नेमाराम चौधरी : बेंगलुरु से बिजनेस छोड़ राजस्थान में शुरू की लाल चंदन की खेती

बाड़मेर। कहते हैं पानी की कमी से जूझ रहे राजस्थान में खेती के भरोसे अच्छी कमाई नहीं की जा सकती है, मगर लीक से हटकर खेती की जाए तो रेगिस्तान के धोरों में भी खेती से छप्परफाड़ कमाई हो सकती है। कुछ ऐसा ही कमाल राजस्थान के सबसे कम वर्षा वाले इलाके बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र के गांव करमावास के किसान नेमाराम चौधरी ने कर दिखाया है।

Sandalwood farming by Nemaram Choudhary in samdari barmer

व्यापारी से किसान बने नेमाराम चौधरी

मीडिया से बातचीत में नेमाराम चौधरी ने बताया वर्तमान में कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में व्यवसायरत हैं, लेकिन अब वह बागवानी खेती में रुचि ले रहे हैं। सालभर पहले विचार आया कि व्यवसाय की बजाय खेती में भाग्य आजमाया जाए।

बामसीन में 20 बीघा भूमि खरीदी

ऐसे में बाड़मेर करमावास सरहद में बामसीन मार्ग पर 20 बीघा भूमि खरीदी और यहां बरसाती पानी एकत्रित करने के लिए बड़ा भूमिगत जलकुण्ड तैयार किया। बून्द-बून्द सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा का प्लांट लगवाकर 20 बीघा भूमि में औषधीय पौधे लगाए।

ये पौधे लगा रहे
नेमाराम चौधरी ने बताया इस भूमि पर सात माह पूर्व करीब 22 सौ पौधे लगवाए। जामफल व लाल चंदन के 500-500 पौधे, चीकू के 350, एक सौ इजरायली खजूर के, 150 नींबू, 50 पौधे थाई एपल बोर सहित आम, अंजीर, नारियल, जामुन, लाल मेहंदी आदि के भी पांच सौ पौधे लगवाकर तैयार किए।

जामफल, अंजीर व बेर लगने शुरू
बामसीन मार्ग पर नेमाराम चौधरी की मेहनत रंग लाने लगी है। यहां पर जामफल के साथ अंजीर व बेर आने शुरू हो गए हैं। नेमाराम बताते हैं कि फिलहाल खेती का खर्च निकल पा रहा है, मगर इसी दिशा में प्रयास करते रहने पर जल्द ही छप्परफाड़ कमाई की भी उम्मीद है।

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