चिट्ठी ना कोई संदेश : राजस्थान का याकूब काजी ओमान में 7 साल से बंधक, पत्नी की PM मोदी से गुहार

राजस्थान का याकूब काजी ओमान में बंधक, सात साल से आंसू बहा रहा गांव टांई का यह परिवार

झुंझुनूं, 13 मई। घर के दरवाजे पर आहट भी होती है तो आंखों की पुतलियां चौड़ी हो जाती हैं। इस उम्मीद में कि याकूब आया होगा या कोई उसकी खैर खबर लाया होगा, मगर फिर यहां आलम जगजीत सिंह की उस गजल की तरह हो जाता है​ जिसके बोल हैं-'चिट्ठी ना कोई संदेश जाने वह कौन सा देश...'

याकूब काजी गांव टांई झुंझुनूं

याकूब काजी गांव टांई झुंझुनूं

यह पीड़ा है राजस्थान के झुंझुनूं जिले के गांव टांई के याकूब काजी के परिवार की है। परिवार का मुखिया खुद याकूब काजी लापता है। सात साल से उसका कोई सुराग नहीं। परिजन बेबस हैं। आर्थिक स्थिति भी दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। पिता की वृद्धावस्था पेंशन के अलावा आय का कोई अन्य जरिया नहीं।

 परिजनों को रो-रोकर बुरा हाल

परिजनों को रो-रोकर बुरा हाल

याकूब की पत्नी, बेटा व बेटी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों की कोई दुआ काम नहीं आ रही। याकूब काजी सात साल पहले विदेश में कमाने के लिए ओमान गया था। वहां से आज तक नहीं लौटा। वह कहां और किस हाल में है? इसकी जानकारी परिजनों को नहीं। लाख कोशिशों के बाद भी कोई सम्पर्क नहीं हो पा रहा।

परिजनों से नहीं हो रहा सम्पर्क

परिजनों से नहीं हो रहा सम्पर्क

लंबे समय तक परिजनों का याकूब काजी से सम्प​र्क नहीं होने पर शुरुआत में तो उन्होंने उसकी वतन वापसी की अपने स्तर पर कोशिश की, मगर अब प्रशासन और जनप्रतिनिधयों के आगे भी गुहार लगा रहे हैं। हर किसी से उसकी सकुशल वतन वापसी की मांग की जा रही है।

पीएम मोदी को लिखा पत्र

पीएम मोदी को लिखा पत्र

याकूब काजी की पत्नी कलसुम ने पीएमओ व विदेश मंत्री को पत्र लिखा है। पत्र की प्रतियां मुख्यमंत्री, राज्यपाल, सांसद व विधायक और झुंझुनूं जिला कलेक्टर को भी भेजी गई है। फिलहाल कहीं से भी कोई सकारात्मक पहल होती नहीं दिख रही। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र से उम्मीद है।

2015 में गया था ओमान

2015 में गया था ओमान

मीडिया से बातचीत में कलसूम ने बताया कि उसका पति याकूब कमाने के लिए साल 2015 में ओमान गया था। यह उसकी तीसरी मुसाफरी थी। दो बार में तो वह सकुशल लौट आया था, मगर अबकी बार नहीं लौटा। ना ही कोई सम्पर्क हो रहा है।

ओमानी ने बनाया बंधक

ओमानी ने बनाया बंधक

ओमान में रहने वाले शेखावाटी के अन्य कामगारों से याकूब के परिजनों को पता चला कि वहां किसी ओमानी शख्स ने याकूब को बंधक बना रखा है। इस बार वह वीजा बदलकर काम करना शुरू किया था और फंस गया। याकूब के एक बेटा व एक बेटी है।

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