Rakesh Purohit : राजस्थान के वो RAS अफसर जो बन गए गौभक्त, जुटाए 19 करोड़ रुपए
Rakesh Purohit : राजस्थान के वो RAS अफसर जो बन गए गौभक्त, जुटाए 19 करोड़ रुपए
चित्तौड़गढ़, 8 जुलाई। ये हैं राकेश पुरोहित। राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) के अधिकारी हैं। इनकी गौभक्त के रूप में भी पहचान है। इसकी एक बानगी इनके कार्यालय और सरकारी आवास में देखने को मिलती है। दूसरा ये कि गोसेवा के लिए 19 करोड़ रुपए जुटाकर गौशालाओं को दे चुके हैं।

राकेश पुरोहित एसीईओ जिला परिषद चित्तौड़गढ़
दरअसल, राकेश पुरोहित वर्तमान में राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिला परिषद में एसीईओ पद पर कार्यरत हैं। मूलरूप से सिरोही जिले के पिंडवाड़ा तहसील के गांव आदर्श के रहने वाले हैं। साल 2011 बैच के आरएएस अफसर हैं। ये गौभक्त के रूप में पांच राज्यों में 152 जगहों पर निशुल्क गौ-कथाएं कर चुके हैं। गौकथा से 19 करोड़ रुपए जुटाए, जो प्रदेश की 56 गौशालाओं को भेंट कर दिए।

साल 2011 में आरएएस अफसर बन गए
बता दें कि 23 जून 1980 को जन्मे राकेश पुरोहित ने शुरुआती शिक्षा अपने गांव से पूरी की। 11वीं व 12वीं की पढ़ाई सरुपगंज कस्बे से की। जयपुर और दिल्ली में भी पढ़े। साल 2008 में ये सरकारी शिक्षक बने। 42 महीने तक पढ़ाया। इसी दौरान आरपीएससी की तैयारी भी जारी रखी। राकेश पुरोहित अपने पहले ही प्रयास में साल 2011 में आरएएस अफसर बन गए। पहली पोस्टिंग जालोर जिले के जसवंतपुरा में बतौर बीडीओ के रूप में हुई। तब नंदगांव गौशाला जाना हुआ फिर क्या था राकेश पुरोहित को ऐसी गौ-भक्ति चढ़ी की वो वहीं के होकर रह गए।

करीब चार साल नंदगांव गौशाला में बिताया
उसके बाद जब वो अपने कार्यभूमि जसवंतपुरा वापस आए तो उनके मन में विचार आया कि अब उन्हें नंदगांव में ही रुकना है और रोजाना वहीं से ही जसवंतपुरा जो कि उनका कार्यस्थल था वहां आना है। उसके बाद राकेश पुरोहित अपने सारा सामान लेकर नंदगांव गौशाला चले गए और रोजाना वहीं से ही जसवंतपुरा आया करते। इस दौरान राकेश पुरोहित ने करीब चार साल नंदगांव गौशाला में बिताया। नंदगांव गौशाला में रहने के दौरान आरएएस अफसर राकेश पुरोहित गौ-सेवा में लीन हो गए। रोजाना सुबह दो घण्टे तक गायों का गोबर उठाते थे। परिक्रमा करते और शाम को ग्वालों को संकीर्तन करवाते थे।

भीनमाल बीडीओ के पद पर रहे
इसके बाद भीनमाल बीडीओ के पद पर रहे। तब एक दिन वो गार्डन में वॉक कर रहे थे इस दौरान उनके मन में विचार आया कि दिनभर तो काम में निकल जाता है, लेकिन रोजाना सिर्फ सोकर 12 घण्टे निकालने से अच्छा है कि इन रातों का भी सदुपयोग किया जाए। ऐसे में उन्होंने अपनी पहली गौ-कथा 2017 में भीनमाल के पास के गांव भादड़ा में की।

श्रावक ने घोषणा की अगली कथा मेरे गांव में
उनके मन में दूसरी कथा का कोई विचार भी नहीं था, लेकिन जब पहली कथा चल रही थी उसी दौरान कथा में मौजूद एक श्रावक ने घोषणा की अगली कथा मेरे गांव में की जाए। उसके बाद तो कथाओं का दौर लगातार जारी रहा।
राकेश पुरोहित बताते हैं कि उस समय गांवो में गायों के प्रति इतनी चेतना नहीं थी ऐसे में गांवों में चेतना जगाने के लिए विशेष रूप से गांवों में गौ-कथाएं की गई। शुरुआत में करीब 50 से ज्यादा कथाएं तो ट्रैक्टर-ट्रॉली को स्टेज में रूप में इस्तेमाल कर की गई। जिस गांव में कथा करने जाते थे वहां का जल तक ग्रहण नहीं करते थे। गौ-कथाएं पूर्ण रूप से निशुल्क किया करते थे।

सरकारी कार्यालय में गौमाता की तस्वीर जरूर लगाते हैं
चित्तौड़गढ़ जिला परिषद एसीईओ राकेश पुरोहित जहां भी पोस्टेड होते हैं वहां सरकारी कार्यालय में गौमाता की तस्वीर जरूर लगाते हैं। सरकारी आवास के एक कक्ष को गोबर से लिपवा देते हैं। ये कहते हैं कि गौ मूत्र, गोबर, गंगाजल और कपूर का मिश्रण कर दीवारों को लीपा जाता है ताकि किसी भी प्रकार की कोई भी नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं हो सके। इसी गोबर से लीपे कक्ष में ही राकेश पुरोहित जप-तप पूजा पाठ किया करते हैं।












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