8वीं तक पढ़ी रूमा देवी ने बदल दी 75 गांवों की 22 हजार महिलाओं की जिंदगी, जानिए कैसे?

बाड़मेर। विश्व महिला दिवस 2019 को राष्ट्रपति के हाथों नारी शक्ति अवार्ड पाने वाली राजस्थान के बाड़मेर की रूमा देवी को एक और कामयाबी मिली है। अब रूमा देवी को डिजायनर ऑफ द ईयर 2019 का अवार्ड से नवाजा गया है। आइए जानते हैं थार की उस नारी शक्ति के बारे में जिसने बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर के 75 गांवों की 22 हजार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ राजस्थान के हस्तशिल्प उत्पादों को इंटरनेशनल स्तर पर पहुंचा दिया।

रूमा देवी की जीवनी

रूमा देवी की जीवनी

रूमा देवी मूलरूप से बाड़मेर जिले के मंगला की बेड़ी गांव की रहने वाली हैं। पांच साल की उम्र में इनकी मां का निधन हो जाने के बाद पिता ने दूसरी शादी कर ली और इन्हें चाचा के पास छोड़ दिया। बिन मां की यह अभावों में पली-बढ़ी। वो वक्त भी देखा जब 10 किलोमीटर दूर से पानी भरकर बैलगाड़ी में घर लाती थी। 17 साल की उम्र में शादी हो जाने के कारण पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी।

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कुशन और बैग बनाने से शुरुआत

कुशन और बैग बनाने से शुरुआत

मीडिया से बातचीत रूमा देवी ने बताया ​था कि छोटी उम्र में शादी हो जाने के बाद ससुराल में भी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। तब रूमा ने तय किया कि क्यों आत्मनिर्भर बना जाए। खुद काम करके कुछ कमाया जाए। इसी सोच के चलते वर्ष 2006 में गांव की 10 महिलाओं के साथ जुड़कर स्वयं सहायता समूह बनाया। समूह ने कपड़ा, धागा और प्लास्टिक के पैक्ट्स खरीदकर कुशन और बैग बनाने शुरू किए। शुरुआत में दिक्कत आई, मगर फिर समूह के कुशन और बैग को ग्राहक मिलने शुरू हो गए।

ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान से जुड़ीं

ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान से जुड़ीं

रूमा के स्वयं सहायता समूह का व्यवसाय चलने लगा तो उसने अपनी जैसी ही अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने की ठानी और फिर दूसरे गांवों में भी काम शुरू किया। समूह के काम बाड़मेर की ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान ने सराहा वर्ष 2008 रूमा को संस्थान में सदस्य बनाया। फिर दो साल तक रूमा इस संस्थान की अध्यक्ष भी रहीं। अन्य महिलाओं के जुड़ने के बाद यह समूह प्रतिमाह 3000 से 10000 रुपए कमा लेता था।

विदेशों में भी लगा चुकी हैं प्रदर्शनी

विदेशों में भी लगा चुकी हैं प्रदर्शनी

ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान से जुड़ने के बाद रूमा और उसके समूह की तकदीर बदल गई। समूह की महिलाओं को बाड़मेर के हस्तशिल्प का प्रशिक्षण देने के साथ-साथ उसकी मार्केटिंग के गुर भी सिखाए गए। नतीजा यह रहा कि बाड़मेर के पड़ोसी जिले जैसलमेर, जोधपुर व बीकानेर आने वाले सात समंदर पार के विदेशी सैलानियों को समूह के उत्पाद खास पसंद आने लगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहचान मिली। तभी तो लंदन, कोलंबो, जर्मनी व सिंगापुर के फैशन वीक्स में भी उनके उत्पादों का प्रदर्शन हो चुका है।

कई डिजाइनर्स को पीछे छोड़ जीता अवार्ड

कई डिजाइनर्स को पीछे छोड़ जीता अवार्ड

दिल्ली के प्रगति मैदान में टैक्सटाइल फेयर्स इंडिया (टीएफआई) द्वारा फैशन शो प्रतियोगिता हुई, जिसमें देशभर के नामी डिजाइनर्स के साथ-साथ रूमा देवी ने भी अपने समूह के कलेक्शन रैंप पर उतारे। ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान के सचिव विक्रम सिंह ने बताया कि प्रतियोगिताका पहला राउंड रूमा देवी ने मई 2019 में ही क्लियर कर लिया था, जिसमें पूरे भारत से 14 प्रतिभावान यंग डिजाइनर्स को दूसरे राउंड के लिए चयनित किया गया। 16 जुलाई 2019 को प्रतियोगिता के फाइनल राउंड में रूमा देवी का ब्लैक एंड वाइट कलेक्शन प्रथम स्थान पर रहा।

फ्रांस जाकर तलाशेंगी संभवनाएं

फ्रांस जाकर तलाशेंगी संभवनाएं

टीएफआई की ओर से आयोजित फैशन शो प्रतियोगिता जीतने के साथ ही रूमा देवी को पेरिस का टूर पैकेज भी मिला है। अब वे रूमा और उसका समूह फ्रांस जाकर वहां बाड़मेर के हस्तशिल्प के लिए नवीन संभावनाओं की तलाश करेंगी। इस शो में फैशन गुरु एवं डायरेक्टर प्रसाद बिड़प्पा, सुपर वुमन मॉडल नयनिका चटर्जी, वरिष्ठ डिजायनर अब्राहम एंड ठाकुर, पायल जैन, टी.एम. कृष्णामूर्ति एवं भारत की टैक्सटाइल इंडस्ट्री के 240 समूहों के प्रतिनिधि व 40 देशों के व्यापर प्रतिनिधियों सहित फैशन जगत की विभिन्न लोग उपस्थित रहे।

यहां देखें रूमा देवी की जिंदगी पर बनी डॉक्यूमेंट्री

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