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Success Story: पूरी तरह से ब्‍लाइंड Manu Garg को मां ने कैसे बनाया IAS? UPSC में हासिल की AIR-91

UPSC Success Story Manu Garg: जयपुर के 23 वर्षीय मनु गर्ग ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों और तकनीक का सही इस्तेमाल किया जाए, तो कोई भी कमी मंज़िल के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती। दृष्टिहीन होने के बावजूद मनु ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 91वीं रैंक हासिल कर पूरे देश को प्रेरणा दी है।

दरअसल, संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा 2024 का फाइनल रिजल्‍ट 22 अप्रैल 2025 को जारी किया है। अखिल भारतीय स्‍तर जिसमें उत्‍तर प्रदेश के प्रयागराज की शक्ति दुबे ने पहला, हरियाणा के हिसार की हर्षिता गोयल ने दूसरा और पुणे के अर्चित पराग ने तीसरा स्‍थान हासिल किया है। राजस्‍थान के भी कई उम्‍मीदवारों ने यूपीएससी में बाजी मारी है। उन्‍हीं में दिव्‍यांग मनु गर्ग भी शामिल हैं।

Manu Garg Visually Impaired

बिना ब्रेल के तकनीक के सहारे सफर

बता दें कि जयपुर के शास्त्री नगर निवासी मनु गर्ग को ब्रेल लिपि नहीं आती, लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। पढ़ाई के लिए उन्होंने टेक्नोलॉजी का सहारा लिया। खास सॉफ्टवेयर और ऐप्स की मदद से उन्होंने ऑडियो फॉर्मेट में किताबें सुनीं और हर विषय की गहराई से तैयारी की।

नौवीं में चली गई थी दृष्टि, मां बनीं सहारा

मीडिया से बातचीत में मनु ने बताया कि जब वह नौंवी कक्षा में थे, तब उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। उस मुश्किल घड़ी में उनकी मां ने न केवल उनका हौसला बढ़ाया, बल्कि उनका मार्गदर्शन भी किया। उन्होंने कहा, "मां मेरी आंखों की रोशनी बन गईं और मुझे अंधेरे से रोशनी की ओर ले गईं।"

दूसरे प्रयास में मिली कामयाबी

यह मनु का दूसरा प्रयास था। पहले प्रयास में असफलता मिली, लेकिन उससे वह टूटे नहीं। उन्होंने इसे सीखने का मौका माना और और ज़्यादा मेहनत की। मनु ने बताया कि पहली बार उन्होंने 'IAS' शब्द चार साल की उम्र में सुना था और तभी से यह सपना उनके दिल में बस गया था।

घंटों की नहीं, समझ की पढ़ाई

पढ़ाई के तरीके पर बात करते हुए मनु ने कहा, "मैं कभी यह नहीं सोचता कि कितने घंटे पढ़ रहा हूं। जब तक कोई टॉपिक पूरी तरह समझ में नहीं आ जाता, तब तक उठता नहीं। चाहे रात के दो बज जाएं।"

जेएनयू से कर रहे पीएचडी

मनु वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से पीएचडी कर रहे हैं। उनका मानना है कि IAS बनकर वे समाज की सेवा कर सकते हैं और साथ ही अपना व्यक्तिगत विकास भी कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें- 'पोतो बण्‍ग्‍यो कलक्‍टर, बहुत बढ़िया नौकरी मिली' UPSC में तन्‍मय की सफलता पर 80 वर्षीय दादी का इंटरव्‍यू

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