Rajasthan News: राजस्थान में क्यों हो रही समाधी खाद की चर्चा,जानिए मृत गौवंशों से कैसे बनाई जाती है यह खाद
Rajasthan Graveyard Manure News: देश के किसान अपनी फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए कई तरह के खाद का इस्तेमाल करते है लेकिन आज हम आपकों ऐसे खाद के बारे में बताएंगे जो शायद कभी आपने सुना भी नहीं होगा।
दरअसल अक्सर आपने यूरिया और अन्य खाद के बारे में सुना और पढ़ा होगा। यहां तक कई- कई बार धरतीपुत्रों ने सड़क पर कभी धरने दिए कभी लाठियां खाई लेकिन उन्हे किसी ने यह नहीं बताया कि जिस गाय का हिंदू धर्म शास्त्रों में बखान किया गया है उसकों ही सड़क पर आवारा छोड़ दिया है।
लेकिन आज इसी गाय की उन लाभादायक चंद बातों को बताने की और समझाने की कोशिश करेंगे जिसे शायद पशुपालकों के साथ आमजन भूल गए है।

दरअसल वन इंडिया की टीम आज राजस्थान की एक गौशाला में पहुंची जहां एक हाईवे किनारे मृत पड़े गौवंशों को लेकर जानकारी जुटानी थी लेकिन जब टोंक जिले के निवाई में संचालित इस गौशाला के सेवादार अनिल भाई जो जानकारी दी वो वाकई हैरत करने वाली थी।
सेवादार अनिल भाई ने बताया कि राजस्थान में लाखों की तादाद में गौवंश है। टोंक जिले में भी करीब 1,71736 लाख गौवंश है। हर दिन सैकड़ों गौवंश अकाल मौत का शिकार होते है। साथ कई गौवंश बिमारियों के चलते मर जाते है।
लेकिन आमजन इन गौवंशों को सड़क किनारे फैंक देते है। लेकिन कोई भी इनके "समाधी खाद" को लेकर जागरूक नहीं है। यूपी के एक विशेषज्ञ पशु चिकित्सक का जिक्र करते हुए अनिल ने बताया कि अगर कोई भी गौवंश की मौत हो जाए तो उसे फैंकने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से उसकी अंतिम क्रिया करना चाहिए।
यूं तैयार होता है "समाधी खाद"
समाधी खाद विधि
पहले 6 इंच मोटी गोबर की परत बनानी चाहिए फिर उस पर मृत गाय क़ो रख कर उसके ऊपर 10 किलो पिसा हुआ नमक व 10 किलो पिसा हुआ चूना फैला देना चाहिए व फिर गाय के चारों तरफ 6 इंच मोटी गोबर की परत बना देनी चाहिए और उसके बाद मिट्टी डालकर समाधी जैसी बना देना चाहिए। फिर इसके बाद जो खाद बनेगा वो किसानों की फसल के लिए फायदेमंद होगा।
सेवादार अनिल ने बताया कि गाय जिसे हिंदु धर्म में मां का दर्जा दिया गया है। गाय की हम पूजा करते है, वो हमे दूध देती है, गोबर और मूत्र भी गंगाजल के समान माना जाता है।












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