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Khatushyam : राजस्थान के सीकर में खाटूश्यामजी मंदिर में मची भगदड़, 3 महिला श्रद्धालुओं की मौत, देखें VIDEO

सीकर, 08 अगस्त। राजस्थान के सीकर स्थित खाटू श्याम मंदिर में भगदड़ की खबर सामने आई है। इस हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। खाटू श्याम मंदिर में हर महीने एक मेला लगता है, इसी दौरान आज सुबह यहां पर भगदड़ मच गई, जिसमे 3 लोगों की मौत हो गई। भगदड़ में घायल दो लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। मौके पर पुलिस पहुंच गई है और राहत-बचाव का कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर दुख जाहिर किया है। पीएम ने कहा पीड़ित परिवारों के प्रति मैं संवेदना जाहिर करता हूं और घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं। वहीं इस हादसे पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दुख जाहिर किया है। उन्होंने कहा हादसे में तीन महिलाओं की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है, मैं परिवार के प्रति संवेदना जाहिर करता हूं। मैं घायल श्रद्धालुओं के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं।

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    Rajasthan के Khatu Shyam मेले में मची भगदड़, 3 महिला भक्तों की मौत, कई घायल | वनइंडिया हिंदी | *News
    राहत-बचाव कार्य जारी

    राहत-बचाव कार्य जारी

    बता दें कि राजस्थान के प्रसिद्ध खाटूश्यामजी में लगने वाले मासिक मेले के दौरान अचानक से भगदड़ मच गई। सुबह 5 बजे जब मंदिर का प्रवेश द्वार खुला तो यहां लोगों की भारी भीड़ थी, जो बेकाबू हो गई और लोग आपस में धक्का-मुक्की करने लगे। इस दौरान मची भगदड़ में तीन महिला श्रद्धालुओं की मौत हौ गई। मृत महिलाओं में से अभी तक सिर्फ एक ही महिला की पहचान हो सकी है। घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पुलिस प्रशासन की टीम पहुंची और राहत-बचाव का कार्य शुरू किया।

    काफी प्रसिद्ध मंदिर

    काफी प्रसिद्ध मंदिर

    गौर करने वाली बात है कि सीकर में खाटू श्यामजी मंदिर देश के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है। यह भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर है, जिन्हें कलियुग का भगवान माना जाता है। यह मंदिर खाटू गांव में स्थित है, ऐसी मान्यता है कि श्याम बाबा के दरबार में लोग जो भी कामना करते हैं वह पूरी होती है। यही वजह है कि यहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि खाटू श्याम की शक्तियों से ही खुश होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कलियुग में भी पूजे जाने का वरदान दिया था।

    क्या है मान्यता

    क्या है मान्यता

    दरअसल जब पांडव वनवास पर निकले थे तो अपनी जान बचाने के लिए भटक रहे थे। इसी दौरान इनका सामना हिडिम्बा से हुआ। हिडिम्बा ने एक पुत्र को जन्म दिया, जो भीम जैसी कद-काठी का था, उसका नाम घटोखा था। घटोखा का पुत्र बर्बरीक था। दोनों को वीरता के लिए जाना जाता था। जब कौरव व पांडवों के बीच युद्ध हुआ तो बर्बरीक भी युद्ध देखने के लिए पहुंचा। बर्बरीक से जब पूछा गया कि वह किसकी ओर है तो उसने कहा जो हारेगा वह उसक ओर से युद्ध करेगा। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण को इस बात का डर था कि कहीं यह पांडवों के विपरीत ना चला जाए, इसीलिए उन्होंने बर्बरीक से दान में शीश मांग लिया। हालांकि बर्बरीक ने अपना शीश दे दिया लेकिन उन्होंने अपनी आंखों से युद्ध को देखते की इच्छा जाहिर की।

    पौराणिक कथा

    पौराणिक कथा

    भगवान श्रीकृष्ण ने इस मांग को स्वीकार कर लिया और बर्बरीक के शीश को पहाड़ी पर रख दिया गया। बर्बरीक का कहना था कि श्रीकृष्ण की वजह से पांडवों को जीत हासिल हुई। इसी के बाद श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को वरदान दिया था कि कलियुग में श्याम के नाम से पूजे जाएंगे। मान्यता है कि खाटू गांव में ही बर्बरीक का सिर मिला था। मान्यता है कि यहां एक गाय के स्तन से दूध की धारा बहने लगी, जिसके बाद नीचे खोदा गया तो बर्बरीक का शीश मिला और इसी जगह पर खाटू श्यामजी मंदिर का निर्माण कराया गया।

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