मौत के 16 साल बाद तोरण का 'पुनर्जन्म' : अब ट्रैक्टर की आवाज सुनते ही क्यों रोने लगता है 3 साल का मोहित?

झालावाड़, 12 फरवरी। राजस्थान में पुनर्जन्म की एक और कहानी सामने आई है। 3 साल के बच्चे को लेकर दावा किया जा रहा है कि उसका पुनर्जन्म हुआ है। 16 साल पहले उसकी मौत हो गई थी।

राजस्थान के खजूरी गांव में पुनर्जन्म

राजस्थान के खजूरी गांव में पुनर्जन्म

राजस्थान पुनर्जन्म की यह कहानी झालावाड़ जिले के मनोहर थाना इलाके के गांव खजूरी की है। यहां पर तीन वर्षीय मोहित खुद का पहले वाले जन्म का तोरण बताता है। दावा करता है कि उसकी मौत ट्रैक्टर के नीचे दबने से हुई है।

पिता के समझ नहीं आया ट्रैक्टर से क्यों डरता बेटा?

पिता के समझ नहीं आया ट्रैक्टर से क्यों डरता बेटा?

मोहित के पिता ओंकार लाल मेहर ने बताया कि मोहित जन्म से ही ट्रैक्टर की आवाज सुनकर रोने लग जाता था। छोटा था तब बोल नहीं पाता था। ऐसे में उसके ट्रैक्टर से डरने की वजह पता नहीं चल पाई।

 ट्रैक्टर के नीचे दबने से हुई मौत

ट्रैक्टर के नीचे दबने से हुई मौत

मोहित जब बोलने लगा तो खुद का नाम तोरण बताते हुए कहा कि 16 वर्ष पहले कोलू खेड़ी कला में रोड़ निर्माण कार्य में मजदूरी करने गए 25 वर्षीय तोरण पुत्र कल्याण सिंह धाकड़ निवासी खजूरी की ट्रैक्टर के नीचे दबने से मौत हो गई थी। उसी का मोहित के रूप में पुनर्जन्म हुआ है।

बुआ ने भी पहचाना भतीजा

बुआ ने भी पहचाना भतीजा

मोहित की ये बातें आस-पास के गांवों में फैल गई और खजूरी गांव तक पहुंची। तोरण की बुआ नथिया बाई धाकड़ खजूरी में ही रहती है। उसे जब इस बात का पता चला तो वह मोहित से मिलने आई और उसने उसे पहचान लिया कि यह उनका भतीजा तोरण है।

परिवार एमपी जाकर बस गया

परिवार एमपी जाकर बस गया

बता दें कि तोरण की मौत के बाद उसके माता-पिता मकान बेचकर मध्य प्रदेश के जामनेर थाना क्षेत्र के शंकरपुरा गांव में रहने लग गए थे। तोरण के माता पिता भी मोहित से मिलकर गए।

पिता बोले-तीन साल पहले किया तर्पण

पिता बोले-तीन साल पहले किया तर्पण

मीडिया से बातचीत में मृतक तोरण के पिता कल्याण सिंह धाकड़ ने बताया कि उनके बेटे तोरण की मौत के बाद अभी 3 वर्ष पहले ही गयाजी में उसका तर्पण किया था। अब मोहित के रूप में बेटे का पुनर्जन्म होने की बात जानकार उन्हें खुशी हुई।

बुआ बोली-मोहित है तोरण जैसा

बुआ बोली-मोहित है तोरण जैसा

बुआ नथिया बाई धाकड़ ने बताया कि वह खजुरी में ही रहती है। तोरण उससे बहुत लगाव रखता था। इस जन्म में 3 वर्ष की उम्र में भी जब भी उससे मिलने जाती है तो मोहित उनकी गोदी में आकर उसी तरह बैठता है जैसे बचपन में तोरण बैठा करता था।

किंजल के पुनर्जन्म की कहानी राजसमंद

किंजल के पुनर्जन्म की कहानी राजसमंद

राजस्थान में पुनर्जन्म की कई कहानी सामने आ चुकी हैं। मोहित से पहले इसी साल जनवरी में राजसमंद जिले के नाथद्वारा के पास गांव परावल में रतनसिंह चूंडावत की चार वर्षीय बेटी किंजल के पुनर्जन्म की कहानी सुर्खियों में रही। दावा किया जा रहा है कि रतनसिंह चूंडावत की बेटी किंजल के पुनर्जन्म की कहानी राजसमंद के पिपलांत्री गांव की ऊषा नाम की महिला से जुड़ी है। नौ साल पहले ऊषा की जलने से मौत हो गई थी।

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