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समंदर नहीं राजस्थान का रेगिस्तान है ये, बाड़मेर के रेडाणा गांव में गोवा बीच जैसा नजारा, देखें LIVE

बाड़मेर। यह अद्भुत है...। अकल्पनीय है...। अविश्वसनीय है...क्योंकि जो रेगिस्तान बूंद-बूंद पानी को तरसता है। वहां अथाह जलराशि एकत्रित हो। नजारा ऐसा कि मानो गोवा का समुद्र बीच हो। यही वजह है कि आस-पास के सैकड़ों लोग रोजाना यहां खींचे चले आ रहे हैं। पिकनिक मनाने। परिवार समेत घूमने। यह जगह है राजस्थान के बाड़मेर जिले का गांव रेडाणा।

बाड़मेर से 50 किमी दूर है गांव रेडाणा

बाड़मेर से 50 किमी दूर है गांव रेडाणा

दरअसल, रेडाणा गांव बाड़मेर जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर और भारत-पाकिस्तान की सरहद से 60 किलोमीटर दूर है। गाडरा रोड पंचायत समिति का यह गांव भी सरहदी जिलों के अन्य गांवों की तरह ही है। यहां भी दूर-दूर तक सिर्फ रेत का समंदर है। बेहद कम बारिश वाला इलाका है। तापमान में यहां 50 डिग्री तक पहुंच जाता है।

 रेडाणा की मिट्टी में है दम

रेडाणा की मिट्टी में है दम

बता दें कि गांव रेडाना की मिट्टी की विशेषता और यहां की भौगोलिक ​परिस्थिति इसे गोवा जैसा बना रही है। रेडाणा गांव पहाड़ों से घिरा हुआ है। यूं तो पहाड़ी इलाके में राजस्थान के अनेक गांव है, लेकिन रेडाणा की मिट्टी की खासियत यह है कि इसमें करीब 2 फीट नीचे ग्रेवल (एक तरह चिकनी मिट्टी) हैं, जो पानी को रेगिस्तान की अन्य मिट्टी की तुलना में कम सोखती है। इसलिए यहां पर पानी एकत्रित हो जाता है।

 छ​ह माह भरा रहता है पानी

छ​ह माह भरा रहता है पानी

रेडाणा में यह बरसाती पानी करीब छह माह तक भरा रहता है। यूं तो राजस्थान के अनेक गांव-कस्बों में बरपानी पानी छह माह की बजाय सालभर तक भरा मिल जाएगा, मगर उन गांव-कस्बों में वह पानी जोहड़, तालाब, नदी या किसी झील के रूप में मिलेगा जबकि रेडाणा की भूमि समतल है। ऐसे में यहां भरा पानी किसी समुद्र की तरह दिखता है।

दस किलोमीटर क्षेत्र में भरा पानी

रेडाणा सरहदी जिले बाड़मेर में होने के कारण यहां पर आबादी अन्य गांवों की तुलना कम है। जिस जगह पानी यह भरता है वहां 10 से 15 किलोमीटर का दायरा खाली पड़ा है। ऐसे में रेगिस्तान में यह किसी गोवा के समुद्र जैसा दिखता है। आबादी की पहुंच कम होने के कारण पानी साफ व स्वच्छ है। अन्य गांव-कस्बों में जमा बरसाती पानी की तरह यह मटमैला नहीं दिखाई देता है।

 नरपत सिंह राठौड़ के प्रयास लाए रंग

नरपत सिंह राठौड़ के प्रयास लाए रंग

रेडाणा के पहाड़ों से बहकर आया यह पानी वर्षों से इसी तरह जमा होता आया है। छह माह तक एकत्रित रहता है। फिर सूख् जाता है और बारिश आने पर फिर भर जाता है। अब तक रेडाणा का यह खूबसूरत नजारा ज्यादा लोगों की नजर में नहीं था। इसका श्रेय जाता है बाड़मेर के नरपत सिंह राठौड़ को। पिछले साल नरपत सिंह राठौड़ ने रेडाणा रण के नाम से आयोजन करवाया और रेडाणा से बाहर के लोगों को इस पिकनिक डेस्टिनेशनसे वाकिफ करवाया।

 क्यों जाओ गोवा, रेडाणा आओ?

