Sanjay Thori Success Story: वो फौजी जो रिटायमेंट के बाद छह बार लगा सरकारी नौकरी
संजय थोरी राजस्थान के झुंझुनूं जिले के गांव बाकरा के रहने वाले हैं। ये सबीएसई बाबू, सीएचएसएल, पटवारी, सीडब्ल्यूसी तकनीक अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी व टीचर की नौकरी पा चुके हैं।
पहले देशसेवा की। बॉर्डर पर देश के दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब दिया। फिर 14 साल बाद किताबों से दोस्ती की। खूब मेहनत की। नतीजा एक नहीं बल्कि छह प्रतियोगी परीक्षाएं क्रैक कर डाली।
हर किसी को प्रेरित करने वाली यह सक्सेस स्टोरी संजय थोरी की। ताजा कामयाबी इनको सेकंड ग्रेड टीचर भर्ती में मिली है। फर्स्ट ग्रेड टीचर भर्ती का रिजल्ट भी आने वाला है। उसमें भी संजय थोरी अपना चयन लगभग तय मान रहे हैं।

वन इंडिया हिंदी से बातचीत में संजय थोरी ने बताया कि सेकंड ईयर की पढ़ाई के दौरान अप्रैल 2002 में भारतीय सेना में भर्ती हुआ था। पहली पोस्टिंग जम्मू कश्मीर में हुई। 31 जुलाई 2018 में भारतीय सेना में नायक पद से वीआरएस लिया।
बचपना का सपना आरएएस बनना
संजय थोरी कहते हैं कि मेरा सपना राजस्थान प्रशासनिक सेवा में जाने का था, मगर भारतीय सेना में चयन हुआ तो यह ज्वाइन कर ली। वीआरएस लेकर फिर से आरएएस बनने की तैयारी शुरू कर दी। आरएएस प्री भी दी। पास हुआ।

इन छह परीक्षाओं में हुआ चयन
आरएएस की तैयारी के चलते अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी भाग्य आजमाया। छह परीक्षा सीबीएसई क्लर्क, सीएचएसएल, पटवारी, सीडब्ल्यूसी, तकनीक अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी व शिक्षक भर्ती में सफलता हासिल की।
बिशनपुरा में ग्राम सेवक हैं संजय थोरी
संजय थोरी वर्तमान में झुंझुनूं जिले के गांव बिशनपुरा में ग्राम विकास अधिकारी पद पर कार्यरत हैं। इनकी शादी बुगाला निवासी उमराव से शादी हुई। इनके एक बेटा है। पिता फूलचंद दूरसंचार विभाग में रहे। मां सुमित्रा खाजपुर में एएनएम रहीं। बड़े भाई सुभाष थोरी बीडीके अस्पताल झुंझुनूं में नर्सिंग ऑफिसर हैं।

बीएडी की डिग्री भी ली
संजय थोरी ने रिटायरमेंट के बाद न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की बल्कि अपनी शिक्षा भी बढ़ाई। साल 2019 में कलेक्टर की क्लास ज्वाइन की। 2020 में बीएड और 2022 में ज्योग्राफी में एमएससी की। नेट भी क्लियर किया।













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