Rajasthan Letest News: राजशाही परिवार कैसे मनाते थे गुलाल गोटा से होली...जानिए आप भी
Rajasthan News: राजस्थान में एक ओर जमकर सियासी रंग उड़ रहे है दूसरी ओर होली के त्यौहार पर फागोत्सव की धूम मची हुई है।
आज हम आपकों बताएंगे कि कैसे पुराने जमाने से यहां राजघराने आज भी होली का त्यौहार मनाते आए है। गुलाबी शहर (Pink Cilty) का गुलाल गोटा आखिर क्यों प्रसिद्ध है। शायद आपने गुलाल गोटे का नाम पहली बार सुना हो।

दरअसर राजस्थान के शाही परिवारों के लिए गुलाल गोटा नया नहीं है। राजसी परिवार इसी गुलाल गोटे से सदियों से होली खेलते आए है इस गुलाल गोटे की डिमांड प्रदेश ही नहीं सात समुंदर पार से आए विदेशी मेहमानों में भी खूब होती है।
ऐसे बनता है 2 ग्राम का गुलाल गोटा
गुलाल गोटा विशेष रूप से लाख से तैयार किया जाता है, गुलाल गोटा बनाने के लिए लाख की अनोखी चपड़ी होती हैं। जिसे आग में पिघलाया जाता है। 2-3 ग्राम लाख की छोटी-छोटी गोलियों को एक बांसुरी नुमा नली में लगाकर फूंक मारते हुए गोल घुमाया जाता है।
फिर धीरे-धीरे यह गुब्बारे की तरह फूल जाता है उसके बाद फिर धीरे से इसको नलकी में से बाहर निकालकर पानी भरे हुए बर्तन में रख दिया जाता है। गुब्बारे नुमा आकार तैयार होने के बाद फिर इसमें प्राकृतिक सुगंधित गुलाल भरा जाता है। यह गुलाल अरारोट का बना होता है।
यह हर्बल होता है। फिर इस पर कागज चिपका कर पैक कर दिया जाता है. तैयार गुलाल गोटा 15 ग्राम का होता है और इनकी कागज की तरह पतली परत होती है। गुलाल गोटा ईको फ्रेंडली है इसलिए लोग इसे ज्यादा पसंद करते हैं।
राजस्थान में फागुन की महक आने के साथ ही होली का खुमार भी छाने लगा है। ना सिर्फ लोग होली की तैयारियों में जुट गए है। साथ में बाजार में भी होली की रौनक नजर आने लगी है।
चार सौ सालों से गुलाल गोटा बनाने का काम जयपुर का एक मुस्लिम परिवार कर रह है। इनकी कई पीढ़ियां इस काम को करते चले आ रही है। अब राजा-महाराज तो नहीं रहे, लेकिन राजस्थान के कई राजसी परिवार आज भी गुलाल गोटे का इस्तेमाल करते हैं।
6 गोटे की पैकिंग 150 रुपए
वर्षों से गुलाल गोटा तैयार कर रहे अमान खान बताते हैं कि होली खेलने के सबसे शानदार गुलाल गोटा हैं जो बिल्कुल हल्का होता है। जिसे होली खेलते समय किसी पर फेंक कर मारा जाता है तब यह फूटता है और इसमें से कलर निकलता है।
अमान खान बताते हैं कि जयपुर में होली से एक महीने से पहले ही गुलाल गोटा बनना तैयार हो जाता है और सीजन में सभी गुलाल गोटा तैयार करने वाले कारीगर ठीक ठाक पैसा कमा लेते हैं।












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