Rajasthan: अजमेर दरगाह को मंदिर घोषित करने की याचिका पर भड़के खादिम, अंजुमन सैयद जादगान ने जताई आपत्ति
Rajasthan News: राजस्थान के अजमेर स्थित ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह को मंदिर घोषित करने की याचिका पर विवाद गहराता जा रहा है। इस याचिका की कड़ी आलोचना करते हुए दरगाह के खादिमों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था अंजुमन सैयद जादगान ने इसे सांप्रदायिक सद्भाव को बाधित करने और मुसलमानों को निशाना बनाने का प्रयास बताया है।
न्यायालय का नोटिस और संस्था की प्रतिक्रिया
अजमेर की एक स्थानीय अदालत ने इस मामले में अजमेर दरगाह समिति, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को नोटिस जारी कर प्रतिक्रिया मांगी है। अंजुमन सैयद जादगान के सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने कहा कि दरगाह अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आती है और एएसआई का इससे कोई संबंध नहीं है। चिश्ती ने जोर देकर कहा कि संस्था को भी इस मामले में शामिल किया जाना चाहिए और याचिका को समाज को सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने का एक प्रयास करार दिया।

सांप्रदायिकता बढ़ाने का प्रयास
सैयद सरवर चिश्ती ने कहा कि याचिका का उद्देश्य दरगाह को निशाना बनाकर मुसलमानों को अलग-थलग करना और भारत की सांप्रदायिक सद्भावना को ठेस पहुंचाना है। चिश्ती ने बताया कि यह सूफी मजार धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक है और यहां हिंदू-मुस्लिम दोनों श्रद्धालु समान भाव से आते हैं। उन्होंने बाबरी मस्जिद विवाद के फैसले का उदाहरण देते हुए धार्मिक स्थलों को बार-बार विवाद में घसीटे जाने पर निराशा व्यक्त की।
1991 के धार्मिक स्थलों अधिनियम का उल्लंघन
यूनाइटेड मुस्लिम फोरम राजस्थान के अध्यक्ष मुजफ्फर भारती ने याचिका को 1991 के धार्मिक स्थलों अधिनियम का उल्लंघन बताया। भारती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दरगाह की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता को मान्यता देते हैं और उर्स के अवसर पर चादर चढ़ाने की परंपरा को जारी रखते हैं।उन्होंने प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट से ऐसे विवादों का निपटारा करने का आग्रह किया। जो देश के सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता द्वारा दायर
यह याचिका हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता द्वारा दायर की गई है। विष्णु गुप्ता ने दावा किया कि दरगाह का निर्माण एक प्राचीन शिव मंदिर को नष्ट करके किया गया था और इसके समर्थन में हर बिलास सरदा की पुस्तक का हवाला दिया। उन्होंने दरगाह को शिव मंदिर घोषित करने और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने की मांग की है।
ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह का महत्व
अजमेर की यह दरगाह न केवल मुसलमानों बल्कि हिंदुओं के लिए भी एक आध्यात्मिक केंद्र है। यह मजार मुगल सम्राट हुमायूं द्वारा महान सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के सम्मान में बनवाई गई थी। मुगल शासक अकबर भी यहां श्रद्धा के साथ आते थे और इस परंपरा को भारतीय उपमहाद्वीप में एकता और सहिष्णुता का प्रतीक माना जाता है।
अजमेर की दरगाह समिति इस याचिका पर कानूनी सलाह ले रही है और अदालत में ठोस दलीलें पेश करने की तैयारी कर रही है। देशभर में इस याचिका ने सांप्रदायिक सद्भाव और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में अदालत का निर्णय इस विवाद के भविष्य की दिशा तय करेगा।
यह विवाद भारत में धार्मिक सहिष्णुता और बहुलवाद के महत्व को रेखांकित करता है। देशभर के धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील संगठनों ने इस मुद्दे पर सांप्रदायिक राजनीति से बचने की अपील की है।












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