क्यों जाओ गोवा, रेडाणा आओ?

वन इंडिया हिंदी से बातचीत में नरपत सिंह रेडाना बताते हैं कि जब रेडाणा की इस अकल्पनीय विशेषता का पता चला तो मैंने ठाना कि अधिक से अधिक लोगों को इसके बारे में बताया जाना चाहिए। मैंने रेडाणा रण के नाम से आयोजन करवाया और लोगों को बताया कि समुद्र किनारे सैर सपाटा करने के लिए गुजरात या गोवा जाने की बजाय आप बाड़मेर के रेडाणा भी आ सकते हैं। अब यह मुहिम रंग लाती दिख रही है।

 प्रशासन को इस दिशा में उठाने चाहिए कदम

प्रशासन को इस दिशा में उठाने चाहिए कदम

रेडाणा इन दिनों किसी ​फेमस पर्यटन स्थल सा बना हुआ है। यहां रोजाना हजारों लोग पिकनिक मनाने आ रहे हैं। ऐसे में रेडाणा के इस समुद्र किनारे में पार्किंग की व्यवस्था को रविन्द्र सिंह संभाल रहे हैं। रविंद्र सिंह बताते हैं कि मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि हमारे बाड़मेर के रेगिस्तान में गोवा जैसा नजारा देखने को मिल सकता है। अब यह सब रेडाणा में हो रहा है तो प्रशासन को भी इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।

पर्यटन के रूप में करवाएंगे विकसित-बाड़मेर कलेक्टर मीणा

पर्यटन के रूप में करवाएंगे विकसित-बाड़मेर कलेक्टर मीणा

बाड़मेर के जिला कलेक्टर विश्राम मीणा ने वन इंडिया हिंदी को बताया कि यह सुखद है कि रेगिस्तान में इस तरह की एक प्राकृतिक नायाब कृति है। रेडाणा के प्रति लोगों का आकर्षण दिनों दिन बढ़ रहा है। मैं खुद भी इस इलाके का दौरा करूंगा और राज्य सरकार को इसकी रिपोर्ट भेजकर पर्यटन के क्षेत्र में इसको बढ़ावा मिले यह सुनिश्चित करवाने को लेकर कोशिश करूंगा। हम जैसलमेर के पर्यटकों को बाड़मेर में लाने के लिए एक प्लान तैयार कर रहे हैं।

 कैसे पहुंचे रेडाणा ?

कैसे पहुंचे रेडाणा ?

निकटवर्ती रेलवे स्टेशन- बाड़मेर जिले का रामसर रेलवे स्टेशन, 15 किलोमीटर दूर

निकटवर्ती बस स्टैण्ड -हाथमा बस स्टैंड

निकटवर्ती एयरपोर्ट -जैसलमेर एयरपोर्ट, 150 किलोमीटर दूर

रेडाणा जाने के लिए रेल व बस से जोधपुर या बाड़मेर पहुंचा जा सकता है। इसके बाद हाथमा और सीयाणी होते हुए रेडाणा।

सेल्फी लेते आ रहे नजर

सेल्फी लेते आ रहे नजर

रेडाणा के इस समुद्र को देखने के लिए आस-पास के गांव कस्बों से नहीं बल्कि बाड़मेर जिले के बाहर से भी कई परिवार यहां आ रहे हैं। महिलाएं, युवतियां और बच्चों समेत बड़ी संख्या में लोग यहां गोवा बीच जैसा लुत्फ उठाते नजर आते हैं। हर कोई सेल्फी लेता भी दिखाई देता है।

कैमल सफारी का भी आनंद

कैमल सफारी का भी आनंद

बाड़मेर जिले के रेडाणा की धरती इस अजीब विशेषता से यहां समुद्रीय तटीय इलाके जैसा अहसास हो रहा है।​ जिसे अनुभव करने के लिए दूर दराज से बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं। खास बात यह है कि बड़ी संख्या में पर्यटकों की आवक होने से स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। रेडाणा के पानी के किनारे कैमल सफारी इसका उदाहरण है।

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