अपने गढ़ में वसुंधरा अभी भी 'महारानी', कांग्रेस के सेंध लगाने की कोशिशें तेज, हाड़ौती में क्या है BJP का हाल?
राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले ही भाजपा में पूर्व सीएम व दिग्गज बीजेपी नेत्री वसुंधरा राजे के रोल को लेकर सवाल उठते रहे हों लेकिन उनका गढ़ अब भी सुरक्षित है। ये बात अलग है कि इस बार कांग्रेस राजस्थान में हर पांच साल में सरकार बदलने वाले मिथक को तोड़ने के दावे के साथ राजे के गढ़ में सेंधमारी करने में जुटी है।
भाजपा को इस बार भी राजस्थान में हाड़ौती क्षेत्र से बढ़त मिलती दिख रही है। कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ समेत कुल 17 विधानसभा सीटों में से अधिकतर में मतदाताओं को बीच किसी तरह की लहर नहीं दिख रही है।

हाड़ौती में इस तरह की स्थिति के दो कारण सामने आते हैं। जिसमें से एक तो मौजूदा सीएम अशोक गहलोत के खिलाफ जमीनी स्तर पर कोई विरोध नहीं है। हालांकि कांग्रेस समेत मौजूदा विधायकों के प्रति नाराजगी सामने भी आई है। इसके बावजूद कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को लेकर किसी तरह का विरोध नहीं दिख रहा। वहीं दूसरी ओर बीजेपी को लेकर उत्साह में कमी इस बात से हो सकती है क्योंकि राजस्थान भजपा में वसुंधरा राजे की जगह को लेकर अनिश्चितता है।
राजस्थान का हाड़ौती क्षेत्र हमेशा से भाजपा का गढ़ रहा है। पिछले चुनावों पर नजर डालें तो यहीं से बीजेपी के दो दिग्गज मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत और वसुंधरा राजे जीतते रहे हैं। शेखावत ने पहली बार 1977 में छबड़ा सीट जीती थी। जबकि वसुंधरा राजे 20 साल से झालरापाटन का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
हाड़ौती में इस बार भी राजे स्पष्ट रूप से भाजपा की बड़ी नेता बनी हुई हैं। यहां की जनता उनकी "निर्णय लेने की क्षमता" और "मजबूत नेतृत्व" के लिए सराहना करती है। इसके अलावा उनकी शाही वंशावली भी एक प्रभाव छोड़ती है।
वहीं दूसरी ओर राजे के भाजपा में जगह और उम्मीदवारी की घोषणा में देरी के चलते इस बार चुनाव में हाड़ौती में कुछ अलग माहौल बनने के कयास लगाए जा रहे हैं। जो कि भाजपा के लिए एक बुरी खबर हो सकती है।
दरअसल, राजे की लोकप्रियता से भाजपा हाड़ौती क्षेत्र में हमेशा से मजबूत रही है। हालांकि हर बार राज्य के अन्य हिस्सों में चुनावी समीकरण बदलते रहे लेकिन ये क्षेत्र भाजपा के पक्ष में रहा। पिछले विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो 2013 में भाजपा ने हाड़ौती की 17 में से 16 सीटों पर कब्जा किया था। जबकि 2018 में 10 सीटें बीजेपी को मिली। जबकि कांग्रेस को सात सीटों पर जीत हासिल हुई थी। ऐसे में हाड़ौती में भाजपा की स्थिति तब भी मजबूत रही जब राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी।
वहीं अब हाड़ौती में राजे के बाद दूसरे बीजेपी नेताओं के वर्चस्व की संभावना के बीच इस चुनाव को हाड़ौती के लोग एक अनिच्छा से देख रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक हाड़ौती के लोगों से राजे का काफी जुड़ाव रहा है। यहां के लोगों का मानना है की राजस्थान भाजपा में राजे एकमात्र नेता हैं, जो अब तक सीएम पद के लिए दावा कर सकती हैं।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रही है। कोटा में गहलोत सरकार की 1,200 करोड़ रुपये की हेरिटेज चंबल रिवर फ्रंट परियोजना को लेकर पार्टी नेता बड़े दावे कर रहे हैं।












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