राजस्थान में नया निर्वाचन आयुक्त कौन? 4 IAS अफसरों में कांटे की टक्कर, शुभ्रा सिंह की दावेदारी मजबूत
राजस्थान के सियासी गलियारों में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य का अगला निर्वाचन आयुक्त कौन होगा? मौजूदा निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता का कार्यकाल 17 सितंबर 2025 को समाप्त हो रहा है और दिसंबर 2025 में पंचायत व निकाय चुनाव की तैयारी जोरों पर है।
ऐसे में राजस्थान सरकार निर्वाचन आयुक्त पद को खाली छोड़ने का जोखिम नहीं लेना चाहेगी। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि राजस्थान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा नए निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति में जातीय समीकरण और चुनावी रणनीति को तवज्जो देंगे।

सूत्रों के मुताबिक, राजस्थान के नए निर्वाचन आयुक्त बनने की रेस में फिलहाल चार बड़े नाम हैं। दो वर्किंग आईएएस और दो रिटायर्ड। इनमें सबसे खास नाम है महिला अफसर शुभ्रा सिंह का, जिन्हें प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
समीकरण और सियासी गणित
राजस्थान निर्वाचन आयुक्त की भूमिका सरपंच चुनाव और निकाय चुनावों में बेहद अहम मानी जाती है। जिला कलेक्टर से लेकर बीएलओ तक के चुनावी फैसलों पर उनकी सीधी पकड़ होती है। यही कारण है कि इस पद पर नियुक्ति जातीय संतुलन, राजनीतिक संदेश और प्रशासनिक दक्षता, तीनों के मेल से तय होती है।
राजस्थान सरपंच चुनाव कब होंगे?
राजस्थान हाईकोर्ट पहले ही सरकार से पूछ चुका है कि 6 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतों में चुनाव कब होंगे? अब संकेत मिल रहे हैं कि दिसंबर 2025 तक पंचायत और शहरी निकाय चुनाव एक साथ हो सकते हैं। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री के पाले में है, जबकि कैबिनेट सब-कमेटी जल्द रिपोर्ट सौंपने वाली है।
ये आईएएस हैं निर्वाचन आयुक्त पद की दौड़ में
- राजेश्वर सिंह (1989 बैच): ग्रामीण व पंचायती राज विभाग के पूर्व एसीएस, पंचायत पुनर्गठन में अहम भूमिका। मजबूत प्रशासनिक पकड़, लेकिन सचिन पायलट से नजदीकी उनकी राह में बाधा बन सकती है।
- पवन कुमार गोयल (1988 बैच): स्वायत्त शासन विभाग में लंबे समय तक सेवाएं। साफ-सुथरी छवि और बीजेपी-कांग्रेस दोनों सरकारों में अच्छा तालमेल। वैश्य समुदाय से ताल्लुक, जो बीजेपी का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है।
- आनंद कुमार (1994 बैच): वर्तमान में वन एवं पर्यावरण विभाग के एसीएस। दलित अफसर, मुख्यमंत्री के करीबी माने जाते हैं। गृह विभाग में ढाई साल का अनुभव, लॉ एंड ऑर्डर संभालने में माहिर।
- शुभ्रा सिंह (1989 बैच): रोडवेज की चेयरमैन, लंबे समय तक दिल्ली में पोस्टिंग। महिला होने का फायदा और मिलनसार छवि के चलते आधी आबादी को साधने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।












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