Cheshta Bishnoi: 21 साल की पायलट बिश्नोई मौत के बाद यूं हुईं 'अमर', जाते-जाते 8 लोगों को दे गईं जिंदगी
Cheshta Bishnoi Death News: राजस्थान ने बहादुर पायलट बेटी चेष्टा बिश्नोई को खो दिया। चेष्टा बिश्नोई की महाराष्ट्र के पुणे में 17 दिसंबर 2024 को सड़क हादसे में मौत हो गई। वह राजस्थान के जैसलमेर के गांव खेतोलाई की रहने वाली थीं। मौत के बाद चेष्टा बिश्नोई अमर हो गईं, क्योंकि परिवार ने उनके अंग दान कर दिए, जिसने आठ लोगों को जिंदगी जिंदगी मिलेगी।
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जानकारी के अनुसार जैसलमेर के गांव खेतोलाई की बेटी चेष्टा बिश्नोई पुणे में बारामती के रेड बर्ड फ्लाइट अकादमी में पायलट की ट्रेनिंग ले रही थी। 9 दिसंबर को पुणे में चेष्टा बिश्नोई अपने तीन अन्य ट्रेनी पायलट साथियों के साथ घूमने के लिए निकली थीं। रास्ते में उनकी कार असंतुलित होकर एक पेड़ से टकरा गई। हादसे में चेष्टा की साथ तक्षु शर्मा व आदित्य कनासे ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। जबकि कृष्ण सिंह और चेष्टा बिश्नोई गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
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एयर लिफ्ट कर पार्थिव देह जैसलमेर लाई
कृष्ण सिंह और चेष्टा बिश्नोई को स्थानीय लोगों ने पास के अस्पताल में पहुंचाया, जहां उपचार के दौरान मंगलवार को चेष्टा की भी मौत हो गई। उसकी पार्थिव देह एयर लिफ्ट कर जैसलमेर लाई गई। फिर सड़क मार्ग से गांव खेतोलाई पहुंचाई, जहां गमगीन माहौल में चेष्टा बिश्नोई का अंतिम संस्कार किया गया।

9 दिन कोमा में रहीं चेष्टा बिश्नोई
परिजनों के अनुसार चेष्टा बिश्नोई ने 12 माह पहले पुणे में पायलट की ट्रेनिंग शुरू की थी। वह 200 घंटे का ट्रेनिंग पीरियड करना चाहती थी, जिसमें 68 घंटे की उड़ान की ट्रेनिंग पूर्ण कर ली थी। 9 दिसंबर को सड़क हादसे के बाद चेष्टा कोमा में चली गई थी। 9 दिन तक वह कोमा रही।

चेष्टा बिश्नोई की किडनी, हार्ट, लीवर किए दान
नौ दिन तक कोमा रहने की वजह से ब्रेन डेड चेष्टा बिश्नोई के परिजनों ने उसके अंगदान करने का फैसला लिया। परिजनों ने चेष्टा की दो किडनी, हार्ट, लीवर और झिल्ली दान कर दी, जिनसे आठ लोगों को नई जिंदगी मिल सकेगी।
बता दें कि चेष्टा बिश्नोई के पिता ज्योति प्रकाश बिश्नोई पोकरण में गैस एजेंसी संचालक हैं जबकि मां सुष्मा बिश्नोई हाउसवाइफ है। भाई जोधपुर में पढ़ रहा है। चेष्टा के परदादा भैराराम बिश्नोई गांव खेतोलाई के लंबे समय तक सरपंच रह चुके हैं।













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