राजस्थान सरकार का रक्षाबंधन तोहफा: आंगनबाड़ी बहनों को 501 रुपए और दो दिन फ्री बस यात्रा
भाई-बहन के अटूट स्नेह का पर्व रक्षाबंधन इस बार 9 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना करेंगी। वहीं, इस अवसर पर राजस्थान सरकार ने भी प्रदेश की महिलाओं, खासकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को रक्षाबंधन पर खास तोहफा देने की तैयारी में है।
दरअसल, राजस्थान में रक्षाबंधन से पहले 7 अगस्त 2025 को 'आंगनबाड़ी बहन सम्मान दिवस' मनाया जाएगा, जिसमें प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को एक-एक छाता भेंट किया जाएगा।
साथ ही सवा लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं के बैंक खातों में बतौर रक्षाबंधन के तोहफे के रूप में 501 रुपए जमा करवाए जाएंगे। साथ ही रक्षाबंधन पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को दो दिन तक राजस्थान रोडवेज में निशुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से 'सुरक्षा-सम्मान पर्व' के तहत राज्य स्तरीय कार्यक्रम जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित किया जाएगा। राज्य स्तरीय कार्यक्रम का लाइव प्रसारण किया जाएगा। इसके अलावा जिला स्तर पर भी यह कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिनमें करीब 600 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं भाग लेंगी।
शहीद प्रतिमाओं को बांधती हैं राखी
राजस्थान में शेखावाटी अंचल ऐसा अंचल हैं, यहां शहीदों की प्रतिमाओं की पूजा लोक देवताओं की तरह की जाती है। रक्षाबंधन पर इन शहीद स्थलों पर भावुक कर देने वाले दृश्य देखने को मिलते हैं। बहनें शहीदों की प्रतिमाओं को राखी बांधकर अपनी भावनाएं व्यक्त करती हैं और कई बार प्रतिमा से लिपटकर रो पड़ती हैं। अकेले कारगिल जंग में शेखावाटी के 32 जवान शहीद हुए। सभी की उनके गांवों में प्रतिमाओं लगी हुई हैं।
रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है?
रक्षाबंधन एक पवित्र हिन्दू त्योहार है जो भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और रक्षा के वचन का प्रतीक है। यह त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
रक्षाबंधन से जुड़ी प्रमुख कथाएं
- द्रौपदी और श्रीकृष्ण : जब श्रीकृष्ण की उंगली कट गई थी, तो द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया। इसे रक्षा सूत्र माना गया। इसके बदले श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा का वचन दिया और चीरहरण के समय उनकी लाज बचाई।
- इंद्र और इंद्राणी: देव-दानव युद्ध में इंद्र को पराजय का सामना करना पड़ रहा था। तब उनकी पत्नी इंद्राणी ने एक पवित्र धागा (रक्षा सूत्र) उनकी कलाई पर बांधा। इसके बाद इंद्र युद्ध में विजयी हुए।
- रानी कर्णावती और हुमायूं: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ की रानी कर्णावती ने मुगल शासक हुमायूं को राखी भेजकर अपने राज्य की रक्षा की गुहार की थी। हुमायूं ने राखी का सम्मान करते हुए उनकी सहायता के लिए अपनी सेना भेजी।













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