कौन थे कुलदीप दिवाच, बर्थडे पर हुआ भारतीय सेना के जवान का अंतिम संस्कार, पिता को निहारती रही 18 महीने की मासूम
Kuldeep Diwach: 18 महीने की हर्षिता अपने पापा के लौटने का इंतजार कर रही थी। उसके पापा का जन्मदिन आने वाला था। हर्षिता के पापा अपने जन्मदिन से लौट तो आए पर इस बार उनका लौटना पहले जैसा नहीं था। इस बार वो नहीं तिरंगे में लिपटा केवल उनका शरीर लौटा था। कुलदीप दिवाच नेवी में लीडिंग एयरक्राफ्ट ऑर्डिनेंस मैकेनिक (LAOM) थे। उनका शरीर जैसे ही उनके घर पहुंचा परिवार के साथ-साथ पूरे इलाके के लोगों की आंखें भर आई।
जैसे ही कुलदीप का पार्थिव शरीर उनकी मां सुभीता देवी और पत्नी संगीता ने देखा, दोनों खुद को संभाल नहीं सके। जबकि कुलदीप की 18 महीने की मासूम बेटी हर्षिता टकटकी लगाए केवल अपने पिता को देखती रही। उस मासूम को तो ये समझ भी नहीं आ रहा था कि आज उसके पापा उसके पास क्यों नहीं आ रहे, उसे प्यार क्यों नहीं कर रहे। वहां मौजूद जिस भी किसी ने ये दृश्य देखा उसका दिल उस बच्ची के लिए रो पड़ा।

कौन थे कुलदीप दिवाच?
कुलदीप दिवाच राजस्थान के झुंझुनू जिले के सूरजगढ़ के एक छोटे से गांव घरडू की ढाणी के रहने वाले थे। दो भाइयों में छोटे कुलदीप भारतीय नौसेना में काम करते थे। उन्होंने 10 अगस्त 2018 को भारतीय नौसेना जॉइन की थी। वहां वो लीडिंग एयरक्राफ्ट ऑर्डिनेंस मैकेनिक के पोस्ट पर थे। वो मुंबई में पोस्टेड थे। कुलदीप ने जब नौसेना ज्वाइन की थी उस वक्त वो केवल 19 साल के थे। उन्होंने देश की सेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया और लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहे।
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कुलदीप का जन्म 10 जुलाई 1999 को हुआ था। इस साल 10 जुलाई 2026 को वो 28 साल के होने वाले थे लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। जन्मदिन से 1 दिन पहले वो इस दुनिया को छोड़कर चले गए। उनके जन्मदिन के दिन यानी 10 जुलाई को उनका अंतिम संस्कार हुआ। ये ऐसा संयोग था जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। जिस दिन वो इस दुनिया में आए थे उसी दिन पंचतत्वों में विलीन हो गए।

कैसे हुई कुलदीप की मौत?
कुलदीप दिवाच मुंबई में भारतीय नौसेना में अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। 6 जुलाई की सुबह लगभग आठ बजे वो स्कूटी से ड्यूटी पर जाने के लिए निकले थे। उसी दौरान तेज अंधड़ आ गई। आंधी इतनी तेज थी कि सड़क किनारे के एक पेड़ की शाखा टूटकर उनके ऊपर आ गिरी। इस हादसे कुलदीप गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां तीन दिन तक उनका इलाज चलता रहा। इलाज के दौरान 9 जुलाई को कुलदीप की मौत हो गई।
कुलदीप के मौत से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिस दिन परिवार उनके जन्मदिन मनाने की तैयारी करता, उसी दिन उन्हें तिरंगे में लिपटी अंतिम विदाई देनी पड़ी। उनकी 18 महीने की मासूम बेटी बस अपने पिता को अंतिम बार निहारती रही।

कुलदीप को भारतीय नौसेना की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी। सूरजगढ़ से घरडू की ढाणी तक तिरंगा यात्रा निकाली गई। कुलदीप के पिता की मौत पहले ही हो चुकी है। उनकी मां आंगनवाड़ी सेविका हैं। उन्होंने बड़े ही कष्ट सहकर अपने दोनों बच्चों को पाला और देश की सेवा के लायक बनाया। कुलदीप के बड़े भाई एयरफोर्स में पोस्टेड हैं।
बता दें, राजस्थान का झुंझुनूं जिला लंबे समय से देश को बड़ी संख्या में सैनिक देने के लिए जाना जाता है। यहां के कई परिवारों के सदस्य सेना की अलग-अलग इकाइयों में सेवा दे रहे हैं। कुलदीप दिवाच ने भी देश की सेवा करते हुए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का गवाह बना कि गांव और जिले के लोगों के दिलों में अपने वीर जवान के लिए कितना सम्मान और अपनापन था।
क्या होती है LAOM की जिम्मेदारी, जिसे संभाल रहे थे कुलदीप
लीडिंग एयरक्राफ्ट ऑर्डिनेंस मैकेनिक भारतीय नौसेना का एक अहम तकनीकी पद है। इस पद पर तैनात जवान नौसेना के विमान और हेलीकॉप्टरों में इस्तेमाल होने वाले हथियारों, गोला-बारूद, मिसाइल सिस्टम और उनसे जुड़े उपकरणों की जांच, रखरखाव और सुरक्षित संचालन की जिम्मेदारी संभालते हैं। यह काम बेहद जिम्मेदारी वाला माना जाता है।
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