Rajasthan News: अजमेर दरगाह के शिव मंदिर होने का बड़ा दावा,फिर उठी सर्वे की मांग
Rajasthan News: अजमेर की ख्वाजा गरीब नवाज की विश्व प्रसिद्ध दरगाह में एक बार फिर हिंदू मंदिर होने का दावा किया गया । अतिरिक्त जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंप एएसआई से सर्वे करवाने की मांग की है।
अजमेर में स्थित विश्व प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में बीते महीने जहां महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने दरगाह में हिंदू मंदिर होने का दावा किया था।

अब एक बार फिर से दावा किया जा रहा है कि दरगाह से पहले यहां भव्य शिव मंदिर था। और ढाई दिन का झौंपड़ा भी मां सरस्वती के मंदिर के नाम से जाना जाता था।
इस बार यह दावा वीर हिंदू आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सिमरन गुप्ता व संस्थापक प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज वर्मा के द्वारा किया जा रहा है । जिसको लेकर वह बुधवार को अजमेर जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे ।
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— PURSHOTTAM KUMAR (@pkjoshinews) February 21, 2024
जहां पर उन्होंने अतिरिक्त जिला कलेक्टर लोकेश कुमार गौतम को ज्ञापन सौंप कर अजमेर स्थित गरीब नवाज की दरगाह व तारागढ़ के किले का एएसआई सर्वेक्षण करने की मांग की।
ज्ञापन देने आए सिमरन गुप्ता ने बताया कि ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह परिसर में तारागढ़ के किले का एएसआई सर्वेक्षण होना चाहिए क्योंकि वहां महादेव शिव का मंदिर है, जिसे आज जन्नती दरवाजे के नाम से जाना जाता है ।
तो वही ढाई दिन का झोपड़ा एक सरस्वती माता का मंदिर था। उन्होंने पत्र में लिखा कि अजमेर में चिश्ती की दरगाह का पूरा परिसर मुस्लिम आक्रमण कारियो द्वारा ध्वस्त किए गए हिंदू और जैन मंदिरों की मंदिर सामग्री का उपयोग करके बनाया गया है।
ऐसे साक्ष्य है कि मकबरे की वर्तमान संरचना एक नष्ट हुए प्राचीन महादेव मंदिर के ऊपर बनाई गई है। प्राथमिक साक्ष्यों में से एक वर्तमान में मकबरे में सबसे पुरानी संरचना है संदल खाना जहां ख्वाजा की कब्र के लिए प्रतिदिन संदल तैयार किया जाता है।
जिसमें एक द्वार है जो एक भूमिगत मार्ग से तहखाना तक जाता है। जहां ख्वाजा के शारीरिक अवशेष दफन है यहीं पर मूल महादेव देवता स्थापित है।
उन्होंने अपने पत्र में कहा कि एक समर्पित कार्यवाहक ब्राह्मण परिवार द्वारा महादेव को प्रतिदिन इसी स्थान पर चंदन अर्पित किया जाता था, उक्त परिवार के वंशज द्वारा अभी भी दरगाह की देखभाल की जाती है।
और उन्हें घड़ियाली (घंटी बजाने वाला) कहा जाता है जो दर्शाता है कि उस स्थान पर एक बड़ी मंदिर की घंटी भी थी।
इस्लामी आक्रमणकारियों से सदियों पहले अजमेर मंदिरों देवता और जलाशयों के शहर के रूप में प्रदर्शित था, इसी तरह का अपमान और दुरुपयोग अढ़ाई दिन का झोपड़ा मस्जिद में दिखाई देता है जो सीधे एक बड़े हिंदू संस्कृत व महाविद्यालय और भगवान विष्णु के मंदिर के शीश पर बनाया गया था।
सूफी संत चिश्ती हिंदू पर युद्ध छेड़ने के लिए गौरी की सेना के साथ भारत आए थे, उन्होंने कई हिंदू मंदिरों को नष्ट किया । पृथ्वीराज चौहान के पकड़े जाने का जश्न मनाया गया, तलवार के बल पर हजारों लोगों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया और गौ मांस कबाब खाने और हिंदुओं का अपमान करने के लिए अजमेर में प्रतिदिन गाय की हत्या की गई।
उन्होंने कहा कि तारागढ़ का किला प्राचीन किला है, जिसमें एक प्राचीन शिव मंदिर भी था जिससे मुस्लिम आक्रमणकारियों ने धवस्त कर मस्जिद बना दी थी।
पूरे तारागढ़ के किले पर मुसलमान अवैध रूप से कब्जा कर रहे हैं जो तारागढ़ एक प्राचीन धरोहर है । उपरोक्त प्राचीन किले से सभी अवैध कब्जा को हटाया जाए वह किले का सौंदर्यकरण कराया जाए।
उन्होंने कहा की दरगाह के आसपास रहने वाले कुछ सामाजिक तत्व व भूमाफियाओं ने वन विभाग की सरकारी जमीन पर कब्जा किया हुआ है जिसे जल्द से ज्यादा मुक्त कराया जाए ।












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