SDM Thappad Kand: राजस्‍थान के थप्‍पड़बाज निर्दलीय प्रत्‍याशी नरेश मीणा को अब कितने दिन जेल में रहना पड़ेगा?

राजस्‍थान के देवली-उनियारा उपचुनााव 2024 के थप्‍पड़बाज निर्दलीय प्रत्‍याशी नरेश मीणा को एसडीएम अमित कुमार चौधरी के थप्‍पड़ मारने के मामले में शुक्रवार को न्‍यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्‍हें 14 दिन की न्‍यायिक हिरासत में भेजा गया है, मतबल अब नरेश मीणा कम से कम 14 दिन तो जेल में रहेंगे।

राजस्थान के टोंक जिले के देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र के गांव समरावता में एसडीएम थप्‍पड़ कांड के बाद उपद्रव होने की वजह से अभी भी पुलिस बल तैनात है। शुक्रवार दोपहर को टोंक जिला डॉ. सौम्‍या झा और एसपी विकास सांगवान ने गांव समरावता पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। टोंक कलेक्‍टर-एसपी ने गांव समरावता के स्‍थानीय लोगों से बातचीत की।

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हुआ यह था कि राजस्‍थान की सात सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। टोंक की देवली उनियारा समेत सभी सातों सीटों पर 13 नवंबर को मतदान हो रहा है। समरावता के ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार किया, जिसके कारण विरोध प्रदर्शन हुए। निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीना भी समर्थकों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए। तनाव तब बढ़ गया जब नरेश मीणा ने अधिकारियों पर मतदाताओं को मजबूर करने का आरोप लगाया और मतदान केंद्र में घुसने का प्रयास किया। इसी दौरान पोलिंग बूथ के बाहर मालपुरा एसडीएम अमित कुमार चौधरी के थप्‍पड़ जड़ दिया।

एसडीएम थप्‍पड़ कांड के बाद मतदान समाप्त हो गया और मतदान दल लौट रहा था तो ग्रामीणों ने मतदान दल को रोकने की कोशिश की, जिससे अराजकता और फैल गई। इसी दौरान पुलिस और नरेश मीणा के समर्थक आमने-सामने हो गए। समर्थकों ने जमकर उत्‍पात मचाया। इस दौरान टोंक एसपी विकास सांगवान की गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई। पुलिस ने रात करीब साढ़े नौ बजे नरेश मीना को हिरासत में लिया, लेकिन उसके समर्थकों ने जल्द ही हस्तक्षेप कर उसे हिरासत से छुड़ा लिया।

पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने से स्थिति और बिगड़ गई, जिसके कारण भीड़ ने पथराव और आगजनी शुरू कर दी। 10 पुलिस अधिकारियों सहित 50 से अधिक लोग घायल हो गए। समर्थकों ने समरवता गांव में 100 से अधिक वाहनों को आग के हवाले कर दिया।

इंटरनेट शटडाउन और निरंतर अशांति
नियंत्रण पाने के लिए अधिकारियों ने इलाके में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं और रात भर छापेमारी की। नरेश मीना को पकड़ने के प्रयासों के बावजूद, वह शुरू में पकड़ में नहीं आया। व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। दूसरे दिन 14 नवंबर को नरेश मीणा को गिरफ्तार कर लिया गया।

समर्थकों की प्रतिक्रिया और राजमार्ग नाकाबंदी
नरेश मीना की गिरफ़्तारी से उनके समर्थकों में फिर से गुस्सा भड़क गया। उन्होंने समरावता गांव की सड़कों पर टायर जलाए और विरोध स्वरूप पुलिस की गाड़ियों को रोका। पत्थरबाज़ी की घटनाएँ फिर से हुईं, जिसके बाद पुलिस को उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। अवरोध अलीगढ़ शहर के पास टोंक-सवाई माधोपुर राजमार्ग तक फैल गया, लेकिन लगभग दस घंटे के व्यवधान के बाद अधिकारियों ने अंततः इसे खुलवा दिया।

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