एक वाट्सएप मैसेज ने हाथों-हाथ बदल दी इस गरीब बच्चे की जिंदगी, देखें वीडियो
Sirohi News , सिरोही। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार को संकट से उबारने के लिए दो बच्चे इस कड़ाके की सर्दी में भी जूते सिलने का काम करने को मजबूर है। पांच साल पहले पिता की मौत के बाद इन दोनों बच्चों पर पढ़ने-लिखने की उम्र में ही घर चलाने की जिम्मेदारी आ गई।
राजस्थान के सिरोही जिले के रामपुरा गांव निवासी 9 साल के राकेश पुत्र मदनलाल शहर के सरजावाव गेट पर रोजाना की तरह अपने पिता की जगह जूते सिलने का काम कर रहा था। छोटी सी उम्र में इस बच्चे को काम करते देखकर किसी ने जिला प्रमुख पायल परसरामपुरिया को वाट्सएप पर मदद के लिए मैसेज कर दिया।

तब जिला प्रमुख जिला परिषद से आबूरोड के लिए रवाना हो चुकी थी। बामनवाड़जी तक पहुंचने के बाद जब उन्होंने अपने मोबाइल में यह वाट्सएप मैसेज देखा तो वे वापस सिरोही के लिए रवाना हुई और सीधे बच्चे के पास पहुंची। जिला प्रमुख ने बच्चे को पढ़ाई के बारे में पूछा तो उसने बताया कि वो कक्षा चार में पढ़ाई कर रहा है। स्कूल से आने के बाद यहां जूते सिलाई का काम करता है। इसकी वजह पिता नहीं होने से घर की आर्थिक तंगी बताई। बच्चे ने बताया कि उसका बड़ा भाई हरीश (11) भी रोजाना जूते सिलाई के लिए आता है, लेकिन आज नहीं आया। जिस पर जिलाप्रमुख उसके घर पहुंची।

मजदूरी कर परिवार पालती है मां
सिरोही जिले के रामपुरा निवासी दारमी अपने पति मदनलाल के गुजर जाने के बाद यहां-वहां मजदूरी कर परिवार का पेट पाल रही है। दो बेटियों की शादी हो चुकी है और तीन बेटों हरीश (11), राकेश (9), प्रवीण (5) के पालन-पोषण का जिम्मा है। आर्थिक तंगी की वजह से हरीश ने छठी की पढ़ाई के बाद स्कूल छोड़ दिया। जबकि राकेश कक्षा चार और प्रवीण कक्षा दूसरी में पढ़ रहा है।

सिरोही में सरजावाव गेट पर हरीश और राकेश जूतों की सिलाई कर घर चलाने में मां की मदद कर रहे हैं। परिवार बीपीएल चयनित है। दारमी को सरकार से विधवा पेंशन मिल रही है। जिला प्रमुख ने दारमी से मिलकर घर के हालातों की जानकारी जुटाई और रामपुरा सरपंच मनीषा बंसल को मौके पर बुलाया।

पालनहार व श्रमिक कार्ड के जरिए मदद की पहल
जिला प्रमुख ने सरपंच मनीषा बंसल को दारमी के परिवार का नाम पालनहार योजना में जुड़वाने तथा उसको श्रम विभाग की योजना से जोड़ने के लिए श्रमिक कार्ड बनवाने को कहा। पालनहार योजना में दोनों बच्चों की पढ़ाई और घर चलाने के लिए सरकार से मदद मिलेगी। श्रमिक कार्ड योजना के तहत बच्चों को छात्रवृति मिलेगी। जिला प्रमुख ने पढ़ाई छोड़ चुके हरीश का दुबारा स्कूल में प्रवेश करवाने के लिए भी सरपंच को जिम्मेदारी सौंपीं। जिलाप्रमुख ने कहा कि वे दो दिन बार वापस इसका फॉलोअप लेंगी और जरूरत पड़ी तो खुद के स्तर पर भी आर्थिक सहयोग करेंगी।













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