दौसा की हार का बदला लेने के मूड में किरोड़ी लाल मीणा, कहा-लड़ाई सीधा लडूंगा, पीठ में छुरा घोंपने वाला नहीं'
Rajasthan News: राजस्थान के कृषि एवं आपदा मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने हाल के विवादित बयानों और साहसिक कदमों से राज्य की राजनीति में उथल-पुथल मचा दी है। अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर आलोचना और 2021 एसआई भर्ती परीक्षा को रद्द करने की उनकी मांग ने सत्तारूढ़ दल में गहमागहमी बढ़ा दी है।
आधी रात को पुलिस से टकराव
घटनाक्रम तब और नाटकीय हो गया जब किरोड़ी लाल मीणा ने पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रों के घरों पर दबिश देने की शिकायत पर आधी रात को हस्तक्षेप किया। मीणा ने छात्रों के मुद्दों का समर्थन करते हुए पुलिस को जमकर फटकार लगाई। यह कदम उनकी जनता के प्रति प्रतिबद्धता और अन्याय के खिलाफ लड़ने के उनके इरादे को दर्शाता है।

मैं सीधे लड़ाई लड़ता हूँ, मीणा का स्पष्ट संदेश
पत्रकारों से बातचीत में किरोड़ी लाल मीणा ने अपने संघर्षों के प्रति नजरिए को लेकर साफ शब्दों में कहा कि अगर मैं लड़ाई लड़ता हूं तो मैं सीधे लड़ूंगा। मैं छुरा नहीं घोंपता। यह बयान उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए उनकी ईमानदारी को रेखांकित करता है।
राइजिंग राजस्थान बाधित करने के आरोपों पर उखड़े
राज्य सरकार की इंटेलिजेंस ने किरोड़ी लाल मीणा पर राइजिंग राजस्थान सम्मेलन को विफल करने की साजिश रचने का आरोप लगाया था। मीणा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अपमानजनक करार दिया। उन्होंने कहा कि क्या एक मंत्री के रूप में मेरा ऐसा करना उचित होगा। मैं ऐसा घटिया काम कभी नहीं कर सकता। किरोड़ी लाल मीणा का आरोप है कि इंटेलिजेंस ने सरकार को गलत रिपोर्ट दी है।
मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने अपनी पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा और सीएम भजन लाल शर्मा के साथ अपने संबंधों का हवाला देते हुए साफ किया कि वे अपनी पार्टी के खिलाफ किसी साजिश में शामिल नहीं हो सकते।
छात्रों और दौसा उपचुनाव के मुद्दे पर सरकार को घेरा
किरोड़ी लाल मीणा ने न केवल छात्रों के अधिकारों की पुरजोर वकालत की। बल्कि दौसा उपचुनाव से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री को सीधे संबोधित करते हुए अपनी शिकायतें दर्ज कराई। जो सत्तारूढ़ दल के भीतर चल रहे मतभेदों को उजागर करता है।
किरोड़ी लाल मीणा की राजनीति, साहस का परिचायक
राजनीतिक दबाव और आरोपों के बावजूद किरोड़ी लाल मीणा ने अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए यह साबित किया है कि वे अन्याय के खिलाफ किसी भी हद तक जा सकते हैं। चाहे वह छात्रों के अधिकारों की रक्षा हो। पुलिस के आचरण को चुनौती देना हो या सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना। मीणा का उग्र रुख उन्हें राजस्थान की राजनीति में एक मजबूत और साहसी नेता के रूप में स्थापित करता है।












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