Mahashivratri 2024: ताड़केश्वर महादेव मंदिर, जहां बकरी ने शेर को दी मात,आज है यहां भव्य मंदिर,जानिए
Mahashivratri 2024: राजस्थान की राजधानी और छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध जयपुर में आज विश्व प्रसिद्ध ताड़केश्वर महादेव मंदिर में भक्तों का हुजुम उमड़ा।
छोटी काशी आज हर हर महादेव के जयकारों से गुंजायमान हो गया। शहर में शिवालियों के बाहर लगी भक्तों की लंबी कतारें लग गई। सुबह से श्रद्धालु महादेव की पूजा और दर्शनों के उमड़ते नजर आए।

महाशिवरात्रि के महासंयोग पर मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा, शिवालयों में भोले के भक्त महा शिवरात्रि के अवसर पर पूजा अर्चना और जलाभिषेक के लिए सुबह से लाइन में लगे रहे।
भगवान शिव के भक्त भोले को मनाने के लिए भांग-धतूरे, बेल-पत्र और फूल-माला चढ़ा रहे हैं, ताकि भोलेनाथ की कृपा उन्हें प्राप्त हो।
महाशिवरात्रि पर छोटी काशी बोल बम ताड़क बम और हर हर महादेव के जयकारों से गूंज उठी, सुबह से श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित करने के लिए शिवालयों में पहुंचे, जयपुर के प्राचीन ताड़केश्वर महादेव मंदिर, रोजगारेश्वर महादेव मंदिर और झारखंड महादेव मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ा।
महाशिवरात्रि के मौके पर श्रद्धालुओं में अपने भगवान के दर्शन कर जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और फल-फूल अर्पित करने की होड़ देखने को मिली।
जयपुर के छोटे-बड़े सभी शिवालयों में भक्त भगवान से मनोकामना मांगने के लिए सुबह से ही कतारबद्ध अपनी बारी का इंतजार करते दिखे।
जयपुर की बसावट से पहले स्थापित ताड़केश्वर महादेव मंदिर में तड़के 3:00 बजे से श्रद्धालु हाथ में गंगासागर और फल-फूल प्रसाद की थाली सजाकर भगवान को जलाभिषेक करते हुए ऋतु पुष्प, धतूरा, गाजर, मोगरी, बेर, शमी पत्र, बेलपत्र अर्पित कर मनोकामना मांगी।
इस दौरान पुलिस प्रशासन और मंदिर प्रशासन की ओर से भक्तों के मंदिर में प्रवेश करने के लिए त्रिपोलिया बाजार से ही बेरिकेडिंग की गई। साथ ही किसी तरह की अप्रिय घटना ना हो इसके लिए 100 से ज्यादा पुलिस के जवानों ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली.
मंदिर की सेवा-पूजा में लगे मनीष ने बताया कि ताड़केश्वर महादेव मंदिर जयपुर का ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिर है.।यहां स्वयंभू शिवलिंग है और ये मंदिर जयपुर की बसावट से पहले से स्थापित है।
आज यहां व्यास परिवार की आठवीं पीढ़ी सेवा पूजा कर रही है, उन्होंने बताया कि आमेर राज्य के समय इस स्थान पर ढूंढाड़ गांव बसा हुआ था और जिस जगह वर्तमान में मंदिर स्थापित है।
वहां ताड़ के वृक्षों का जंगल हुआ करता था। यहां श्मशान की भूमि पर एक गाय नियमित एक ही स्थान पर दूध छोड़ा करती थी।
इसी स्थान पर एक बकरी ने अपने बच्चों को बचाने के लिए हिंसक शेर से मुकाबला कर उसे भी हरा दिया था, इस स्थान पर जब खुदाई की गई तो यहां भगवान शिव का विग्रह मिला और फिर महाराजा सवाई जयसिंह ने यहां मंदिर का निर्माण कराया और इसकी जिम्मेदारी आमेर के ही पुजारी व्यास परिवार को दी गई।
ताड़केश्वर महादेव मंदिर के अलावा भी जयपुर के तमाम शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ी, हालांकि इस बार भी शंकरगढ़ स्थित एकलिंगेश्वर महादेव मंदिर भक्तों के लिए नहीं खुला।
जिसकी वजह से भक्तों ने दूसरे शिवालयों की ओर रुख किया, वहीं शाम को मंदिरों में विशेष सजावट करते हुए भगवान की मनमोहक झांकी भी सजाई गई।
झारखंड महादेव मंदिर में भी उमड़ी भीड़
जयपुर की वैशाली नगर में द्रविड़ शैली के झारखंड महादेव मंदिर के बाहर भी कल सुबह से ही भक्तों की लंबी कतार देखी गई। घंटों इंतजार के बाद अपने आराध्य के दर्शन और जलाभिषेक का इंतजार करते हुए भक्त लंबी कतार में नजर आए। इस दौरान पुलिस प्रशासन भी कर चौबंद दिखा और व्यवस्थाओं पर नियंत्रण नजर आया।
बंद रहेगा एकलिंगेश्वर महादेव मंदिर
जयपुर की मोती डूंगरी पहाड़ी पर स्थित एक लिंगेश्वर महादेव मंदिर के दर्शनों का इंतजार करने वाले श्रद्धालु इस बार भी निराश हुए। कोरोना के बाद से मंदिर प्रबंधन में साल के एक बार खुलने वाले इस मंदिर को आम दर्शनों के लिए नहीं खोला गया है। इस बार शिवरात्रि पर मंदिर में दर्शन की उम्मीद की जा रही थी। पर दर्शनों की अनुमति नहीं मिलने के कारण भक्त निराश नजर आए।












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