राजस्थान की 26 वर्षीय कंचन शेखावत कमाती है 1.70 करोड़ रुपए, गांव किरडोली से यूं पहुंची अमेरिका

सीकर। राजस्थान के सीकर जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर लक्ष्मणगढ़ तहसील में छोटा सा गांव है किरडोली छोटी। यहां के राजपूत परिवार की बेटी ने कामयाबी की ऐसी ​कहानी लिख दी है, जो युवाओं को प्रेरित करनी वाली है। बेटी का नाम है कंचन शेखावत (Kanchan Shekhawat Sikar)

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    Rajasthan: Rajasthan के एक छोटे से गांव की बेटी ऐसे पहुंची America । वनइंडिया हिंदी

    कंचन शेखावत किरडोली छोटी सीकर से अमेरिका पहुंची

    कंचन शेखावत किरडोली छोटी सीकर से अमेरिका पहुंची

    वन इंडिया हिंदी से बातचीत में कंचन शेखावत ने बताया कि उन्होंने असफलता से हार मानने की बजाय ​अपनी जिद और जुनून के साथ 'जब तक हारूंगी नहीं तब तक हार नहीं मानूंगी' के मूलमंत्र को अपनाया। यही वजह है कि आज कंचन सीकर के छोटे से गांव से निकलकर यूएसए में 1 करोड़ 70 लाख के पैकेज पर नौकरी कर रही हैं।

     कौन है सीकर की कंचन शेखावत

    कौन है सीकर की कंचन शेखावत

    26 वर्षीय कंचन शेखावत राजस्थान के सीकर जिले के गांव किरडोली छोटी के भंवर सिंह शेखावत और चांद कंवर की होनहार बेटी है। हाउसवाइफ बहन सुनीता कंवर से छोटी व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे भाई धमेंद्र शेखावत से बड़ी कंचन शेखावत वर्तमान में अमेरिका के सिएटल में अमेजन कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर डवलवपर के रूप में कार्यरत है।

    कंचन की शुरुआती पढ़ाई गुजरात में

    कंचन की शुरुआती पढ़ाई गुजरात में

    लक्ष्मणगढ़ के गांव किरडोली छोटी के राजपूत मोहल्ला निवासी कंचन के भाई धमेंद्र ने बताया कि उनके पिता भंवर सिंह शेखावत गुजरात में प्लास्टिक का काम करते थे। तब वे परिवार समेत वडोदरा रहते थे। ऐसे में कंचन की शुरुआती पढ़ाई गुजराती माध्यम से हुई। फिर इनका परिवार सीकर आ गया।

     सीकर के प्रिंस एकेडमी से की पढ़ाई

    सीकर के प्रिंस एकेडमी से की पढ़ाई

    कुछ समय बाद कंचन का परिवार गुजरात से किरडोली छोटी लौट आया। ​फिर कंचन ने सीकर के प्रिंस एकेडमी में दाखिला लिया। सीकर स्थित प्रिंस एकेडमी के मुख्य प्रबंध निदेशक राजेश ढिल्लन ने बताया कि कंचन ने 10वीं में 89 फीसदी और 12वीं 85 फीसदी अंक हासिल किए।

    प्रिंस एकेडमी के डॉ. पीयूष सुण्डा ने बढ़ाया हौसला

    प्रिंस एकेडमी के डॉ. पीयूष सुण्डा ने बढ़ाया हौसला

    कंचन बताती हैं कि वे सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहती थी। ऐसे में आईआईटी में दाखिले के लिए एग्जाम दिया। चयन नहीं हुआ तो मायूस हो गई थी। मन में नकारात्मक भाव आने लगे थे। तब प्रिंस एकेडमी के निदेशक जोगेन्द्र सुण्डा व चेयरमैन डा. पीयूष सुण्डा ने हौसला बढ़ाया।

     कोटा में रहकर की आईआईटी की तैयारी

    कोटा में रहकर की आईआईटी की तैयारी

    आईआईटी में चयन नहीं होने के बाद ​भी कंचन ने हार नहीं मानी और कोटा जाकर आईआईटी की तैयारी की। वहां भी आईआईटी में चयन नहीं हुआ। हालांकि एनआईटी में सफल रहीं।। मिजोरम कॉलेज मिली। वर्ष 2010 से 2014 तक मिजोरम में पढ़ाई की। इस दौरान पोलारिस कम्पनी में करीब आठ लाख रुपए प्रति वर्ष का पैकेज मिला। कैम्पस प्लेसमेंट के बाद जॉब करने के लिए कंचन चेन्नई आ गई।

    चेन्नई से अमेरिका की उड़ान

    चेन्नई से अमेरिका की उड़ान

    पोलारिस कम्पनी में जॉब करते हुए कंचन शेखावत ने अमेजन कम्पनी में इंटरव्यू दिया और वर्ष 2016 में उनका चयन भी हो गया। इसके बाद कंचन ने चेन्नई से अमेरिका की उड़ान भरी। वर्ततान में एक करोड़ 70 लाख के पैकेज जॉब कर रही हैं। कंचन कहती हैं कि अमेरिका में काम करते हुए सीकर की बहुत याद आती है। सीकर में स्कूली शिक्षा वाले दिन कभी नहीं भूल पाउंगी।

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