साल के बेटे ताज ने राष्ट्रपति के नाम एक पत्र लिखा है, जिसमें उसने अपनी मां (शबनम) के लिए माफी की गुहार लगाई है। शबनम के बेटे ताज ने अपने पत्र में कहा कि, 'राष्ट्रपति अंकल जी, मेरी मां को माफ कर दो।'

जानिए कौन है शबनम, जिसे आजाद भारत के इतिहास में मिलेगी पहली बार फांसी
शबनम अली, उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के हसनपुर थाना क्षेत्र के बावनखेड़ी गांव की रहने वाली है। शबनम के पिता शौकत अली शिक्षक थे। वो उनकी एकलौती बेटी थी और स्कूल में छोटे बच्चों को पढ़ाती थी। शबनम ने अंग्रेजी और भूगोल में एमए किया था। बच्चों को पढ़ाने के दौरान शबनम को सलीम से प्यार हो गया। लेकिन सलीम पांचवीं फेल था और पेशे से एक मजदूर था। इसलिए दोनों के संबंधों को लेकर परिजन विरोध कर रहे थे। 14-15 अप्रैल 2008 की काली रात को शबनम ने सलीम के साथ मिलकर अपने पूरे परिवार की हत्या कर दी। इस जघन्य हत्याकांड में शबनम के परिवार का कोई जिंदा बचा था तो वो खुद शबनम और उसके पेट में पल रहा दो माह का बेटा ही था। बता दें कि शबनम अली, वो महिला कैदी है जिसे आजाद भारत के इतिहास में पहली बार फांसी पर लटकाया जाएगा।

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