राजस्थान : कांग्रेस नेता भंवरलाल मेघवाल पंचतत्व में विलीन, जानिए मास्टर से मंत्री तक का सफर

जयपुर। राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री व दिग्गज नेता मास्टर भंवरलाल मेघवाल मंगलवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। मास्टर भंवरलाल मेघवाल के बेटे मनोज ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। राजस्थान के चूरू जिले के सुजानगढ़ कस्बे में मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल का अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले उनकी पार्थिव देह अंतिम दर्शन के लिए उनके निवास पर रखी गई।

इन मंत्रियों ने अर्पित किए श्रद्धासुमन

इन मंत्रियों ने अर्पित किए श्रद्धासुमन

अशोक गहलोत सरकार में मंत्री डॉ. रघु शर्मा, प्रताप सिंह खाचरियावास, गोविंद सिंह डोटासरा समेत कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने पहुंच अंतिम नमन करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए। कांग्रेस नेताओं के अलावा, भाजपा के दिग्गज नेता व उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, युनूस खान समेत विपक्ष के कई नेता भी मास्टर भंवरलाल के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।

शोक में राजस्थान में रहा राजकीय अवकाश

शोक में राजस्थान में रहा राजकीय अवकाश

बता दें कि मास्टर भंवरलाल के निवास से लेकर मोक्षधाम तक उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। इसमें हजारों की संख्या में उनके समर्थक शामिल हुए। शहर की गली-चौराहों जहां से पार्थिव देह निकली लोगों ने पुष्प वर्षा की। वहीं, मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल के निधन पर सुजानगढ़ पूरी तरह बंद रहा तो वहीं प्रदेश में एक दिन का राजकीय अवकाश भी रहा।

 मास्टर भंवरलाल मेघवाल ने मेदांता में ली अंतिम सांस

मास्टर भंवरलाल मेघवाल ने मेदांता में ली अंतिम सांस

गौरतलब है कि 72 वर्षीय मास्टर भंवरलाल मेघवाल का सोमवार को मेदांता हॉस्पिटल में निधन हो गया था। उनकी कई महीनों से तबीयत खराब थी। जिसके चलते वह वेंटिलेटर पर थे। मेघवाल राजस्थान कांग्रेस के दिग्गज दलित नेताओं में शामिल थे। वे पिछले करीब 41 साल से राजनीति में सक्रिय थे।

 मास्टर भंवरलाल मेघवाल का जन्म व परिवार

मास्टर भंवरलाल मेघवाल का जन्म व परिवार

पूर्व मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल का जन्म राजस्थान के चूरू जिले के सुजानगढ़ उपखंड की शोभासर ग्राम पंचायत के गांव बाघसर पूर्वी में चुनाराम मेघवाल के घर 2 जुलाई 1948 को हुआ। वर्तमान में इनका परिवार सुजानगढ़ उपखंड मुख्यालय के वार्ड बीस में पीसीबी स्कूल के पीछे स्थित जयनिवास में रहता है। 15 मई 1965 को भंवरलाल मेघवाल की शादी केसर देवी से हुई। इनके एक बेटा व दो बेटी हैं। बेटी बनारसी देवी चूरू की जिला प्रमुख भी रह चुकी थी। बनारसी का भी पिछले माह ही निधन हो गया था। बेटा मनोज मेघवाल नमक का व्यवसाय करते हैं।

मास्टर भंवर लाल मेघवाल सरकारी स्कूल में थे शिक्षक

मास्टर भंवर लाल मेघवाल सरकारी स्कूल में थे शिक्षक

बता दें कि चूरू​ जिले भंवरलाल मेघवाल ने मास्टर से मंत्री तक का सफर तय किया था। भंवरलाल मेघवाल सरकारी टीचर हुआ करते थे। सुजागढ़ के राजकीय झवर स्कूल में बतौर पीटीआई कार्यरत रहे। शिक्षक होने के कारण ही भंवरलाल मेघवाल को मास्टर कहा जाता था। वर्ष 1977 में शिक्षक की नौकरी से इस्तीफा देकर इन्होंने चुनाव लड़ा। पहली बार में हार का सामना करना पड़ा था।

 मास्टर भंवरलाल मेघवाल का राजनीतिक सफर

मास्टर भंवरलाल मेघवाल का राजनीतिक सफर

भंवरलाल मेघवाल राजस्थान के दिग्गज दलित नेता थे। बीते 41 साल से राजनीति में सक्रिय थे। चूरू जिले की सुजानगढ़ विधानसभा सीट से निर्दलीय समेत कांग्रेस की टिकट पर पांच बार विधायक रहे चुके थे। सबसे पहले 1977 विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमाया था। पहली बार में हारे। फिर 1980 के चुनाव में बतौर निर्दलीय जीत दर्ज की। उसके बाद से हर बार राजस्थान विधानसभा चुनाव लड़ते आ रहे थे। मास्टर भंवरलाल के साथ एक अजब संयोग जुड़ा हुआ था। वो यह है कि ये एक विधानसभा चुनाव हारते थे और उसका अगला चुनाव जीतते थे।

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